गोविंदपुरा: राजधानी भोपाल के गोविंदपुरा इलाके में साइबर ठगी का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। साइबर जालसाजों ने खुद को वरिष्ठ पुलिस अधिकारी बताकर एक महिला को ‘डिजिटल अरेस्ट’ किया और आतंकियों से सांठगांठ का डर दिखाकर उससे 35 लाख रुपये ऐंठ लिए। गोविंदपुरा पुलिस ने साइबर क्राइम की जांच रिपोर्ट के आधार पर मामला दर्ज कर ठगों की तलाश शुरू कर दी है।
वीडियो कॉल पर बनाया नकली पुलिस मुख्यालय का माहौल
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, साकेत नगर निवासी उमा समद्दार एलआईसी (LIC) और पोस्ट ऑफिस एजेंट हैं। जालसाजों ने उनके मोबाइल पर एक वीडियो कॉल किया। कॉल रिसीव करते ही स्क्रीन पर पुलिस वर्दी में बैकग्राउंड में पुलिस मुख्यालय जैसा माहौल नजर आ रहा था।
ठगों ने महिला को डराते हुए कहा कि उनके नाम से एचडीएफसी (HDFC) बैंक में एक संदिग्ध खाता खुला है, जिसमें आतंकवादियों द्वारा सात करोड़ रुपये जमा कराए गए हैं।
45 दिन के डिजिटल अरेस्ट और बच्चों की गिरफ्तारी की दी धमकी
महिला को पूरी तरह मानसिक दबाव में लेने के लिए ठगों ने धमकी दी कि इस मामले में उन्हें 45 दिनों के लिए डिजिटल अरेस्ट किया जा रहा है और वे घर से बाहर नहीं निकल सकतीं। जब महिला ने इसका विरोध किया, तो आरोपितों ने उनके बच्चों को भी गिरफ्तार करने और गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दे डाली।
एफडी तुड़वाकर ट्रांसफर करवाए 35 लाख रुपये
बच्चों और जेल जाने के डर से घबराई महिला ने अपनी जिंदगी भर की जमा पूंजी और एफडी (FD) तुड़वाकर ठगों के बताए बैंक खातों में 35 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद भी जब जालसाज लगातार और पैसों की मांग करने लगे, तब महिला को खुद के साथ हुई ठगी का अहसास हुआ और उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
जांच के बाद गोविंदपुरा पुलिस ने अज्ञात साइबर ठगों के खिलाफ धोखाधड़ी और आईटी एक्ट के तहत केस दर्ज कर लिया है और खातों की डिटेल के आधार पर जांच जारी है।
सावधानी ही बचाव है:
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डिजिटल अरेस्ट जैसा कोई कानून नहीं: पुलिस, सीबीआई, या ईडी जैसी कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर कभी किसी को ‘डिजिटल अरेस्ट’ नहीं करती।
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पैसे ट्रांसफर न करें: कोई भी असली पुलिस अधिकारी फोन पर बैंक खातों की जानकारी या पैसा ट्रांसफर करने की मांग नहीं करता।
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तुरंत रिपोर्ट करें: ऐसा कोई भी कॉल आने पर घबराएं नहीं, तुरंत कॉल काटें और राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।