Sunday, April 19, 2026
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प्लास्टिक में मौजूद फ्थेलेट्स से बढ़ रहा हार्ट अटैक का खतरा, भारत में सबसे अधिक मौतें दर्ज

प्लास्टिक में मौजूद फ्थेलेट्स से बढ़ रहा हार्ट अटैक का खतरा, भारत में सबसे अधिक मौतें दर्ज। आजकल प्लास्टिक का इस्तेमाल हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गया है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसके अंदर छुपा एक केमिकल हमारी सेहत के लिए जानलेवा हो सकता है?हाल ही में आई एक रिपोर्ट में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि प्लास्टिक में इस्तेमाल होने वाला एक खास रसायन ‘फ्थेलेट्स’ (Phthalates) दुनियाभर में दिल की बीमारियों से होने वाली 13% मौतों के लिए जिम्मेदार है।

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फ्थेलेट्स एक तरह का केमिकल है जिसे प्लास्टिक को मुलायम और लचीला बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. यह आमतौर पर खाने के डिब्बों, बोतलों, बच्चों के खिलौनों और घर के कई अन्य प्लास्टिक सामानों में पाया जाता है. यह केमिकल धीरे-धीरे टूटकर सूक्ष्म कणों में बदल जाता है और हवा, पानी और भोजन के माध्यम से हमारे शरीर में चला जाता है.

‘eBioMedicine’ नाम की मेडिकल जर्नल में प्रकाशित किया गया

यह अध्ययन न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों द्वारा किया गया और इसे ‘eBioMedicine’ नाम की मेडिकल जर्नल में प्रकाशित किया गया है. रिसर्च के अनुसार, साल 2018 में दुनियाभर में 3.56 लाख लोगों की मौतें दिल की बीमारी के कारण हुईं, जो फ्थेलेट्स के कारण थीं. इनमें से सबसे ज्यादा मौतें भारत में हुईं. करीब 1 लाख 3 हजार से ज्यादा, उसके बाद चीन और इंडोनेशिया का नंबर आता है. सबसे अधिक खतरा 55 से 64 वर्ष की उम्र के लोगों में पाया गया.

दक्षिण एशिया, मिडिल ईस्ट, पूर्वी एशिया और प्रशांत क्षेत्र इस खतरे से सबसे ज्यादा प्रभावित

भारत में प्लास्टिक का उत्पादन और उपयोग दोनों तेजी से बढ़ रहा है. यहां प्लास्टिक कचरा भी बड़ी मात्रा में पैदा हो रहा है, जिससे लोगों के फ्थेलेट्स के संपर्क में आने की संभावना बहुत ज्यादा है. शोधकर्ताओं का कहना है कि दक्षिण एशिया, मिडिल ईस्ट, पूर्वी एशिया और प्रशांत क्षेत्र इस खतरे से सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं.

 यह मोटापा, कैंसर, हार्मोनल असंतुलन और बांझपन जैसी समस्याएं भी बढ़ा सकता

फ्थेलेट्स केवल दिल की बीमारियों का कारण नहीं बनता, बल्कि यह मोटापा, कैंसर, हार्मोनल असंतुलन और बांझपन जैसी समस्याएं भी बढ़ा सकता है. खासकर, ‘डीईएचपी’ (DEHP) नाम का फ्थेलेट हृदय की धमनियों में सूजन बढ़ा सकता है, जिससे हार्ट अटैक या स्ट्रोक का खतरा कई गुना बढ़ जाता है.

 ग्लोबल प्लास्टिक ट्रीटी के लिए अहम सबूत बन सकती

रिसर्चर्स का कहना है कि यह रिपोर्ट संयुक्त राष्ट्र द्वारा तैयार किए जा रहे ग्लोबल प्लास्टिक ट्रीटी के लिए अहम सबूत बन सकती है. इस संधि का उद्देश्य प्लास्टिक प्रदूषण को रोकना और इसके मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करना है.

प्लास्टिक में मौजूद फ्थेलेट्स से बढ़ रहा हार्ट अटैक का खतरा, भारत में सबसे अधिक मौतें दर्ज

Ashutosh shukla

30 वर्षों से निरन्तर सकारात्मक पत्रकारिता, संपादक यशभारत डॉट काम