FEATURED

इंसेफलाइटिस से आठ और बच्चों की मौत, अब तक 77 ने तोड़ा दम

मुजफ्फरपुर। मुजफ्फरपुर और आसपास के इलाकों और वैशाली में इंसेफलाइटिस का कहर जारी है। मुजफ्फरपुर बिहार के मुजफ्फरपुर और आसपास के क्षेत्रों के साथ-साथ वैशाली में एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) का कहर जारी है। गुरुवार को मुजफ्फरपुर के एसकेएमसीएच में सात और एक यानी कुल आठ बच्चों की मौत हो गई। इसके साथ ही 26 नए मरीजों को गंभीर हालत में भर्ती किया गया है। बिहार में इस बीमारी ने अब तक 77 बच्चों की जान ली है।

गुरुवार को मुजफ्फरपुर में आठ और वैशाली में चार बच्चों की मौत की खबर आई। हालांकि राज्य सरकार सिर्फ 47 बच्चों की मौत की पुष्टि कर रही। वैशाली जिले के कई प्रखंडों में भी एईएस ने पांव पसारना शुरू कर दिया है। बीमारी से लोग दहशत में हैं। यहां दस दिनों में 13 बच्चों की मौत हो चुकी है।

उपलब्ध संसाधनों से केंद्रीय टीम असंतुष्ट

बीमारी भयावह होने के बाद स्थिति की समीक्षा करने पहुंची केंद्रीय टीम एसकेएमसीएच में उपलब्ध संसाधनों से असंतुष्ट दिखी। टीम के सदस्यों का मानना है कि इस तरह की बीमारी के बेहतर उपचार के लिए ट्रॉमा सेंटर, बड़ी आइसीयू, योग्य चिकित्सक एवं एक्सपर्ट नर्स होने चाहिए। जो यहां पर नहीं है। हालांकि टीम के चिकित्सक इस संबंध में विस्तार से बोलने से कतराते रहे।

केंद्रीय टीम का मानना है कि बच्चों को इस बीमारी से बचाने के लिए यहां बड़ी आइसीयू अनिवार्य है। बच्चों के समुचित उपचार में आइसीयू सबसे अहम है। वैसे संसाधनों की कमी को दूर करने के लिए अस्पताल प्रबंधन ने वैकल्पिक व्यवस्था की है। यहां चार पीआइसीयू वार्ड हैं। एक एवं दो नंबर पीआइसीयू थर्ड फ्लोर पर है। एक में आठ एवं दूसरे में छह बेड की क्षमता है। वहीं थ्री एवं फोर सेकेंड फ्लोर पर है। ऑर्थो एवं शल्य विभाग की आइसीयू में वैकल्पिक व्यवस्था के तहत पीआइसीयू थ्री एवं मेडिसिन एवं स्त्री रोग विभाग की आइसीयू को पीआइसीयू फोर बनाया गया है। उपचार करने वाले चिकित्सक भी मानते हैं कि इससे उपचार प्रभावित हो रहा है।

Ashutosh shukla

30 वर्षों से निरन्तर सकारात्मक पत्रकारिता, संपादक यशभारत डॉट काम

Leave a Reply