नरोत्तम मिश्रा के ‘गढ़’ में आखिर क्यों चुना गया आशुतोष को? जानिए बीजेपी के इस चौंकाने वाले फैसले के 4 बड़े कारण
नरोत्तम मिश्रा के 'गढ़' में आखिर क्यों चुना गया आशुतोष को? जानिए बीजेपी के इस चौंकाने वाले फैसले के 4 बड़े कारण
नरोत्तम मिश्रा के ‘गढ़’ में आखिर क्यों चुना गया आशुतोष को? जानिए बीजेपी के इस चौंकाने वाले फैसले के 4 बड़े कारण
दतिया: मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर 30 जुलाई को होने वाले उपचुनाव से पहले सियासी घमासान चरम पर है। पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने से जहां उनके समर्थक सड़कों पर उतरकर उग्र प्रदर्शन कर रहे हैं, वहीं राजनीतिक गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यही तैर रहा है कि आखिर नरोत्तम मिश्रा के इस अभेद्य किले में बीजेपी ने आशुतोष तिवारी पर दांव क्यों खेला?
राजनीतिक विश्लेषकों और पार्टी सूत्रों के अनुसार, बीजेपी आलाकमान द्वारा नरोत्तम मिश्रा जैसे कद्दावर नेता की जगह आशुतोष तिवारी को कमान सौंपने के पीछे बेहद सोची-समझी रणनीति है, जिसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
1. छात्र जीवन का संघ (RSS) बैकग्राउंड और अटूट निष्ठा
आशुतोष तिवारी पार्टी के लिए कोई पैराशूट लैंडिंग (बाहरी नेता) नहीं हैं। वे अपने छात्र जीवन से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और वैचारिक संगठनों से जुड़े रहे हैं। बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व ने इस उपचुनाव में प्रत्याशी तय करने से पहले नेता के व्यक्तिगत रसूख से ज्यादा संगठन के प्रति निष्ठा और वैचारिक प्रतिबद्धता को सर्वोपरि रखा, जिसमें आशुतोष का पलड़ा भारी रहा।नरोत्तम मिश्रा के ‘गढ़’ में आखिर क्यों चुना गया आशुतोष को? जानिए बीजेपी के इस चौंकाने वाले फैसले के 4 बड़े कारण
2. ‘हाउसिंग बोर्ड’ के काम से बनी साफ-सुथरी और सरल छवि
आशुतोष तिवारी मध्य प्रदेश हाउसिंग बोर्ड के अध्यक्ष रह चुके हैं। इस कार्यकाल के दौरान उन्होंने राज्यभर में सरकारी आवासीय परियोजनाओं को समाज के अंतिम छोर पर बैठे गरीबों तक पहुंचाने में बेहद सक्रिय भूमिका निभाई थी। राजनीति में उनकी छवि एक साफ-सुथरे, बेदाग और बेहद सरल स्वभाव के संघर्षशील नेता की है, जिस पर विपक्ष के लिए सीधे उंगली उठाना आसान नहीं है।
3. ‘बड़े चेहरों’ के बजाय जमीनी कार्यकर्ता को तरजीह देने की रणनीति
बीजेपी पिछले कुछ समय से लगातार अपनी चुनावी रणनीति में बड़े बदलाव कर रही है। पार्टी अब स्थापित बड़े चेहरों या स्थापित क्षत्रपों के बजाय ऐसे नेताओं को आगे बढ़ा रही है जिनकी पकड़ सीधे जमीन पर हो। आशुतोष तिवारी एक लो-प्रोफाइल लेकिन जमीनी स्तर पर बेहद सक्रिय रहने वाले कार्यकर्ता हैं। पार्टी अपने इस फैसले से कैडर को यह संदेश भी देना चाहती है कि संगठन में काम करने वाले छोटे से छोटे कार्यकर्ता को भी बड़ा मौका मिल सकता है।
4. दतिया का नया स्थानीय और जातीय समीकरण
जानकारों का मानना है कि दतिया में पिछले कुछ समय में स्थानीय स्तर पर राजनीतिक और सामाजिक समीकरण बदले हैं। सत्ता विरोधी लहर (एंटी-इन्कंबेंसी) और जातीय संतुलन को अपने पक्ष में करने के लिए बीजेपी ने इस बार अपनी सोशल इंजीनियरिंग के तहत रणनीति बदली है। नरोत्तम मिश्रा के पारंपरिक गढ़ में एक नए चेहरे को उतारकर पार्टी वहां के जातीय समीकरणों को साधने और नए मतदाताओं को अपने पाले में लाने की कोशिश कर रही है।
चुनौतीपूर्ण राह: हालांकि, टिकट वितरण के बाद दतिया की सड़कों पर फूटा नरोत्तम समर्थकों का गुस्सा यह साफ बता रहा है कि आशुतोष तिवारी के लिए अपने ही घर की इस नाराजगी को दूर करना सबसे पहली और बड़ी चुनौती होगी। अब 30 जुलाई को होने वाली वोटिंग ही तय करेगी कि बीजेपी का यह बड़ा दांव मास्टरस्ट्रोक साबित होता है या नहीं।








