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गरीबों के हक पर ‘सरकारी डाका’: मैहर में बिना जांच बांटे 111 फर्जी BPL कार्ड; एक ही नंबर पर चल रहे थे दो-दो परिवार, EOW की बड़ी कार्रवाई

मैहर BPL घोटाला: बिना तहसीलदार की अनुमति के जोड़े 111 अपात्रों के नाम, EOW ने 6 तत्कालीन अधिकारियों पर दर्ज किया मुकदमा

गरीबों के हक पर ‘सरकारी डाका’: मैहर में बिना जांच बांटे 111 फर्जी BPL कार्ड; एक ही नंबर पर चल रहे थे दो-दो परिवार, EOW की बड़ी कार्रवाई

रीवा/मैहर। मध्य प्रदेश के नवनिर्मित जिले मैहर (तत्कालीन सतना जिला) के जनपद पंचायत में एक बड़े प्रशासनिक भ्रष्टाचार का भंडाफोड़ हुआ है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) रीवा ने मैहर जनपद पंचायत में हुए फर्जी बीपीएल (BPL) प्रमाण पत्र घोटाले का पर्दाफाश किया है। जांच में पाया गया कि अधिकारियों ने मिलीभगत कर नियमों को ताक पर रखा और अपात्र (अमीर) लोगों को गरीबी रेखा के नीचे वाली सूची में शामिल कर दिया।गरीबों के हक पर ‘सरकारी डाका’: मैहर में बिना जांच बांटे 111 फर्जी BPL कार्ड; एक ही नंबर पर चल रहे थे दो-दो परिवार, EOW की बड़ी कार्रवाई

इस महाफर्जीवाड़े के जरिए साल 2018 से लेकर अब तक सरकारी योजनाओं और सस्ते राशन का अनुचित लाभ उठाकर सरकार को भारी आर्थिक चपत लगाई गई है। ईओडब्ल्यू ने इस मामले में 6 तत्कालीन अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया है।

 एक ही BPL नंबर पर चल रहे थे दो-दो परिवार

इस पूरे घोटाले की शुरुआत आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) मुख्यालय भोपाल को मिली एक गोपनीय शिकायत से हुई थी। शिकायत में बताया गया था कि जनपद पंचायत मैहर में बिना किसी कानूनी प्रक्रिया का पालन किए धड़ल्ले से अपात्रों के नाम बीपीएल सूची में दर्ज किए जा रहे हैं। हद तो तब हो गई जब जांच में सामने आया कि एक ही बीपीएल क्रमांक (नंबर) पर दो-दो अलग-अलग हितग्राहियों के नाम जोड़कर कागजी हेराफेरी की गई।

जांच में हुए 3 सबसे चौंकाने वाले खुलासे

EOW रीवा की प्राथमिक जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे सरकारी सिस्टम की लापरवाही और भ्रष्टाचार को उजागर करते हैं:

  • पटवारी-तहसीलदार की रिपोर्ट गायब: नियम के मुताबिक बीपीएल सूची में नाम जोड़ने के लिए पटवारी की सर्वे रिपोर्ट और तहसीलदार का भौतिक सत्यापन (Verification) अनिवार्य होता है। लेकिन मैहर में तहसीलदार की बिना किसी लिखित अनुशंसा या आदेश के सीधे कंप्यूटर सिस्टम में नाम फीड कर दिए गए।

  • 111 फर्जी प्रमाण पत्र: अब तक की शुरुआती जांच में ही 111 ऐसे अपात्र हितग्राहियों की पहचान हो चुकी है, जिन्हें पूरी तरह फर्जी तरीके से बीपीएल कार्ड जारी किए गए।

  • 2018 से चल रहा था खेल: यह घोटाला साल 2018 से लगातार जारी था। फर्जी कार्डधारकों ने पिछले 8 सालों में मुफ्त राशन, आवास योजना और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर राजकोष को भारी आर्थिक क्षति पहुंचाई है।

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पंचायत विभाग के नियमों की उड़ी धज्जियां

EOW के अनुसार, इस पूरे खेल में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के स्पष्ट दिशा-निर्देशों और आदेशों का सरेआम उल्लंघन किया गया है। अधिकारियों ने अपने कूट रचित (फर्जी) अधिकारों का इस्तेमाल कर अपात्रों को सरकारी खजाने को लूटने की छूट दी।

फिलहाल, नामजद 6 तत्कालीन अधिकारियों के खिलाफ विभिन्न आपराधिक धाराओं में एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली गई है। ईओडब्ल्यू का मानना है कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, फर्जी बीपीएल कार्डों की संख्या सैकड़ों पार जा सकती है और कुछ अन्य विभागीय कर्मचारियों के साथ-साथ फर्जी लाभ लेने वाले बिचौलियों पर भी गाज गिरना तय है।

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