भारत के नागरिक उड्डयन में यात्रियों की संख्या बढ़ी, लेकिन सुरक्षा, स्टाफिंग और जवाबदेही में गंभीर कमी -संसदीय समिति की रिपोर्ट में चेतावनी
1. यात्रियों की संख्या बढ़ी, पर सुरक्षा पीछे छूट गई
देश में हवाई यात्रा करने वालों की संख्या तेजी से बढ़ी है, लेकिन सुरक्षा मानकों में उसी अनुपात में सुधार नहीं हुआ। 754 विमानों में से 377 में बार-बार तकनीकी खामियां मिलीं — यह बड़ा संकेत है कि रखरखाव (maintenance) में समस्या है।
2. DGCA खुद कमजोर स्थिति में
महानिदेशालय नागरिक उड्डयन (DGCA) जो सुरक्षा की निगरानी करता है, वही स्टाफ की कमी से जूझ रहा है।
1630 पद स्वीकृत, लेकिन सिर्फ 843 भरे
यानी लगभग आधा स्टाफ ही काम कर रहा है
3. हादसे और सुरक्षा चूक चिंता बढ़ाते हैं
अहमदाबाद विमान हादसे में 260 मौतों का जिक्र, एक साल में लगभग 100 सुरक्षा चूक, इसलिए एक स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच समिति बनाने की सिफारिश
4. उड़ान (UDAN) योजना पर सवाल
उड़ान योजना
9200 करोड़ रुपये खर्च, 657 रूट चालू बताए गए, लेकिन 150+ रूट अभी शुरू ही नहीं हुए
5. यात्रियों के अधिकार स्पष्ट नहीं
फ्लाइट लेट, कैंसिल या मुआवजे पर स्पष्ट कानून नहीं, इसलिए “Passenger Rights Charter” बनाने की सिफारिश
6. निवेश में पारदर्शिता की कमी
एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया, मुनाफा अच्छा, लेकिन निवेश पर संसद की सीधी निगरानी कम
भारत के नागरिउड्डयन में यात्रियों की संख्या बढ़ी, लेकिन सुरक्षा, स्टाफिंग और जवाबदेही में गंभीर कमी -संसदीय समिति की रिपोर्ट में चेतावनी
कुल मिलाकर क्या समस्या है?
यह रिपोर्ट एक साफ चेतावनी है:
इन्फ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षा पीछे है
नियामक (regulator) कमजोर है
योजनाएं पूरी तरह लागू नहीं हो रहीं
यात्रियों के अधिकार अधूरे हैं
आगे क्या होना चाहिए?
रिपोर्ट के अनुसार सुधार के लिए जरूरी कदम:
DGCA में तेजी से भर्ती
स्वतंत्र सुरक्षा जांच एजेंसी
उड़ान योजना का ऑडिट
स्पष्ट यात्री अधिकार कानून
निवेश में पारदर्शिता, भारत का एविएशन सेक्टर ग्रोथ मोड में है, लेकिन “सेफ्टी और गवर्नेंस मोड में नहींभारत के नागरिक उड्डयन में यात्रियों की संख्या बढ़ी, लेकिन सुरक्षा, स्टाफिंग और जवाबदेही में गंभीर कमी -संसदी समिति की रिपोर्ट में चेतावनी। अगर अभी सुधार नहीं किए गए, तो आगे बड़े जोखिम पैदा हो सकते हैं।
