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धूमधाम से मनाया गया आयुध निर्माणी दिवस

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धूमधाम से मनाया गया आयुध निर्माणी दिव

कटनी – संपूर्ण भारत में 18 मार्च आयुध निर्माणी दिवस के रूप में मनाया जाता है तथा प्रतिवर्ष की भाँति इस वर्ष भी आ.नि. कटनी में यह पर्व कर्मचारियों एवं अधिकारियों द्वारा मिलकर प्रफुल्लित मन से मनाया गया। आ. नि. बोर्ड एशिया का दूसरा एवं भारत का सबसे बड़ा रक्षा उपकरण निर्माता था। आ. नि. बोर्ड को चौथे रक्षा बल अर्थात सशस्त्र बलों के पीछे की सेना के रूप में भी जाना जाता था। इसी उपक्रम की बदौलत हमने तीन युद्द जीते हैं तथा भारत आर्म्स, एम्यूनिसंस, एक्सप्लोसिव्स, वेपन स्पेयर्स, पैराशूट्स, लेदर तथा क्लोदिंग आइटम्स आदि 30 से अधिक देशों में निर्यात करता है।
18 मार्च के दिन प्रतिवर्ष जगह-जगह रक्षा उपकरणों की प्रदर्शनी तथा विभिन्न आयु वर्ग में आयुध दौड़ आदि जैसे कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता रहा है।
भारतीय आयुध निर्माणियाँ एक भव्य औद्योगिक संरचना हैं, इनका गौरवशाली इतिहास 224 वर्षों का है तथा ये भारत सरकार रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करती हैं।
इस महान औद्योगिक संरचना का वर्तमान सरकार द्वारा अक्टूबर 2021 से निगमीकरण कर दिया गया है, जिसके कारणों पर आज भी प्रश्नवाचक चिन्ह है। सरकार ने इस बोर्ड को 7 डीपीएसयू में वितरित कर दिया है, जिससे विभिन्न आयुध निर्माणियों के लगभग 70 हजार कर्मचारियों में रोष है। 18 मार्च को ही 1802 में देश की पहली आयुध निर्माणी, काशीपुर कोलकता में उत्पादन प्रारम्भ हुआ था, अतः इस दिन को “आयुध निर्माणी दिवस” के रूप में मनाया जाता है।
कटनी निर्माणी में भी केक काटकर उत्सव का श्रीगणेश किया। तत्पश्चात शिवाजी प्रताप, सुधीर त्रिपाठी, रजनीश शर्मा, शिव पाण्डेय, मुकेश आदि वक्ताओं के उद्बोधनों से समा, बंध गया। लगभग सभी वक्ताओं ने आयुध निर्माणियों की महत्ता एवं राष्ट्र सुरक्षा जैसे मुद्दों पर प्रकाश डाला। सभी कर्मचारियों ने “आयुध
कारखानों को बचाने तथा राष्ट्र का गौरव बढ़ाने” की शपथ भी ली।श्री भावेश दुबे जी ने कार्यक्रम का संचालन किया। कार्यक्रम के अंत मे संयुक्त संघर्ष समिति के महासचिव संजय तिवारी ने सभी को धन्यवाद ज्ञापित कर कार्यक्रम का समापन किया। यह पर्व सम्पूर्ण मर्यादा में चायवकाश के समय 9:30 से 10:00 के बीच औद्योगिक केंटीन सम्पन्न हुआ। मिष्ठान वितरण के पश्चात राष्ट्रभक्त, कर्तव्यनिष्ठ कर्मचारीगण अपने-अपने अनुभाग में जाकर पुनः उत्पादन कार्य में रत हो गये।

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