Teejan Bai Critical: पूरे देश में दुआओं का दौर; पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई की हालत बेहद गंभीर, AIIMS रायपुर के MICU में चल रहा है इलाज
रायपुर: छत्तीसगढ़ की लोक कला ‘पंडवानी’ को वैश्विक पटल पर स्थापित करने वाली प्रख्यात लोक गायिका डॉ. तीजन बाई (69 वर्ष) की तबीयत अचानक बेहद नासाज हो गई है। उन्हें राजधानी रायपुर के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS Raipur) के मेडिकल इंटेंसिव केयर यूनिट (MICU) में भर्ती कराया गया है, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में उनका गहन इलाज जारी है।
अस्पताल सूत्रों के मुताबिक, बुधवार देर रात अचानक सांस लेने में तकलीफ और तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें बेहद गंभीर हालत में एम्स लाया गया था, जहां प्राथमिक जांच के तुरंत बाद उन्हें वेंटिलेटर/आईसीयू सपोर्ट पर शिफ्ट किया गया।
मेडिकल बुलेटिन: कई गंभीर संक्रमणों से जूझ रही हैं तीजन बाई
एम्स रायपुर द्वारा जारी आंतरिक चिकित्सा अपडेट के अनुसार, तीजन बाई की स्थिति इस समय काफी नाजुक बनी हुई है:
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मल्टीपल ऑर्गन इंफेक्शन: 69 वर्षीय तीजन बाई इस वक्त फेफड़ों के गंभीर संक्रमण (Severe Lung Infection), ब्लडस्ट्रीम इंफेक्शन (सेप्सिस) और किडनी की गंभीर चोट (Acute Kidney Injury) से जूझ रही हैं।
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लो ब्लड प्रेशर की समस्या: डॉक्टरों के मुताबिक, उनका ब्लड प्रेशर लगातार सामान्य से काफी कम बना हुआ है, जिसे दवाओं के सहारे नियंत्रित करने का प्रयास किया जा रहा है। शरीर में फैल रहा इंफेक्शन डॉक्टरों के लिए इस समय सबसे बड़ी चुनौती है।
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विशेषज्ञों की टीम तैनात: उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए पल्मोनोलॉजिस्ट (फेफड़ों के विशेषज्ञ), क्रिटिकल केयर एक्सपर्ट्स और हेमेटोलॉजिस्ट (रक्त विशेषज्ञ) सहित सीनियर डॉक्टरों की एक मल्टीडिसिप्लिनरी टीम चौबीसों घंटे उनकी सेहत की कड़ा पहरा दे रही है।
गनियारी गांव से ग्लोबल स्टेज तक का सफर
1956 में छत्तीसगढ़ के भिलाई के पास गनियारी गांव में जन्मीं तीजन बाई का जीवन संघर्ष और कला की अद्भुत मिसाल है:
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पंडवानी को दी नई पहचान: एक बेहद साधारण और गरीब परिवार में जन्मी तीजन बाई ने उस दौर में छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोक कला ‘पंडवानी’ को अपनाया, जब महिलाओं का मंच पर आना आसान नहीं था।
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महाभारत की जीवंत कथा: हाथ में तंबूरा लेकर, रौद्र रूप और कड़क आवाज में महाभारत की कहानियों को सुनाने की उनकी अनूठी ‘कापालिक शैली’ ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने देश ही नहीं, बल्कि पेरिस, लंदन और न्यूयॉर्क जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय मंचों पर छत्तीसगढ़िया संस्कृति का डंका बजाया।
देश के तीनों सर्वोच्च नागरिक सम्मानों से हैं सम्मानित
भारतीय लोक संस्कृति में उनके बेजोड़ और ऐतिहासिक योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें देश के शीर्ष नागरिक सम्मानों से नवाजा है:
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1988: पद्म श्री (Padma Shri)
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1995: संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार
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2003: पद्म भूषण (Padma Bhushan)
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2019: पद्म विभूषण (Padma Vibhushan) – देश का दूसरा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान।
पूरे देश और छत्तीसगढ़ में दौड़ गई चिंता की लहर
जैसे ही तीजन बाई के वेंटिलेटर पर होने की खबर आई, पूरे छत्तीसगढ़ सहित देश के सांस्कृतिक और राजनीतिक हलकों में मायूसी छा गई। मुख्यमंत्री सहित राज्य के कई बड़े नेताओं, कलाकारों और देश भर में फैले उनके करोड़ों प्रशंसकों ने उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की है।
राज्य सरकार लगातार एम्स प्रबंधन के संपर्क में है और छत्तीसगढ़ की इस महान बेटी को हर मुमकिन और बेहतरीन चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। पूरा देश इस समय उस बुलंद आवाज के दोबारा ठीक होकर लौटने की दुआ कर रहा है, जिसने ‘पंडवानी’ के जरिए छत्तीसगढ़ का नाम अमर कर दिया।








