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कश्मीर में भाजपा-PDP गठबंधन टूटा, अमित शाह की बैठक के बाद इस वजह से हुआ फैसला

जम्मू। जम्मू कश्मीर में भाजपा और पीडीपी की गठबंधन वाली सरकार गिर चुकी है। मंगलवार को दिल्ली में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह द्वारा बुलाई गई महत्वपूर्ण बैठक के बाद यह फैसला लिए जाने की खबर है। भाजपा नेता राम माधव ने अन्य नेताओं के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए इसकी पुष्टि कर दी है।

उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों में कश्मीर में जो परिस्थिति बनी है जिसे लेकर बैठक हुई। सभी से इनपुट लेने के बाद प्रधानमंत्री मोदी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह व अन्य ने फैसला लिया है कि भाजपा के लिए जम्मू-कश्मीर में इस सरकार के साथ आगे चलना संभव नहीं होगी। सरकार गिरने के बाद महबूबा मुफ्ती को अब मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ेगा।

दरअसल, तेज विकास व पारदर्शी प्रशासन के लक्ष्य के साथ पीडीपी से गठजोड़ करने वाला भाजपा हाईकमान महबूबा सरकार के कश्मीर केंद्रित रवैये से नाराज चल रहा था। ऐसे हालात में कड़े तेवर दिखाते हुए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ नेताओं व मंत्रियों को अचानक दिल्ली तलब कर लिया है।

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वहीं राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने भी मंगलवार सुबह अमित शाह के घर जाकर उनसे मुलाकात की है। फिलहाल यह साफ नहीं हुआ है कि इस मुलाकात में क्या बात हुई।

राज्य में पार्टी ने संसदीय चुनाव की तैयारियों को तेजी देने की मुहिम चलाई है, ऐसे में पीडीपी ने अपने काम करने के तरीके में बदलाव न लाया तो भाजपा के लिए जम्मू संभाग में लोगों के बीच जाना मुश्किल हो जाएगा। ऐसे में भाजपा के लिए कोई बड़ा फैसला करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा। भाजपा अपने राजनीतिक भविष्य की बेहतरी के लिए कोई ठोस कदम उठा सकती है।

सरकार के एकतरफा फैसलों का भाजपा के आधार क्षेत्र जम्मू में विपरीत प्रभाव हो रहा है। इन हालात में अमित शाह मंगलवार को दिल्ली में प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ नेताओं, मंत्रियों के साथ बैठक में राजनीतिक हालात, सरकार के कामकाज संबंधी मुद्दों पर चर्चा करेंगे। बैठक में हिस्सा लेने के लिए प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र रैना के नेतृत्व में पार्टी के वरिष्ठ नेता सोमवार शाम को दिल्ली रवाना हो गए। उनके साथ उपमुख्यमंत्री कविंद्र गुप्ता भी दिल्ली गए हैं।

अमित शाह की बैठक को इसलिए भी अहम माना जा रहा क्योंकि उन्होंने जम्मू दौरे से ठीक चार दिन पहले नेताओं, मंत्रियों को दिल्ली तलब कर संकेत दिया है कि मामला गंभीर है। सूत्रों के अनुसार, पीडीपी ने पहले पत्थरबाजों की रिहाई, कठुआ मामले, सरकारी भूमि से गुज्जर, बक्करवालों को न हटाने जैसे फैसले कर भाजपा के लिए मुश्किलें पैदा की थीं। अब रमजान में संघर्षविराम व धार्मिक संगठन अहले हदीस को सरकारी भूमि देने के मामले में भी पीडीपी ने मनमर्जी की है।

भाजपा इतना सब होने के बाद भी सरकार को श्री बाबा अमरनाथ भूमि आंदोलन में हिस्सा लेने वाले युवाओं के खिलाफ मामले वापस लेने के लिए राजी नहीं कर पाई है। इससे भाजपा आधार क्षेत्र जम्मू में घिर रही है। प्रधानमंत्री पैकेज के इस्तेमाल के मामले में सरकार नाकाम रही है व संसदीय चुनाव में इस मुद्दे का तूल पकड़ना तय है।

प्रदेश भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने माना कि मौजूदा सरकार भाजपा हाईकमान की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाई है। जो लक्ष्य लेकर राष्ट्रीय पार्टी ने सरकार बनाई है, उन्हें हासिल करना अभी संभव नहीं हुआ है। इससे पार्टी की छवि पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है व इसे बड़ी गंभीरता से लिया जा रहा है।

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