हाटपीपल्या। देवास के ग्राम लिंबोदा में 423 वर्ष बाद सोमवार को ब्रह्ममुहूर्त में ठुनी माता (महालक्ष्मी) का पूजन कर गांव में प्रवेश किया जाएगा। इसके पूर्व रविवार रात नौ घंटे तक पूरा गांव खाली रहा।
सोमवार अलसुबह सबसे पहले गौ माता को गांव में प्रवेश करवाएंगे। फिर ग्रामीण प्रवेश करेंगे। सरपंच दरियावसिंह अटाड़िया ने दावा किया कि गांव की विपदा दूर करने और सुख-समृद्धि के लिए यह पूजा होती है। पिछली बार 1652 विक्रम संवत् में यह पूजा हुई थी। ढाई हजार की आबादी वाले ग्राम लिंबोदा में शुरू होने वाले इस अनुष्ठान में गूलर की लकड़ी से ठुनी (महालक्ष्मी) की मूर्ति बनाकर 5 दिन तक पूजन-हवन किया गया। मान्यतानुसार रविवार रात आठ बजे गांव के सभी लोग खिड़की-दरवाजे खुले रखकर मिट्टी के बर्तन व अन्य सामान साथ लेकर गांव की सीमा के बाहर गए और रात गुजारी। सोमवार सुबह 5 बजे चारों दिशाओं की करीब 9 किमी लंबी सीमा को दूध की धारा गिराकर कच्चे सूत व पचरंगी नाड़े का बंधन बांधा जाएगा। इसके बाद यज्ञ व महाआरती होगी। यज्ञ की अग्नि से ही हर घर में चूल्हा जलाया जाएगा। 40 मुस्लिम परिवार के करीब 400 सदस्यों ने भी पूजन में हिस्सा लिया।







