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ममता राज की ‘चूक’ पर शुभेंदु का प्रहार: ‘एफआईआर में देरी और पीड़िता की मां को पैसे देने की कोशिश’ की होगी उच्चस्तरीय जांच

02 05 2021 mamata suvendu

ममता राज की ‘चूक’ पर शुभेंदु का प्रहार: ‘एफआईआर में देरी और पीड़िता की मां को पैसे देने की कोशिश’ की होगी उच्चस्तरीय जांच। पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा फेरबदल करते हुए आरजी कर मेडिकल कॉलेज दुष्कर्म-हत्या मामले में तीन वरिष्ठ आईपीएस (IPS) अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। शुक्रवार को ‘नवान्न’ (राज्य सचिवालय) में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री ने साफ किया कि मामले की फाइल दोबारा खोली जाएगी और तत्कालीन सरकार व पुलिस की भूमिका की गहन समीक्षा होगी।

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ममता राज की ‘चूक’ पर शुभेंदु का प्रहार: ‘एफआईआर में देरी और पीड़िता की मां को पैसे देने की कोशिश’ की होगी उच्चस्तरीय जांच

निलंबित किए गए अधिकारी

मुख्यमंत्री के आदेश पर निम्नलिखित अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड किया गया है:

  1. विनीत गोयल: तत्कालीन कोलकाता पुलिस आयुक्त (वर्तमान में डीजी, आईबी)।

  2. अभिषेक गुप्ता: तत्कालीन डीसी नॉर्थ (वर्तमान में कमांडेंट, ईएफआर)।

  3. इंदिरा मुखोपाध्याय: तत्कालीन डीसी सेंट्रल (वर्तमान में विशेष अधीक्षक, सीआईडी)।

ममता बनर्जी की भूमिका भी जांच के दायरे में

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने एक बड़ा संकेत देते हुए कहा कि आरजी कर कांड के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की क्या भूमिका थी और उनके स्तर से क्या निर्देश दिए गए थे, इसकी भी समीक्षा की जाएगी।

“बॉडी लैंग्वेज ठीक नहीं थी”

शुभेंदु अधिकारी ने एक महिला डीसी (इंदिरा मुखोपाध्याय) का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय उनकी प्रेस कॉन्फ्रेंस की बॉडी लैंग्वेज और बयान राज्य के लिए सुखद नहीं थे। वह पुलिस की अधिकृत प्रवक्ता नहीं थीं, फिर भी उन्हें बयानबाजी की अनुमति किसने दी, इसकी जांच होगी।

अपराध और सजा का घटनाक्रम

प्रमुख बिंदु: क्यों हुई कार्रवाई?

कारण विवरण
गंभीर लापरवाही एफआईआर दर्ज करने और शुरुआती साक्ष्य जुटाने में देरी।
प्रक्रियागत चूक मामले को दबाने और प्रदर्शनकारियों पर गलत तरीके से बल प्रयोग।
हस्तक्षेप जांच को प्रभावित करने और पीड़िता के परिवार पर कथित दबाव।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि CBI की आपराधिक जांच अपनी जगह चलती रहेगी, लेकिन राज्य पुलिस की भूमिका और प्रशासनिक विफलताओं के लिए यह विभागीय जांच ‘न्याय’ सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है।

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