ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष लामबंद: महाभियोग लाने की तैयारी, लेकिन आसान नहीं राह; समझें पूरा गणित
नई दिल्ली: एसआईआर (SIR) मुद्दे को लेकर विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और उनके इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। इसके साथ ही विपक्ष संसद में उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव (Impeachment Motion) लाने की रणनीति बना रहा है। हालांकि, भारतीय संवैधानिक नियमों के तहत बिना सरकार के समर्थन और दो-तिहाई बहुमत के विपक्ष के लिए अकेले इस प्रस्ताव को पारित कराना संभव नहीं है। ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष लामबंद: महाभियोग लाने की तैयारी, लेकिन आसान नहीं राह; समझें पूरा गणित
कैसे हटाया जा सकता है मुख्य चुनाव आयुक्त को?
संवैधानिक प्रावधान: मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया उच्चतम न्यायालय के जज को हटाने जैसी ही कठोर होती है।
महाभियोग की शर्त: संसद के दोनों सदनों में उपस्थित एवं मतदान करने वाले सदस्यों का दो-तिहाई (2/3) बहुमत होना आवश्यक है।
इस्तीफा: यदि मुख्य चुनाव आयुक्त चाहें तो वे स्वेच्छा से राष्ट्रपति को अपना त्यागपत्र सौंप सकते हैं, अन्यथा उन्हें सुप्रीम कोर्ट या बिना संसदीय प्रक्रिया के नहीं हटाया जा सकता।
ज्ञानेश कुमार का कार्यकाल और चुनावी रोडमैप (2025–2029)
ज्ञानेश कुमार ने 19 फरवरी 2025 को भारत के 26वें मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में पदभार संभाला था। उनका कार्यकाल जनवरी 2029 तक रहेगा, जो 2029 के आम चुनाव की घोषणा से कुछ समय पहले समाप्त होगा।
मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान ज्ञानेश कुमार 22 राज्यों के विधानसभा चुनाव और 2027 के राष्ट्रपति चुनाव का संचालन कराएंगे। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष लामबंद: महाभियोग और कार्यकाल का पूरा ब्योरा





















