बंगाल में स्कूल सिलेबस बदलने की तैयारी: बंगाली किताबों से हटेंगे ‘पानी’ और ‘अब्बा’ जैसे शब्द, मुगल-ब्रिटिश इतिहास भी होगा कम

बंगाल में स्कूल सिलेबस बदलने की तैयारी: बंगाली किताबों से हटेंगे 'पानी' और 'अब्बा' जैसे शब्द, मुगल-ब्रिटिश इतिहास भी होगा कम

बंगाल में स्कूल सिलेबस बदलने की तैयारी: बंगाली किताबों से हटेंगे ‘पानी’ और ‘अब्बा’ जैसे शब्द, मुगल-ब्रिटिश इतिहास भी होगा कम

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में सरकारी स्कूलों के पाठ्यक्रम और पाठ्यपुस्तकों में बड़े बदलाव की तैयारी चल रही है। राज्य सरकार द्वारा जुलाई 2026 में गठित ‘पाठ्यक्रम एवं सिलेबस समीक्षा समिति’ ने अपनी रिपोर्ट में भाषा, इतिहास और साहित्य के विषयों में अहम फेरबदल की सिफारिशें सौंपी हैं।

बंगाली किताबों में बदलेंगे बोलचाल के शब्द

समिति के प्रमुख और कल्याणी यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर देबाशीष चटर्जी के अनुसार, बंगाली भाषा की किताबों में उन शब्दों को प्राथमिकता दी जाएगी जो आम बंगाली बोलचाल में अधिक इस्तेमाल होते हैं।

  • हटाए जाने वाले शब्द: ‘पानी’, ‘अब्बा’ और ‘अम्मी’।
  • नए शामिल शब्द: ‘जोल’ (Jol), ‘बाबा’ और ‘मा’।
  • कारण: समिति का मानना है कि बच्चे अपनी दैनिक और रोजमर्रा की भाषा से जुड़े शब्दों को बेहतर ढंग से सीख पाते हैं।बंगाल में स्कूल सिलेबस बदलने की तैयारी: बंगाली किताबों से हटेंगे ‘पानी’ और ‘अब्बा’ जैसे शब्द, मुगल-ब्रिटिश इतिहास भी होगा कम

इतिहास और साहित्य में प्रमुख बदलाव

समिति ने इतिहास और साहित्य के पाठ्यक्रम में भी कई संशोधन प्रस्तावित किए हैं:

  • कम होंगे ये हिस्से: मुगल शासन, भारत में ब्रिटिश औपनिवेशिक इतिहास और मार्क्सवादी (कम्युनिस्ट) विचारधारा से जुड़े पाठों को कम किया जाएगा।
  • श्यामा प्रसाद मुखर्जी और महापुरुषों का पाठ: जनसंघ के संस्थापक और हिंदू राष्ट्रवादी नेता डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन एवं योगदान को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा।
  • प्राचीन इतिहास और पुरातात्विक साक्ष्य: उत्तर प्रदेश के सिनौली और हरियाणा के राखीगढ़ी में हुई खुदाई के खोज-तथ्यों को भी शामिल करने का प्रस्ताव है।
  • साहित्यिक रचनाएं: रवींद्रनाथ टैगोर की कविता ‘शिवाजी उत्सव’ और द्विजेंद्रलाल रॉय के नाटक ‘मेवाड़ पतन’ को शामिल किया जाएगा, जबकि नवाब सिराजुद्दौला पर आधारित नाटक और टैगोर की ‘अफ्रीका’ कविता को हटाने का सुझाव दिया गया है।
  • ममता सरकार की योजनाओं के अध्याय हटेंगे: पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार के समय जोड़े गए सिंगूर आंदोलन और ‘कन्याश्री’ योजना से जुड़े अध्यायों को सिलेबस से हटाने की बात कही गई है।
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जनवरी 2027 से मिलेंगी नई किताबें

समिति के अनुसार, 12 करोड़ से अधिक पुस्तकों के प्रकाशन का लक्ष्य है और नई पुस्तकों का पहला संस्करण जनवरी 2027 तक स्कूलों में उपलब्ध कराने की योजना है। मुख्य मंत्री सुभेंदु अधिकारी ने भी स्पष्ट किया है कि सरकार शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए प्रतिबद्ध है और स्कूलों में ‘पास-फेल नीति’ को दोबारा लागू करने तथा मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर रोक जैसे कदमों पर भी विचार कर रही है।