कब मिलेगी बेतरतीब यातायात से निजात
राजनीतिक संरक्षण के चलते नही मिल रही निजात
जबलपुर प्रतिनिधि। शहर के बेतरतीब यातायात को सुधारने अगर कोई अधिकारी आगे आता है तो उस पर राजनीतिक लोगों का दबाव सामने आ जाता है। प्राय देखा जा रहा है कि यातायात की समस्या के निदान में सबसे बड़ा रोड़ा शहर के जनप्रतिनिधि ही है। अगर यातायात विभाग कोई कार्रवाई शुरू करता है तो ये जनप्रतिनिधि इन कार्रवाई में अवरोध उत्पन्न करते नजर आते है। वही राजनीतिक रसूखदारों के चलते लोग जनहित में कार्य कर रहे अधिकारियों पर धौंस जमाते नजर आते है इस दबाव के आगे ये अधिकारी कर्मचारी हाथ जोड़ते भी दिखाई देते है। ज्यादातर इस संरक्षण का उपयोग शहर के यातायात में अव्यवस्था की भागीदारी निभाने वाले ऑटो चालक करते नजर आ रहे है। जिनका उपयोग ये नेता अपने कार्यक्रमों में भीड़ बढ़ाने के सहयोग के रूप में किया करते है। जिसके कारण कई समस्याएं देखने को मिल रही है।
स्वंय कलर कोडिंग करवा रहे ऑटो चालक
प्राय देखने में आ रहा है कि शहर के कुछ ऑटो चालकों ने यातायात विभाग को भ्रमित करने के इरादे से स्वंय अपने ऑटों में कलर कोडिंग कर अपना रूट खुद ही निर्धारित कर रहे है। जिसका लाभ भी उन्हें मिलता दिखाई दे रहा है। यातायात कर्मी या अधिकारी यह मान लेता है कि ऑटो में कलर कोडिंग विभाग द्वारा ही की गई है। अगर जांच हो तो शहर के कई रूटों पर इस तरह के ऑटो पकड़े जायेगें।
बेधड़क ओव्हर लोडिंग
शहर के आसपास के क्षेत्रों में चल रहे ऑटो में ओव्हर लोडिंग की समस्या देखने को मिल रही है। ज्यादातर बरेला मार्ग, भेड़ाघाट, खमरियां इत्यादि क्षेत्रों मे ऑटो चालक तय सीमा से बाहर सवारियों को बैठा रहे है। जिससे हादसों की आशंका बढ़ रही है।
मनमानी पर उतारू
ऑटो चालको की मनमानी शहर की सड़कों पर देखी जा रही है। बेढंगें तरीके से सड़कों पर ऑटो दौड़ाते हुए लोगों को दुर्घटनाग्रस्त कर रहे है। अचानक ऑटो का सामने आकर रूक जाना और बीच सड़क पर खड़े होकर सवारियां बैठाना जगह जगह देखा जा सकता है।
राजनीतिक संरक्षण का प्रयास
इन ऑटो चालकों ने अब अपना संरक्षण बदलते हुए कल कैबिनेट मंत्री लखन घनघोरियां से मुलाकात की और उनसे शहर के बेतरतीब यातायात में सहयोग की अपील भी की है।

