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पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह मेरी फाइलें कचरे में फेंक देते हैं, रतलाम ग्रामीण से बीजेपी विधायक डामर का दर्द छलका; वीडियो वायरल

पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह मेरी फाइलें कचरे में फेंक देते हैं, रतलाम ग्रामीण से बीजेपी विधायक डामर का दर्द छलका; वीडियो वायरल

पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह मेरी फाइलें कचरे में फेंक देते हैं, रतलाम ग्रामीण से बीजेपी विधायक डामर का दर्द छलका; वीडियो वायरल

पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह मेरी फाइलें कचरे में फेंक देते हैं, रतलाम ग्रामीण से बीजेपी विधायक डामर का दर्द छलका; वीडियो वायरल

रतलाम/भोपाल: मध्य प्रदेश की सियासत में अपनी ही सरकार के मंत्रियों के खिलाफ विधायकों की नाराजगी एक बार फिर खुलकर सामने आ गई है। रतलाम ग्रामीण विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के वरिष्ठ विधायक मथुरालाल डामर का एक वीडियो इंटरनेट मीडिया पर तेजी से प्रसारित (वायरल) हो रहा है। इस वीडियो में विधायक डामर लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के कैबिनेट मंत्री राकेश सिंह की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए अपनी ही सरकार को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं।

 “छोटे विधायकों की नहीं होती सुनवाई, प्रस्तावों की हो रही अनदेखी”

वायरल वीडियो के अनुसार, विधायक मथुरालाल डामर ने लोक निर्माण विभाग (PWD) के मंत्री राकेश सिंह पर उनके क्षेत्र के सड़क निर्माण प्रस्तावों की लगातार अनदेखी करने का सीधा आरोप लगाया है। विधायक ने अत्यंत निराशा व्यक्त करते हुए कहा:

“मंत्री जी तो मुझे ठीक से पहचानते तक नहीं हैं। मेरे द्वारा अपने विधानसभा क्षेत्र की सड़कों के विकास के लिए भेजे गए प्रस्ताव और फाइलें कचरे के डिब्बे में फेंक दी जाती हैं।”

विधायक डामर ने आगे अपनी ही पार्टी की व्यवस्था पर तंज कसते हुए कहा कि शासन-प्रशासन में छोटे या सामान्य पृष्ठभूमि से आने वाले विधायकों के कार्य जल्दी नहीं होते और उनकी फाइलों पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता।

रतलाम विकास प्राधिकरण के कार्यक्रम का है वीडियो

जानकारी के अनुसार, विधायक का यह विस्फोटक बयान हाल ही में 2 मई 2026 को आयोजित ‘रतलाम विकास प्राधिकरण’ के संचालक मंडल के आधिकारिक शपथ ग्रहण समारोह के दौरान का है। मंच से बोलते हुए विधायक का दर्द छलक पड़ा, जिसका वहां मौजूद किसी शख्स ने वीडियो बना लिया और अब यह वीडियो राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

राजनीतिक मायने और असर

अपनी ही सरकार के कद्दावर मंत्री राकेश सिंह पर लगे इन आरोपों के बाद विपक्ष को भी सरकार को घेरने का मौका मिल गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बयान से न केवल लोक निर्माण विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हुए हैं, बल्कि सत्ताधारी दल के भीतर विधायकों और मंत्रियों के बीच समन्वय (तालमेल) की कमी भी उजागर हुई है। इस मामले में अभी तक संगठन या मंत्री राकेश सिंह की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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