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“तुम बस स्कूल आओ, बाकी हम देख लेंगे”: जब छात्राएं स्कूल नहीं पहुंचीं, तो 3 किमी जंगल चलकर पहुंचे शिक्षक; अंकिता और सरिता की राह आसान की

“तुम बस स्कूल आओ, बाकी हम देख लेंगे”: जब छात्राएं स्कूल नहीं पहुंचीं, तो 3 किमी जंगल चलकर पहुंचे शिक्षक; अंकिता और सरिता की राह आसान की

कटनी: जब लगन और संवेदनशीलता दिल में हो, तो शिक्षा की राह में आने वाली हर बाधा दूर हो जाती है। ऐसा ही एक प्रेरक उदाहरण कटनी जिले के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय नैगवा से सामने आया है। कक्षा 10वीं की दो छात्राओं—अंकिता और सरिता के स्कूल न आने पर शिक्षकों ने केवल औपचारिकता नहीं निभाई, बल्कि खुद उनके पास पहुंचकर उनकी परेशानियों को समझा और उनकी पढ़ाई जारी रखने का रास्ता साफ किया।

खाली कुर्सियां देख छात्राओं की तलाश में निकले शिक्षक

सुबह स्कूल की घंटी बजने और कक्षाएं शुरू होने के बाद जब 10वीं कक्षा की दो बेटियां—अंकिता और सरिता—स्कूल नहीं पहुंचीं, तो उनकी खाली कुर्सियां शिक्षकों को खटकने लगीं। विद्यालय के प्राचार्य विपिन तिवारी और स्टाफ ने इस बात का पता लगाने का फैसला किया।

शिक्षकों की टीम जब उनके घर पहुंची, तो पता चला कि दोनों बेटियां खुसरा महादेव गई हैं। आमतौर पर लोग यहीं रुक जाते, लेकिन नैगवा के शिक्षकों ने हार नहीं मानी। प्राचार्य विपिन तिवारी, अतिथि शिक्षकों और अन्य स्टाफ के साथ लगभग तीन किलोमीटर लंबा कठिन और पगडंडी वाला रास्ता तय करके खुसरा महादेव पहुंचे और दोनों छात्राओं से संपर्क किया।

 फीस और ड्रेस बनी थी पढ़ाई में रुकावट

जब शिक्षकों ने छात्राओं से बात की, तो उनकी मजबूरियों का खुलासा हुआ:

  • सरिता की मजबूरी (फीस की तंगी): सरिता ने बताया कि उसके परिवार के पास स्कूल की फीस भरने के पैसे नहीं हैं, जिसके कारण झिझक में वह स्कूल आने से बच रही थी।

    • प्राचार्य का आश्वासन: “तुम बस स्कूल आओ, फीस की चिंता मत करो। तुम्हारी समस्या दूर करने की व्यवस्था हम करेंगे।”

  • अंकिता की मजबूरी (ड्रेस न होना): अंकिता के पास स्कूल यूनिफॉर्म नहीं थी, जिससे वह शर्मिंदगी महसूस कर रही थी और उसके कदम स्कूल जाने से ठिठक रहे थे।

    • प्राचार्य का आश्वासन: “ड्रेस की चिंता मत करो। तुम विद्यालय आओ, ड्रेस की व्यवस्था विद्यालय की ओर से की जाएगी।”

शिक्षकों से मिले इस अटूट भरोसे और आत्मीयता के बाद दोनों बेटियों के चेहरे खिल उठे और उन्होंने नियमित रूप से स्कूल आने की अपनी सहमति दे दी।

 “किसी बच्चे की पढ़ाई जरूरतों की वजह से नहीं रुकनी चाहिए”

प्राचार्य विपिन तिवारी ने बताया कि किसी भी बच्चे की शिक्षा केवल फीस, ड्रेस या छोटी-मोटी जरूरतों की वजह से अधूरी नहीं रहनी चाहिए। नैगवा विद्यालय का यही प्रयास है कि हर बच्चा रोजाना स्कूल आए, मन लगाकर पढ़े और अपने उज्ज्वल भविष्य की नींव रखे।

शिक्षकों की इस पहल की क्षेत्र भर में सराहना की जा रही है, जिसने यह साबित कर दिया कि एक शिक्षक का काम सिर्फ पढ़ाना नहीं, बल्कि बच्चों का जीवन संवारना भी है।

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