सागर कलेक्टर, एसडीएम और तहसीलदार के खिलाफ हाईकोर्ट में अवमानना याचिका- भूमाफिया से मिलीभगत और कोर्ट के आदेश की अनदेखी का आरोप
सागर कलेक्टर, एसडीएम और तहसीलदार के खिलाफ हाईकोर्ट में अवमानना याचिका- भूमाफिया से मिलीभगत और कोर्ट के आदेश की अनदेखी का आरोप

सागर कलेक्टर, एसडीएम और तहसीलदार के खिलाफ हाईकोर्ट में अवमानना याचिका- भूमाफिया से मिलीभगत और कोर्ट के आदेश की अनदेखी का आरोप
सागर: मध्य प्रदेश के सागर जिले के प्रशासनिक महकमे में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब जिले के आला अधिकारियों के खिलाफ सीधे मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय (जबलपुर हाईकोर्ट) में अवमानना (Contempt of Court) का मुकदमा दायर कर दिया गया।
यह पूरा मामला सागर जिले के गौरझामर स्थित ऐतिहासिक ‘देव दत्तात्रेय लोक न्यास’ की बेशकीमती संपत्तियों से जुड़ा है। कोर्ट के पुराने कड़े निर्देशों के बावजूद मंदिर और न्यास की जमीनों से अतिक्रमण न हटाए जाने पर नाराज न्यासियों (Trustees) ने सागर कलेक्टर, क्षेत्रीय एसडीएम (SDM) और तहसीलदार के विरुद्ध हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के आदेशों की धज्जियां उड़ाने का आरोप
न्यासियों द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में दायर की गई अवमानना याचिका में जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बेहद गंभीर और तीखे सवाल खड़े किए गए हैं:
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आदेशों की अनदेखी: याचिका में साफ तौर पर आरोप लगाया गया है कि देव दत्तात्रेय लोक न्यास की करोड़ों रुपए की शासकीय व ट्रस्ट की भूमि पर भूमाफियाओं ने अवैध कब्जे और पक्के निर्माण कर रखे हैं। इन अवैध कब्जों को हटाने के लिए पूर्व में हाईकोर्ट और देश की सबसे बड़ी अदालत (सुप्रीम कोर्ट) द्वारा स्पष्ट आदेश और निर्देश जारी किए जा चुके थे, लेकिन सागर के प्रशासनिक अधिकारियों ने इन आदेशों को ठंडे बस्ते में डाल दिया। सागर कलेक्टर, एसडीएम और तहसीलदार के खिलाफ हाईकोर्ट में अवमानना याचिका- भूमाफिया से मिलीभगत और कोर्ट के आदेश की अनदेखी का आरोप
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कार्रवाई के नाम पर लीपापोती: न्यासियों का आरोप है कि प्रशासन ने अदालती आदेशों का पालन करने के बजाय भूमाफियाओं को खुला संरक्षण दिया और मंदिर की जमीन को मुक्त कराने के लिए कोई प्रभावी या ठोस कदम नहीं उठाया।
उल्टा चोर कोतवाल को डांटे: मंदिर के पुजारी और श्रद्धालुओं पर ही कर दी कार्रवाई!
अवमानना याचिका में प्रशासन की नीयत पर सवाल उठाते हुए एक और बेहद चौंकाने वाला और सनसनीखेज खुलासा किया गया है:
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श्रद्धालुओं को बनाया निशाना: याचिका के अनुसार, एक तरफ जहां असली भूमाफिया और अतिक्रमणकारी खुलेआम घूम रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ जिला प्रशासन ने रंजिश और मिलीभगत के तहत मंदिर के मुख्य पुजारी सहित एक दर्जन से अधिक स्थानीय श्रद्धालुओं को ही निशाना बना डाला।
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लगा दी प्रतिबंधात्मक धाराएं: भूमाफियाओं के दबाव में आकर प्रशासन ने मंदिर की सुरक्षा और न्याय की मांग कर रहे इन निर्दोष श्रद्धालुओं और पुजारी के विरुद्ध दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 107-116 के तहत दंडात्मक और प्रतिबंधात्मक कार्रवाई कर उन्हें ही मुजरिमों की तरह कटघरे में खड़ा कर दिया।
अब हाईकोर्ट के रडार पर सागर के बड़े अफसर
न्यायालय की अवमानना को भारत में बेहद गंभीर कृत्य माना जाता है, जिसमें अधिकारियों को सीधे जेल तक की हवा खानी पड़ सकती है। हाईकोर्ट ने इस अवमानना याचिका को स्वीकार करते हुए मामले को संज्ञान में ले लिया है। कानूनी जानकारों का कहना है कि यदि सागर कलेक्टर, एसडीएम और तहसीलदार कोर्ट के समक्ष अतिक्रमण न हटाने का कोई ठोस और वैध कारण पेश नहीं कर पाते हैं, तो इन अधिकारियों पर गाज गिरना तय है।








