लखनऊ/उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश विधान परिषद (UP MLC Election) के हालिया नतीजों में एक बेहद दिलचस्प और चर्चित खबर सामने आई है। टीवी स्क्रीन और प्रमुख मंचों के जरिए दुनिया को भविष्य, संकट निवारण और सफलता के उपाय बताने वाले प्रख्यात ज्योतिषाचार्य Indu Prakash Mishra की पत्नी स्मिता मिश्रा लखनऊ खंड स्नातक (ग्रेजुएट) सीट से चुनाव हार गई हैं।

इस हाई-प्रोफाइल UP MLC Election में निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतरीं स्मिता मिश्रा को 300 वोट भी हासिल नहीं हो सके, जिसके बाद यह मामला सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।
1. सपा की कांति सिंह ने दर्ज की बड़ी जीत
लखनऊ खंड स्नातक UP MLC Election सीट पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) को बड़ा झटका लगा है। समाजवादी पार्टी (SP) की प्रत्याशी कांति सिंह ने भाजपा के अवनीश पटेल को हराकर इस सीट पर शानदार जीत दर्ज की। कांति सिंह की इस जीत ने जहां सपा खेमे में जश्न का माहौल पैदा कर दिया है, वहीं Indu Prakash Mishra की पत्नी स्मिता मिश्रा की करारी हार ने सभी को चौंका दिया है।
2. दो साल की मेहनत और विज्ञापनों का नहीं मिला फायदा
स्मिता मिश्रा ने इस UP MLC Election के लिए काफी समय से जमीनी तैयारी की थी।
- उन्होंने लखनऊ खंड के अंतर्गत आने वाली लगभग 37 तहसीलों में स्कूल-कॉलेजों, शिक्षकों, स्नातकों और छात्रों से व्यक्तिगत जनसंपर्क किया था।
- अखबारों में पूरे-पूरे पन्ने के विज्ञापन जारी किए गए थे।
चुनाव अभियान के दौरान उन्हें ‘करणी सेना’, स्थानीय ‘ब्रह्म समाज’ और अपने संगठन ‘नवयुवक दल’ का समर्थन भी प्राप्त था।
इतने तामझाम और लंबे जनसंपर्क के बावजूद यह अभियान मतों में तब्दील नहीं हो सका और Indu Prakash Mishra की पत्नी 300 वोटों के आंकड़े को भी पार नहीं कर पाईं।
3. कांग्रेस से टिकट का वादा, फिर निर्दलीय उतरीं
स्मिता मिश्रा की उम्मीदवारी के पीछे एक दिलचस्प राजनीतिक घटनाक्रम भी रहा:
- कांग्रेस में शामिल होना: स्मिता मिश्रा 28 सितंबर को तत्कालीन यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय की मौजूदगी में पार्टी में शामिल हुई थीं। उन्हें लखनऊ स्नातक सीट से कांग्रेस का टिकट मिलने का आश्वासन मिला था।
संगठनात्मक बदलाव और टिकट कटना: कुछ ही समय बाद प्रदेश संगठन में फेरबदल हुआ और नई प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने स्मिता को टिकट न देने का फैसला किया।
निर्दलीय चुनाव: कांग्रेस से झटका लगने के बाद उन्होंने UP MLC Election में निर्दलीय ही उतरने का फैसला लिया।
4. सोशल मीडिया पर Indu Prakash Mishra की जमकर ट्रोलिंग
जैसे ही स्मिता मिश्रा की हार और कम वोटों की जानकारी सामने आई, सोशल मीडिया पर यूजर्स प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य Indu Prakash Mishra को लेकर चुटकी और तंज कसने लगे।
- यूजर्स का सवाल: लोग पूछ रहे हैं कि “जो टीवी पर बैठकर रोज दूसरों की किस्मत बताते हैं और जीत के उपाय देते हैं, क्या Indu Prakash Mishra अपनी ही पत्नी की हार की भविष्यवाणी नहीं कर सके या उन्हें कोई उपाय नहीं बता पाए?”
स्मिता मिश्रा की सफाई: सोशल मीडिया पर चल रही इन बातों के बीच उन्होंने स्पष्टीकरण देते हुए कहा, “मैंने चुनाव लड़ने से पहले अपने पति Indu Prakash Mishra से अपनी कुंडली या चुनावी किस्मत के बारे में कोई चर्चा नहीं की थी। हमारे घर बड़े-बड़े राजनेता आते हैं और उनके बताए उपायों से सफल होते हैं, लेकिन मैं कोई सत्ता सुख पाने के लिए नहीं, बल्कि केवल जनसेवा और परोपकार के भाव से उतरी थी।”
5. हार के बाद स्मिता मिश्रा के गंभीर आरोप और आगे का प्लान
अपनी हार पर स्मिता मिश्रा ने इस UP MLC Election की चुनावी व्यवस्था, मतदाता सूची और प्रशासनिक प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं:
- धांधली और वोटर लिस्ट में नाम न होना: उनका आरोप है कि उन्होंने लगभग 22,000 समर्थकों के फॉर्म जमा करवाए थे, लेकिन प्रशासनिक गड़बड़ी के चलते उनके वोटर्स के नाम सूची में नहीं जोड़े गए।
बूथ से एजेंटों को निकालना: उन्होंने आरोप लगाया कि कई पोलिंग बूथों पर उनके चुनावी एजेंटों को अंदर नहीं बैठने दिया गया और धनबल का इस्तेमाल हुआ।
2027 के विधानसभा चुनाव का ऐलान:
स्मिता मिश्रा ने कहा कि वह इस हार से हताश होने वाली नहीं हैं। उन्होंने वर्ष 2014 में गठन किए गए अपने संगठन ‘नवयुवक दल’ के बैनर तले आगामी 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में उतरने का ऐलान किया है और दावा किया है कि Indu Prakash Mishra के समर्थन और उनके संगठन की बदौलत वह कम से कम 50 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेंगी।
संक्षेप में प्रोफाइल (स्मिता मिश्रा):
पारिवारिक पृष्ठभूमि: प्रसिद्ध भविष्यवक्ता Indu Prakash Mishra की पत्नी स्मिता मिश्रा का मायका उन्नाव के कुरारी और ससुराल बाराबंकी के इकरा गांव में है। उनके दादा शंभू रतन शुक्ला स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे और उनके पिता रामसुंदर नाथ शुक्ला पुलिस अधिकारी (26 मेडल विजेता) रहे हैं।
संगठन: ‘नवयुवक दल’ (स्थापना 2014) और IP फाउंडेशन।














