‘मकान मालिक तय करेगा उसे कहाँ रहना है, किराएदार नहीं’: MP हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, इंदौर के मामले में याचिका खारिज

‘मकान मालिक तय करेगा उसे कहाँ रहना है, किराएदार नहीं’: MP हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, इंदौर के मामले में याचिका खारिज
इंदौर / जबलपुर: मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय (High Court) ने मकान मालिक और किराएदार से जुड़े विवाद में एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अपनी या अपने परिवार की वास्तविक आवश्यकता के लिए मकान खाली कराने पहुंचे मकान मालिक की पसंद या जरूरत पर सवाल उठाना गलत है।
हाईकोर्ट ने कहा कि कौन सी जगह या शहर परिवार के लिए उपयुक्त है, यह तय करने का पूरा अधिकार केवल मकान मालिक और उसके परिवार को है, न कि किराएदार को।
क्या था मामला? (खजराना क्षेत्र का विवाद)
यह पूरा मामला इंदौर के खजराना क्षेत्र स्थित एक कॉलोनी का है:
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किरायेदारी की शुरुआत: मकान मालिक ने वर्ष 2003 में अपना मकान महज ₹1,100 प्रति माह के किराए पर दिया था।
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मकान खाली कराने का आधार: मकान मालिक ने कोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि उन्हें अपने बच्चे की बेहतर पढ़ाई और परिवार के सदस्यों के इलाज के लिए इस मकान की वास्तविक आवश्यकता (Bona fide requirement) है, इसलिए इसे खाली कराया जाए।
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किराएदार की आपत्ति: किराएदार ने मकान मालिक की इस जरूरत की सत्यता पर सवाल उठाते हुए और शहर/जगह के चुनाव को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में अपील दायर कर दी थी।
हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी और फैसला
मामले की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने किराएदार की याचिका को सिरे से निरस्त (Dismiss) कर दिया। कोर्ट ने अपने आदेश में प्रमुख बातें कहीं:
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वास्तविक आवश्यकता सिद्ध होना ही काफी: जब मकान मालिक यह सिद्ध कर देता है कि बच्चे की शिक्षा या परिजन के इलाज के लिए उसे मकान की आवश्यकता है, तो उसकी नीयत पर संदेह नहीं किया जा सकता।
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स्थान चयन का अधिकार: मकान मालिक को यह साबित करने की बिल्कुल जरूरत नहीं है कि उसने किसी खास शहर या इलाके को ही अपने रहने के लिए क्यों चुना।
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किराएदार तय नहीं कर सकता: कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि आवश्यकतानुसार कौन सी जगह उपयुक्त है, इसका फैसला केवल मकान मालिक करेगा।
हाईकोर्ट के इस फैसले से सालों से अपने ही घर को खाली कराने के लिए भटक रहे मकान मालिकों को बड़ी कानूनी राहत मिलेगी। ‘मकान मालिक तय करेगा उसे कहाँ रहना है, किराएदार नहीं’: MP हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, इंदौर के मामले में याचिका खारिज








