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Reliance Industries Job Cut: कॉर्पोरेट जगत में AI का ‘शॉक’-रिलायंस ने नई नियुक्तियों में की 90,000 की भारी कटौती; जियो में भी घटे 21% कर्मचारी, देखें RIL की सालाना रिपोर्ट

Reliance Industries Job Cut: कॉर्पोरेट जगत में AI का 'शॉक'-रिलायंस ने नई नियुक्तियों में की 90,000 की भारी कटौती; जियो में भी घटे 21% कर्मचारी, देखें RIL की सालाना रिपोर्ट

मुंबई/नई दिल्ली: भारतीय उद्योग जगत की सबसे मूल्यवान कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) द्वारा जारी वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) की ताजा सालाना रिपोर्ट (Annual Report) ने देश के जॉब मार्केट की एक नई और चिंताजनक हकीकत को सामने ला दिया है। आधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक, रिलायंस ग्रुप ने पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले अपनी नई हायरिंग (New Hiring) में करीब 90,000 कर्मचारियों की भारी कमी की है।

हायरिंग की रफ्तार में यह ब्रेक ऐसे समय में लगा है जब वैश्विक युद्ध, सप्लाई चेन संकट और सख्त होती अर्थव्यवस्था के बीच रिलायंस जैसे बड़े कॉर्पोरेट घराने नए लोगों को नौकरी पर रखने के बजाय अपने मौजूदा कर्मचारियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा साइंस और ऑटोमेशन में अपस्किल (Upskill) करने पर पूरा ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

डेटा में समझें: रिलायंस की नई भर्तियों का गणित

मुकेश अंबानी के ग्रुप द्वारा वेबसाइट पर सार्वजनिक की गई ताजा सालाना रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि कंपनी ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है:

  • कुल वर्कफोर्स: 31 मार्च, 2026 तक रिलायंस ग्रुप के कुल कर्मचारियों की संख्या 4.19 लाख से अधिक दर्ज की गई।
  • मंदी का दौर: इस वित्त वर्ष के दौरान कंपनी ने 1 लाख से ज्यादा नए कर्मचारियों को ऑनबोर्ड किया। हालांकि, यह संख्या सुनने में बड़ी लगती है, लेकिन पिछले सालों की तुलना में इसमें भारी गिरावट आई है।
  • पिछले वर्षों से तुलना: रिलायंस ने वित्त वर्ष 2024-25 (FY25) में 1.9 लाख से ज्यादा और वित्त वर्ष 2023-24 (FY24) में 1.71 लाख से ज्यादा नए लोगों को नौकरियां दी थीं। इस लिहाज से नई भर्तियों की रफ्तार करीब 90,000 तक सुस्त पड़ गई है।

Jio से लेकर ऑयल बिजनेस तक: कहाँ कितनी घटी वर्कफोर्स?

रिलायंस के अलग-अलग बिजनेस वर्टिकल्स में कर्मचारियों की संख्या में बड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिला है:

  • जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड (Jio): डिजिटल और टेलीकॉम सेगमेंट संभालने वाली इस विंग में कर्मचारियों की संख्या 94,523 से घटकर 74,822 रह गई है, जो 21 फीसदी की सीधी गिरावट है। (कंपनी के अनुसार, इसका एक कारण छोटे शहरों में कर्मचारियों को ‘फुल-टाइम एम्प्लॉई’ के बजाय ‘माइक्रो एंटरप्रेन्योर’ बनाना है, जो प्रति इंस्टॉलेशन के हिसाब से कमाते हैं)।
  • मीडिया और एंटरटेनमेंट: इस वर्टिकल में कर्मचारियों की संख्या 11,186 से घटकर 10,295 (8% की गिरावट) रह गई है।
  • ऑयल-टू-केमिकल्स (O2C): रिलायंस के इस पारंपरिक रिफाइनिंग बिजनेस में भी कर्मचारियों की संख्या 29,985 से कम होकर 28,051 (6% की कमी) पर आ गई है।
  • अपवाद – रिलायंस रिटेल (Reliance Retail): ग्रुप के रिटेल बिजनेस में उल्ट इसके कर्मचारियों की संख्या में 17 फीसदी की बंपर बढ़ोतरी देखी गई है। यह आंकड़ा 2,47,782 से बढ़कर 2,90,293 पर पहुंच गया है।

पिरामिड स्ट्रक्चर ध्वस्त: कैसे नौकरी खा रहा है AI?

रिक्रूटमेंट इंडस्ट्री के दिग्गजों और विशेषज्ञों (जैसे CIEL HR के एमडी आदित्य नारायण मिश्रा और एक्सफेनो के को-फाउंडर कमल करंथ) के मुताबिक, रिलायंस की यह रिपोर्ट देश के पूरे कॉर्पोरेट जगत के लिए एक बड़े ट्रेंड का संकेत है:

  • मैनेजर-कर्मचारी रेश्यो बदला: कंपनियों का पुराना पिरामिड ढांचा अब बदल रहा है। पहले जहां 6-8 कर्मचारियों पर एक मैनेजर होता था, अब एआई और ऑटोमेशन टूल्स की मदद से 10-12 कर्मचारियों पर एक मैनेजर काम संभाल रहा है।
  • मिडिल और जूनियर लेवल पर मार: कंपनियां अब नौकरी छोड़कर जाने वाले कर्मचारियों की जगह तुरंत नई भर्ती करने से बच रही हैं। कम लोगों से ज्यादा और स्मार्ट काम (Productivity) लेने पर फोकस है। एआई उन रोजमर्रा के कामों को संभाल रहा है, जिन्हें पहले पूरी टीमें संभालती थीं। इसके चलते टॉप लेवल से दो स्तर नीचे (N-2 Level) के पदों की भूमिकाएं तेजी से खत्म या बदली जा रही हैं।
  • नौकरी बदलने का डर: मार्केट में अनिश्चितता के कारण कर्मचारियों के खुद से नौकरी छोड़ने की दर (Attrition Rate) में भी भारी कमी आई है, जिससे नए वेकेंसी स्पेस नहीं बन रहे हैं।

खर्च में फिर भी बढ़ोतरी: हालांकि नई भर्तियां कम हुई हैं, लेकिन डिजिटल चैनलों, न्यू एनर्जी और टैलेंट पाइपलाइन को मजबूत रखने के लिए रिलायंस का कर्मचारियों के कुल फायदों पर होने वाला खर्च वित्त वर्ष 2025 के 28,559 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2026 में 30,318 करोड़ रुपये हो गया है।

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