Sharad Purnima; 16 कलाओं से युक्त चंद्रमा, शरद पूर्णिमा का समय, शुभ मुहूर्त और खीर खाने के लाभ

28 10 2020 sharad purnima 2020 timings

Sharad Purnima 2020 Timings : आरोग्‍य का पर्व शरद पूर्णिमा आने को है। शरद पूर्णिमा का अमृतमयी चांद अपनी किरणों में स्‍वास्‍थ्‍य का वरदान लेकर आता है।

शरद पूर्णिमा हिंदू पंचांग में सबसे धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण पूर्णिमा की रातों में से एक है। इस वर्ष यह 30 अक्टूबर को है। यह पर्व शरद ऋतु (ऋतु) में आता है और यह आश्विन (सितंबर / अक्टूबर) के महीने में पूर्णिमा (पूर्णिमा की रात) तिथि को मनाया जाता है। इस उत्सव को कौमुदी, यानी मूनलाइट या कोजागरी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है।

शरद पूर्णिमा को भारत के कई राज्यों में फसल उत्सव के रूप में भी मनाया जाता है और मानसून के बाद सर्दियों के मौसम की शुरुआत भी होती है। इस समय सबसे विशेष महत्‍व खीर खाने का माना जाता है। चंद्रमा की रोशनी में खीर को रखा जाता है और किरणों को उसके प्रभाव में पूरी तरह आने के बाद इस खीर को रोगियों को दिया जाता है। ऐसी मान्‍यता है कि खीर के सेवन से रोगों का इलाज हो जाता है। यहां हम आपको बताने जा रहे हैं शरद पूर्णिमा कब है, किस समय से किस समय तक रहेगी, इसकी पूजा की विधि क्‍या है, मंत्र क्‍या है, शुभ मूहूर्त क्‍या है और पूर्णिमा पर खीर का क्‍या महत्‍व है।

क्‍या है शरद पूर्णिमा

अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहा जाता है। यूं तो साल में 12 पूर्णिमा तिथियां आती हैं। लेकिन अश्विन मास की पूर्णिमा तिथि को बहुत खास माना जाता है। इसे शरद पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है।

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शरद पूर्णिमा से ही शरद ऋतु का आगमन होता है। शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा की रोशनी से रात्रि में भी चारों और उजियारा रहता है। सनातन धर्म की परंपरा में आश्विन मास की पूर्णिमा तिथि को शरद पूर्णिमा का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाने की धार्मिक और पौराणिक परंपरा रही है।

शरद पूर्णिमा के पर्व को कौमुदी उत्‍सव, कुमार उत्सव, शरदोत्सव, रास पूर्णिमा, कोजागिरी पूर्णिमा एवं कमला पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। इस पूर्णिमा में अनोखी चमत्कारी शक्ति निहित मानी जाती है। ज्योतिष गणना के अनुसार संपूर्ण वर्ष में आश्विन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा के दिन ही चंद्रमा 16 कलाओं से युक्त होता है।

16 कलाओं से युक्त चंद्रमा से निकली रोशनी समस्त रूपों वाली बताई गई है। इस दिन चंद्रमा पृथ्वी के सर्वाधिक निकट होता है जबकि रात्रि को दिखाई देने वाला चंद्रमा अपेक्षाकृत अधिक बड़ा होता है। ऐसी मान्यता है कि भू लोक पर लक्ष्मी जी घर घर विचरण करती हैं, जो जागता रहता है उस पर उनकी विशेष कृपा होती है।