शरीर में क्यों होता है ‘वॉटर रिटेंशन’? जानें हाथ-पैरों की सूजन के लक्षण, कारण और आयुर्वेदिक उपाय
Health Care: हाथ-पैरों में सूजन और भारीपन कहीं 'वॉटर रिटेंशन' तो नहीं? जानें इसके कारण और राहत पाने के आयुर्वेदिक उपाय

शरीर में क्यों होता है ‘वॉटर रिटेंशन’? जानें हाथ-पैरों की सूजन के लक्षण, कारण और आयुर्वेदिक उपाय
स्वास्थ्य डेस्क: अक्सर हाथ, पैर, चेहरे या पेट पर सूजन की समस्या देखने को मिलती है, जो ‘वॉटर रिटेंशन’ (Fluid Retention) के कारण हो सकती है। आयुर्वेदिक डॉक्टर चंचल शर्मा (आशा आयुर्वेदा विशेषज्ञ) के अनुसार, जब हमारा शरीर मिनरल्स के लेवल को बैलेंस नहीं कर पाता है, तो शरीर के टिशूज़ में पानी जमा होने लगता है। इससे अंग फूलने लगते हैं और पैरों, एड़ियों व टखनों में भयंकर दर्द की शिकायत भी हो सकती है।
वॉटर रिटेंशन क्या है और क्यों होता है?
वॉटर रिटेंशन का मतलब है शरीर के अंदरूनी हिस्सों या ऊतकों में जरूरत से ज्यादा तरल पदार्थ का जमा हो जाना।
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किन्हें है ज्यादा खतरा: यह समस्या महिलाओं में अधिक आम है, खासकर पीरियड्स से पहले या प्रेगनेंसी के दौरान होने वाले हार्मोनल बदलावों के कारण।
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मुख्य कारण: ज्यादा नमक खाना, कम पानी पीना, लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहना, तथा दिल, किडनी या लिवर से जुड़ी बीमारियां।
शरीर में दिखने वाले मुख्य लक्षण
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शरीर में भारीपन महसूस होना।
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जोड़ों में अकड़न होना।
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अचानक तेज़ी से वज़न बढ़ना।
चेतावनी: यदि इसका समय पर इलाज न किया जाए, तो इससे हाई ब्लड प्रेशर, किडनी की समस्या या दिल की बीमारी जैसी गंभीर स्थितियां पैदा हो सकती हैं।
सूजन कम करने के आयुर्वेदिक व घरेलू उपाय
डॉक्टर चंचल शर्मा ने वॉटर रिटेंशन और सूजन को कम करने के लिए निम्नलिखित घरेलू उपाय बताए हैं:
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नमक और प्रोसेस्ड फूड कम करें: अपने भोजन में सोडियम की मात्रा घटाएं और डिब्बाबंद या जंक फूड से बचें।
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पोटैशियम और मैग्नीशियम युक्त आहार लें: केले, एवोकाडो, हरी सब्ज़ियां, दही और नट्स का सेवन करें, जो शरीर में तरल पदार्थों का संतुलन बनाए रखने में मदद करते हैं।
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खूब पानी पिएं: पर्याप्त पानी पीने से टॉक्सिन्स और अतिरिक्त नमक पेशाब के ज़रिए बाहर निकल जाते हैं।
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शारीरिक गतिविधि बढ़ाएं: नियमित व्यायाम और टहलने से ब्लड सर्कुलेशन सुधरता है और सूजन कम होती है।
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नैचुरल डाइयूरेटिक अपनाएं: कुलथी का पानी पीना और पार्सले (Parsley) का सेवन करना काफी फायदेमंद होता है।
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मालिश और कोल्ड थेरेपी: हल्के हाथों से मालिश करने से सर्कुलेशन बेहतर होता है। यदि हल्की सूजन और दर्द है, तो ठंडी सिंकाई (Cold Therapy) करें। ध्यान रखें कि ताज़ा सूजन पर हीट थेरेपी न करें, इससे सूजन बढ़ सकती है।








