दो महीने पहले योगेश को इस धोखा-धड़ी के बारे में उस वक्त पता चला, जब उसे एक बैंक से लेटर मिला कि दूसरे बैंक से ली गई टू-व्हीलर की ईएमआई जमा नहीं करने की वजह से उसके बैंक खाते को फ्रीज कर दिया गया है। 38 वर्षीय योगेश ने अपने बैंक की सूचना दी कि उन्होंने हाल में कोई दोपहिया वाहन खरीदा ही नहीं है।

इस मामले की पड़ताल में पता चला कि अन्य बैंको से भी योगेश के नाम पर कई लोन लिए गए हैं और उस पर 6.5 लाख रुपए का बकाया है। इस वजह से योगेश का सिबिल स्कोर गिर गया और वह भविष्य में किसी भी ऋण नहीं दिए जाने के लिए ब्लैक लिस्ट कर दिया गया। योगेश ने पवई पुलिस ने मामले की शिकायत की, लेकिन पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की।

दूसरे बैंक के साथ जांच करने पर, यह पता चला कि किसी के उसके पैन कार्ड में फर्जीवाडा किया गया था। पैन में अलग तस्वीर और अलग हस्ताक्षर के जरिये योगेश के नाम पर कई ऋण अप्रूव करा लिए गए थे। योगेश ने कहा कि यह पहचान चोरी का एक स्पष्ट मामला था, जहां किसी ने धोखाधड़ी में मेरे प्रमाण पत्र का इस्तेमाल किया था। हालांकि, जब उसने 29 मई को पवई पुलिस स्टेशन से संपर्क किया, तो पुलिस ने अपनी लिखित शिकायत स्वीकार कर ली। मगर, एफआईआर दर्ज करने से इंकार कर दिया।

ऐसे रहें सुरक्षित

सोशल मीडिया पर अपने पैन कार्ड और डेटा कार्ड के विवरण कभी भी पोस्ट न करें।

आधार कार्ड के लिए वर्चुअल आईडी को ही पेश करें।

अपनी कॉन्टेक्ट लिस्ट में कभी भी पैन या आधार नंबर सेव नहीं करें।

हमेशा दोनों कार्डों की फोटोकॉपी पर लिखें कि आपने यह किसे और किस काम से दी है।

अपने हथेली को फोटोग्राफ हस्तरेखा संबंधी ऐप्स में स्कैन करने से बचें।