अंतराष्ट्रीय

आधार की सुरक्षा पर खतरे को सबके सामने लाने वाले पत्रकार अवॉर्ड के हकदार

नई दिल्‍ली । आधार पर भारत सरकार की मुश्किलें बढती ही जा रहीं हैं; महज 500 रुपए में आधार की सुरक्षा खतरे में आ जाने की खबर से केंद सरकार को काफी विरोध का सामना करना पडा। इतना ही नहीं आधार प्रोग्राम को चलाने वाली संस्था यूनीक आइंडेंटिफिकेशन अथॉरिटी आॅफ इंडिया (UIDAI) ने खबर प्रकाशित करने वाले अखबार और उसकी रिपोर्टर के खिलाफ ही एफआईआर दर्ज कर दिया।

इस मामले में इंटरनेट की दुनिया में अपने खुलासों से सभी को चौंकाने वाले कंप्यूटर प्रोफेशनल एडवर्ड स्नोडेन ने भी अखबार की इस रिपोर्ट का समर्थन किया है।स्नोडेन ने ट्रिब्यून की रिपोर्टर का पक्ष लिया है और उन्होंने कहा कि रिपोर्टर को अवॉर्ड दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि केस यूआईडीएआई पर होना चाहिए न कि अखवार पर और न ही उसके रिपोर्टर पर।

ट्विटर पर स्नोडेन ने एक पत्रकार के उस ट्वीट को रिट्वीट किया जिसमें पत्रकार ने UIDAI के इस कदम की आलोचना करते हुए कहा था कि आधार की सुरक्षा पर खतरे की खबर को एक्सपोज करने वाली पत्रकार पर कार्रवाई करने की बजाय सरकार को इसकी कमियों पर ध्यान देना चाहिए। पत्रकारों को निशाना मत बनाइए।
स्नोडेन ने लिखा, ‘आधार की सुरक्षा पर खतरे को सबके सामने लाने वाले पत्रकार अवॉर्ड के हकदार हैं, कार्रवाई के नहीं। अगर सरकार को न्याय ही करना है तो उन्हें अपनी उन नीतियों में सुधार करना चाहिए, जिसने करोड़ों भारतीयों की निजता का हनन किया है। अगर दोषियों को गिरफ्तार करना है, तो UIDAI को करिए।’

गौरतलब है कि इसके पहले भी स्नोडेन ने आधार डेटा लीक होने की खबरों पर कहा था कि ऐसे प्रोग्राम बस सरकारी दुरुपयोग के लिए होते हैं। हर सरकार अपने नागरिकों का निजी डेटा अपने पास रखना चाहती है लेकिन इसका नतीजा बस सरकारी दुरुपयोग ही होता है।

UIDAI ने 7 जनवरी को ट्रिब्यून और उसकी पत्रकार रचना खैरा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाया था। इसकी आलोचना होने पर संस्था ने सफाई दी कि वो मीडिया या व्हिसल ब्लोअर्स को टारगेट नहीं कर रही है।

Ashutosh shukla

30 वर्षों से निरन्तर सकारात्मक पत्रकारिता, संपादक यशभारत डॉट काम

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