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एवरेस्ट की चोटी पर चोरी: गाइड्स ने पर्यटकों को बनाया लूज़ मोशन का शि‍कार, अस्पताल और हेलीकॉप्टर कंपनियों ने करोड़ों वसूले, ऐसे हुआ घोटाले का पर्दाफाश

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काठमांडू, 2 अप्रैल 2026: एवरेस्ट की चोटी पर चोरी: गाइड्स ने पर्यटकों को बनाया लूज़ मोशन का शि‍कार, अस्पताल और हेलीकॉप्टर कंपनियों ने करोड़ों वसूले, ऐसे हुआ घोटाले का पर्दाफाश। दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट से जुड़ा एक चौंकाने वाला घोटाला सामने आया है। नेपाल में ट्रेकिंग गाइड, हेलीकॉप्टर कंपनियों और अस्पतालों की मिलीभगत से करीब 20 मिलियन डॉलर (लगभग 185 करोड़ रुपये) का इंश्योरेंस फ्रॉड किया गया।

एवरेस्ट की चोटी पर चोरी: गाइड्स ने पर्यटकों को बनाया लूज़ मोशन का शि‍कार, अस्पताल और हेलीकॉप्टर कंपनियों ने करोड़ों वसूले, ऐसे हुआ घोटाले का पर्दाफाश

पर्यटकों को जानबूझकर किया जाता था बीमार

रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ गाइड पर्यटकों के खाने में कथित तौर पर बेकिंग सोडा मिला देते थे, जिससे उनकी तबीयत खराब हो जाती थी। इसके बाद इसे “एल्टीट्यूड सिकनेस” या “फूड पॉइजनिंग” बताकर पर्यटकों को महंगी हेलीकॉप्टर रेस्क्यू सेवा लेने के लिए मजबूर किया जाता था।

कैसे चलता था पूरा खेल

जांच में सामने आया कि गाइड और ट्रेकिंग एजेंसियां मिलकर पर्यटकों को बीमार दिखाती थीं, हेलीकॉप्टर रेस्क्यू का फर्जी या बढ़ा-चढ़ाकर बिल बनाया जाता था, अस्पतालों में नकली इलाज और फर्जी एडमिशन रिकॉर्ड तैयार किए जाते थे, इसके बाद अंतरराष्ट्रीय इंश्योरेंस कंपनियों से मोटी रकम वसूली जाती थी

इस पूरी रकम को गाइड, ट्रेकिंग कंपनियां, हेलीकॉप्टर ऑपरेटर और अस्पताल आपस में बांट लेते थे।

कमीशन का पूरा नेटवर्क

रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि अस्पताल इंश्योरेंस राशि का 20–25% ट्रेकिंग कंपनियों को देते थे
20–25% हिस्सा हेलीकॉप्टर ऑपरेटरों को जाता था, गाइड और एजेंसियां भी फर्जी बिलों से भारी मुनाफा कमाती थीं

32 लोगों पर केस, 6 गिरफ्तार

इस मामले में नेपाल पुलिस ने 32 लोगों पर संगठित अपराध और धोखाधड़ी का आरोप लगाया है।
जनवरी में रेस्क्यू से जुड़ी 3 बड़ी कंपनियों के 6 अधिकारियों की गिरफ्तारी के बाद इस पूरे घोटाले का खुलासा हुआ।

जांच में सामने आया कि  एक कंपनी ने 1,248 में से 171 रेस्क्यू क्लेम फर्जी दिखाए, दूसरी कंपनी ने 471 में से 75 क्लेम फर्जी किए, तीसरी कंपनी ने भी दर्जनों फर्जी दावे कर करोड़ों रुपये वसूले

इंश्योरेंस कंपनियों को बड़ा झटका

इस घोटाले की वजह से कई अंतरराष्ट्रीय इंश्योरेंस कंपनियों ने नेपाल में ट्रेकिंग करने वाले पर्यटकों को कवर देना बंद कर दिया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि पहाड़ी इलाकों में घटनाओं की सच्चाई जांचना मुश्किल होता है, जिसका फायदा उठाकर यह रैकेट लंबे समय से चल रहा था।

पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले

नेपाल का पर्यटन उद्योग, जो लाखों लोगों को रोजगार देता है, पहले भी ऐसे विवादों से घिर चुका है। हालांकि सरकार ने 2018 में सख्त नियम लागू किए थे, लेकिन कमजोर निगरानी के कारण यह घोटाला जारी रहा।

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