रिश्वतखोरी में ‘राजस्व’ अव्वल, तो ‘शिक्षा विभाग’ भी पीछे नहीं; ACB का बड़ा खुलासा-5 वर्षों में 154 ट्रैप, 193 सरकारी सेवक गिरफ्तार, 51.67 लाख से अधिक घूस ज़ब्त

रिश्वतखोरी में 'राजस्व' अव्वल, तो 'शिक्षा विभाग' भी पीछे नहीं; ACB का बड़ा खुलासा-5 वर्षों में 154 ट्रैप, 193 सरकारी सेवक गिरफ्तार, 51.67 लाख से अधिक घूस ज़ब्त

रिश्वतखोरी में ‘राजस्व’ अव्वल, तो ‘शिक्षा विभाग’ भी पीछे नहीं; ACB का बड़ा खुलासा-5 वर्षों में 154 ट्रैप, 193 सरकारी सेवक गिरफ्तार, 51.67 लाख से अधिक घूस ज़ब्त

रिश्वतखोरी में 'राजस्व' अव्वल, तो 'शिक्षा विभाग' भी पीछे नहीं; ACB का बड़ा खुलासा-5 वर्षों में 154 ट्रैप, 193 सरकारी सेवक गिरफ्तार, 51.67 लाख से अधिक घूस ज़ब्त

रिश्वतखोरी में ‘राजस्व’ अव्वल, तो ‘शिक्षा विभाग’ भी पीछे नहीं; ACB का बड़ा खुलासा-5 वर्षों में 154 ट्रैप, 193 सरकारी सेवक गिरफ्तार, 51.67 लाख से अधिक घूस ज़ब्त

भोपाल, yashbharat.com। प्रदेश में सरकारी कामकाज और फाइलों को आगे बढ़ाने के बदले घूस मांगने वाले भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों पर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की कार्रवाई जारी है। ACB द्वारा जारी किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2021 से 28 मई 2026 के बीच प्रदेश में रिश्वतखोरी के कुल 154 ट्रैप प्रकरण दर्ज किए गए हैं।

इन सभी कार्रवाइयों में 193 शासकीय सेवकों व लोकसेवकों को रंगे हाथों पकड़ा गया है, जिनसे कुल ₹51,67,540 (51 लाख 67 हजार 540 रुपये) की रिश्वत राशि बरामद की गई। आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि के दौरान 6 मामलों में आरोपियों को अदालत से सजा भी सुनाई जा चुकी है।

विभागवार आंकड़े: जानिए कौन सा विभाग कितना भ्रष्ट?

ACB की रिपोर्ट के मुताबिक, घूसखोरी के मामलों में राजस्व विभाग सबसे आगे रहा है:

  • राजस्व विभाग (No. 1): सबसे अधिक 56 ट्रैप प्रकरण दर्ज किए गए, जिनमें पटवारी, तहसीलदार व राजस्व कर्मचारियों समेत 67 अधिकारी-कर्मचारी पकड़े गए।

  • स्कूल शिक्षा विभाग: 20 प्रकरण दर्ज, 25 अधिकारी-कर्मचारी रंगे हाथों गिरफ्तार।

  • पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग: 14 प्रकरणों में 15 लोकसेवक रिश्वत लेते दबोचे गए।

  • गृह (पुलिस) विभाग: 10 ट्रैप प्रकरणों में 13 पुलिस अधिकारी व कर्मचारी पकड़े गए।

  • नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग: 7 प्रकरण दर्ज हुए, जिनमें 10 लोकसेवकों पर शिकंजा कसा।

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आम जनता की जेब पर डाका और ACB की सख्ती

सरकारी विभागों में आम नागरिकों के नामांतरण, फौती, सीमांकन, पेंशन, पुलिस सत्यापन और निर्माण कार्यों की स्वीकृति जैसी बुनियादी सेवाओं के लिए रिश्वत मांगे जाने की शिकायतें सबसे ज्यादा आती हैं। ACB अधिकारियों का कहना है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत शिकायत मिलने पर तत्काल ट्रैप की कार्रवाई की जाती है।