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अप्रासंगिक हो चुके 58 पुराने कानूनों को खत्म करने के लिए विधेयक को मंजूरी

नई दिल्ली। सरकार ने कंपनी कानून 2013 में संशोधन करने की दिशा में कदम उठाते हुए एक विधेयक के मसौदे को मंजूरी दी। यह विधेयक कानून का रूप लेने के बाद उस अध्यादेश की जगह लेगा जो सरकार ने इस साल कंपनी कानून में संशोधन के लिए जारी किया था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक में इस विधेयक के मसौदे को मंजूरी दी गयी। सरकार का कहना है कि प्रस्तावित संशोधनों से कारोबार की प्रक्रिया सरल बनाने और नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल एंड स्पेशल कोर्ट्स में लंबित मुकदमों का बोझ कम का मार्ग प्रशस्त करेगा।

सरकार का फोकस इस कानून के उल्लंघन के गंभीर मामलों को निपटाने तथा कारपोरेट जगत द्वारा इसका अनुपालन सुचारु ढंग से सुनिश्चित करने पर रहेगा। इससे कानून का पालन करने वाली कंपनियों को फायदा होगा। साथ ही कंपनी कानून के तहत कारपोरेट गवर्नेस और अनुपालन फ्रेमवर्क की कमियों को दूर करने में मदद मिलेगी।

एक अन्य फैसले में कैबिनेट ने 58 पुराने कानूनों को खत्म करने के लिए एक विधेयक के मसौदे को भी मंजूरी दी। ये कानून अप्रासंगिक हो चुके हैं। एनडीए सरकार अपने दो कार्यकालों में अब तक 1824 पुराने कानूनों को खत्म कर चुकी है।

इसके अलावा कैबिनेट ने दिवालियेपन पर कानून इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड में सात संशोधनों को भी मंजूरी दे दी। इन संशोधनों के बाद कंपनियों की दिवालिया प्रक्रिया शीघ्र पूरी होने के आसार हैं।

पंद्रहवें वित्त आयोग की सेवा अवधि बढ़ी

सरकार ने पंद्रहवें वित्त आयोग की सेवा अवधि बढ़ाकर 30 नवंबर कर दी है। साथ ही आयोग की सिफारिशों का दायरा बढ़ाते हुए उसे रक्षा और आतंरिक सुरक्षा के लिए धन आवंटन के संबंध में भी सिफारिशें देने का अधिकार दिया है। सरकार ने 27 नवंबर 2017 को 15वें वित्त आयोग का गठन किया था। इसके अध्यक्ष एन के सिंह हैं। आयोग का कार्यकाल 30 अक्टूबर को समाप्त हो रहा था। आयोग की सिफारिशें एक अप्रैल 2020 से लागू होंगी।

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