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OF the Record: अंकलों’ से निराश हैं राहुन

नेशनल डेस्कः कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पार्टी के ‘अंकलों’ से बहुत ही निराश हैं जो पार्टी लाइन से हटकर अपनी मनमर्जी से बयान देते हैं और मोदी-शाह ब्रिगेड को ऐसा बारूद उपलब्ध करा देते हैं जिससे वह पार्टी द्वारा अर्जित किए लाभ को बर्बाद कर देती है। बड़ी कठिनाई के बाद राहुल ने ‘अंकल मणिशंकर अय्यर से छुटकारा पाया है’ जिन्होंने अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के अधिवेशन में मोदी के खिलाफ ‘चाय वाला’ की टिप्पणी की जो 2014 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस के चुनाव अभियान को बर्बाद करने का मुख्य कारण बनी। राहुल गांधी ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को बार-बार अनुरोध किया है कि वे जनहितों के मामलों पर सावधानीपूर्वक बयान दें और आधिकारिक प्रवक्ताओं द्वारा दिए गए दिशा-निर्देशों का पालन करें।
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राहुल गांधी उस समय बहुत गुस्से में दिखाई दिए जब वरिष्ठ कांग्रेसी नेता सैफुद्दीन सोज ने जम्मू-कश्मीर के संबंध में कुछ आपत्तिजनक टिप्पणी की। जिस समय यह टिप्पणी की गई उसको लेकर गांधी बहुत नाराज हुए क्योंकि भाजपा और पी.डी.पी. इस समय युद्ध पथ पर थे और कांग्रेस अपनी नीति प्रक्रिया तैयार करने में जुटी थी। सोज के इस बयान से कांग्रेस के हित बुरी तरह प्रभावित हुए मगर इससे भी बदतर स्थिति अभी आनी थी क्योंकि राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने कई मामलों में सोज का समर्थन किया। राहुल गांधी यह नहीं समझ पाए कि वह क्या करें क्योंकि गुलाम नबी आजाद उनके लिए उनकी दादी इंदिरा गांधी के समय से ‘अंकल’ हैं। वह आजाद को फोन कर यह बताने का साहस नहीं कर पाए कि यह अनुचित है।
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मालूम हुआ है कि राहुल ने फोन उठाया और अपनी मां सोनिया गांधी को बताया कि वह आजाद के साथ बात करें। चर्चा है कि सोनिया ने आजाद से बात की और उनको इस बात से अवगत करवाया कि यह मामला उठाने का सही समय नहीं था। बाद में आजाद ने सोज से शांत रहने और मीडिया से दूर रहने को कहा। इसी संदर्भ में कश्मीर मुद्दे को लेकर एक बैठक पूर्व प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह के निवास पर हुई और राहुल गांधी ने उसकी अध्यक्षता नहीं की।

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