मध्यप्रदेश

अफसरों ने दिया एग्जाम, किसी ने चार पेज लिखा तो दूसरे ने मांगी सप्लीमेंट्री

ग्वालियर। सवालों के जवाब लिखते समय किसी के हाथ कांप रहे थे तो कोई छत की ओर निहार रहा था। कोई दो पन्ने भी नहीं भर सका तो किसी ने सप्लीमेन्ट्री कॉपी भी भर डाली। लिखित परीक्षा के बाद जब इंटरव्यू हुआ तो किसी अधिकारी को हंसी आ गई, कोई रुक-रुक कर जवाब दे सका। कारण यह था कि लिखित और मौखिक परीक्षाएं निगम की नौकरी में आने के 15 से 20 साल बाद स्टूडेंट बने अफसरों ने दी थीं।

नगर निगम आयुक्त विनोद शर्मा ने अनूठा प्रयोग करते हुए स्वच्छता सर्वेक्षण 2019 की तैयारियों के लिए अधिकारियों की यह परीक्षा ली। रविवार को निगम मुख्यालय और बाल भवन में परीक्षाएं आयोजित की गईं। अभी कॉपियां चेक होना है, इसलिए रिजल्ट घोषित नहीं किया गया है।


16 अधिकारी रहे गैरहाजिर

स्वच्छता सर्वेक्षण 2019 के लिए केन्द्र की टीम जनवरी में निरीक्षण के लिए आएगी। सरकार ने इसके लिए गाइड लाइन जारी कर दी है। इस गाइड लाइन को निगम के जिम्मेदार अधिकारी कितना समझ सके हैं, यह परखने के लिए निगमायुक्त ने पहले चरण में सभी नोडल अधिकारी और क्षेत्राधिकारियों की लिखित और मौखिक परीक्षाएं कराईं। इसमें 93 अधिकारी शामिल हुए और 16 अनुपस्थित रहे। अनुपस्थित अफसरों को कारण बताओ नोटिस थमाए जाएंगे। उचित कारण न पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की हिदायत निगमायुक्त ने दी है।

लिखित परीक्षा में निबंधात्मक सवाल

स्वच्छता क्या है, स्वच्छता सर्वेक्षण 2019 में अब तक क्या किया, आगे क्या करने की योजना है, नवाचार में क्या-क्या किया जा सकता है? लिखित परीक्षा में यह निबंधात्मक सवाल पूछे गए। स्टूडेंट बने निगम अधिकारियों को 20 पेज की कॉपी थमाई गई। इसमें से कोई तो चार पेज भी नहीं भर सका और किसी ने दूसरी कॉपी (सप्लीमेंट्री) तक ले ली।

इसके बाद एमआईटीएस के प्रोफेसरों व निगम अधिकारियों को बाह्व परीक्षक (एक्सटर्नल एग्जामिनर) नियुक्त करते हुए सभी की मौखिक साक्षात्कार(इन्टरव्यू) लिया गया। यह अधिकारियों के बोलने की क्षमता परखने के लिए आयोजित की थी। इसमें भी ज्यादातर वही सवाल पूछे गए जो लिखित परीक्षा में थे। चूंकि परीक्षकों के सामने बोलने का मौका कई सालों बाद आया था, इसलिए ज्यादातर अधिकारी सवालों का जवाब देते समय झिझकते रहे। कुछ ऐसे भी अधिकारी रहे जो नेताओं की स्टाइल में हर सवाल का लयबद्ध रूप में जवाब दे गए।

शहर की जनता की भी जिम्मेदारी

निगमायुक्त श्री शर्मा ने छात्र बने अधिकारियों को संबोधित भी किया। उन्होंने कहा कि इस परीक्षा का यह आशय नहीं है कि कौन कितने पानी में है, बल्कि इससे यह पता करना है कि किसने-किसने ने स्वच्छता सर्वेक्षण की गाइड लाइन पढ़ी है। देश में नंबर वन आने के लिए नवाचार करने के कौन-कौन से आइडिया उनके दिमाग में चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्वच्छता केवल निगम की जिम्मेदारी नहीं बल्कि हर विभाग के साथ शहर की जनता की भी है। हमें तो जनता को जागरूक करना होगा। किस जोन में क्या-क्या किया जा रहा है और किस चीज की जरूरत है, यह देखना है।

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कम्प्यूटर ऑपरेटरों की भी होगी परीक्षा

निगमायुक्त ने बताया कि अभी नोडल और क्षेत्राधिकारियों की परीक्षा हुई है। अब कम्प्यूटर ऑपरेटरों व अन्य मैदानी अमले की भी परीक्षा होगी। स्वच्छता ऐप डाउनलोड कराना, ऑनलाइन फीडबैक जैसे कार्य ऑपरेटर ही करते हैं, इसलिए उन्हें भी पारंगत करना होगा।

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