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टोल प्लाजा का झंझट खत्म: 2026 के अंत तक लागू होगा सैटेलाइट टोलिंग सिस्टम; 60% तक सस्ती हो सकती हैं दरें, जानें कैसे काम करेगी नई तकनीक

टोल प्लाजा का झंझट खत्म: 2026 के अंत तक लागू होगा सैटेलाइट टोलिंग सिस्टम; 60% तक सस्ती हो सकती हैं दरें, जानें कैसे काम करेगी नई तकनीक

टोल प्लाजा का झंझट खत्म: 2026 के अंत तक लागू होगा सैटेलाइट टोलिंग सिस्टम; 60% तक सस्ती हो सकती हैं दरें, जानें कैसे काम करेगी नई तकनीक

नई दिल्ली। देशभर के राष्ट्रीय राजमार्गों पर सफर करने वाले वाहन चालकों के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर है। आने वाले समय में हाईवे पर आपको टोल चुकाने के लिए न तो किसी कतार में खड़ा होना पड़ेगा और न ही गाड़ी रोकनी होगी। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने राज्यसभा में घोषणा की है कि साल 2026 के अंत तक देश में मल्टी लेन फ्री फ्लो (MLFF) और सैटेलाइट आधारित टोलिंग सिस्टम को पूरी तरह लागू कर दिया जाएगा।

इस नई तकनीक के आने के बाद टोल प्लाजा पर वाहनों का वेटिंग टाइम (इंतजार का समय) शून्य हो जाएगा। यही नहीं, इस डिजिटल और पारदर्शी व्यवस्था से भविष्य में टोल दरों में 60 प्रतिशत तक की भारी कमी आने की संभावना भी जताई गई है।

क्या है सैटेलाइट टोल सिस्टम (GNSS) और यह कैसे काम करेगा?

वर्तमान फास्टैग (FASTag) व्यवस्था से एक कदम आगे बढ़कर यह तकनीक पूरी तरह से ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (GNSS) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर काम करेगी:

  1. लगेगी खास ट्रैकिंग डिवाइस: वाहनों में एक विशेष ट्रैकिंग डिवाइस लगाया जाएगा, जिसे ओबीयू (On-Board Unit) कहा जाता है। यह डिवाइस सैटेलाइट की मदद से वाहन की लाइव लोकेशन और उसके रूट को ट्रैक करेगा।

  2. ‘पे-पर-यूज़’ (Pay-Per-Use) मॉडल: वर्तमान में यदि आप हाईवे के एक छोटे हिस्से का भी उपयोग करते हैं, तो आपको पूरे टोल सेक्शन का शुल्क देना पड़ता है। लेकिन नए सिस्टम में आप हाईवे पर जितने किलोमीटर गाड़ी चलाएंगे, केवल उतने ही हिस्से का टोल कटेगा।

  3. ऑटोमैटिक पेमेंट: जैसे ही गाड़ी हाईवे के टोल दायरे से बाहर निकलेगी, तय की गई दूरी के आधार पर पैसे सीधे आपके बैंक अकाउंट या लिंक वॉलेट से कट जाएंगे और आपके मोबाइल पर मैसेज आ जाएगा। इस प्रक्रिया में कहीं भी कोई बैरियर या बूथ नहीं होगा।

जिन गाड़ियों में डिवाइस नहीं होगा, उनका क्या होगा?

यदि किसी पुराने वाहन या अन्य गाड़ी में ओबीयू (OBU) डिवाइस नहीं लगा है, तो भी वह टोल चोरी नहीं कर सकेगा:

  • इसके लिए हाईवे पर एएनपीआर (ANPR – Automatic Number Plate Recognition) यानी ऑटोमैटिक नंबर प्लेट पहचान तकनीक वाले हाई-रिजोल्यूशन कैमरे लगाए जा रहे हैं।

  • ये कैमरे तेज रफ्तार गाड़ी की नंबर प्लेट को भी स्कैन कर लेंगे और वाहन मालिक के खाते से टोल वसूल लिया जाएगा। नियम तोड़ने या खाते में पैसे न होने पर सीधे ऑनलाइन चालान जेनरेट होगा।

टोल दरें 60% तक कम होने का दावा क्यों?

नितिन गडकरी के मुताबिक, इस पूरी व्यवस्था के ऑनलाइन और डेटा आधारित होने से टोल कलेक्शन में शत-प्रतिशत पारदर्शिता आएगी। हाईवे निर्माण की लागत, ब्याज और दैनिक वसूली का वास्तविक डेटा (Real-Time Data) वैज्ञानिक तरीके से कैलकुलेट होगा। लीकेज और टोल चोरी पूरी तरह बंद होने से राजस्व (Revenue) बढ़ेगा, जिसके दम पर आने वाले वर्षों में टोल दरों को 60% तक घटाया जा सकेगा।

दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर ट्रायल शुरू

इस बेहद आधुनिक प्रोजेक्ट के पहले चरण की टेस्टिंग दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर सफलतापूर्वक शुरू कर दी गई है। यहां सैटेलाइट, कैमरे, एआई और फास्टैग के आपसी तालमेल की सटीकता को जांचा जा रहा है। इस ट्रायल के सफल होने के बाद, चरणबद्ध तरीके से देश के अन्य सभी प्रमुख एक्सप्रेसवे और राष्ट्रीय राजमार्गों को इस तकनीक से जोड़ा जाएगा।

 समय, ईंधन और पर्यावरण तीनों को बड़ा फायदा

विशेषज्ञों के अनुसार, नई टोलिंग व्यवस्था के लागू होने से देश को तीन बड़े फायदे होंगे:

  • समय की बचत: टोल प्लाजा पर लगने वाले लंबे जाम से मुक्ति मिलेगी, जिससे यात्रा का समय काफी घट जाएगा।

  • फ्यूल और पैसे की बचत: बार-बार ब्रेक लगाने और इंजन चालू रखने की जरूरत खत्म होने से करोड़ों लीटर ईंधन बचेगा।

  • कम होगा प्रदूषण: टोल नाकों पर गाड़ियों के खड़े रहने से होने वाला कार्बन उत्सर्जन समाप्त होगा, जिससे पर्यावरण को सीधा लाभ पहुंचेगा।

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