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Nirjala Ekadashi 2026: 25 जून को रखा जाएगा साल का सबसे कड़ा व्रत; अनजाने में भी न करें ये 5 बड़ी गलतियां, वरना भुगतना पड़ सकता है भारी नुकसान

Nirjala Ekadashi 2026: 25 जून को रखा जाएगा साल का सबसे कड़ा व्रत; अनजाने में भी न करें ये 5 बड़ी गलतियां, वरना भुगतना पड़ सकता है भारी नुकसान

Nirjala Ekadashi 2026: 25 जून को रखा जाएगा साल का सबसे कड़ा व्रत; अनजाने में भी न करें ये 5 बड़ी गलतियां, वरना भुगतना पड़ सकता है भारी नुकसान

काशी/वाराणसी: हिंदू धर्म और पंचांग विन्यास में ‘निर्जला एकादशी’ को सभी 24 एकादशियों में सबसे कठिन, सर्वोच्च और अदम्य पुण्यदायी व्रतों में से एक माना गया है। द्रिक पंचांग (Drik Panchang) के कड़े ज्योतिषीय विन्यास के अनुसार, साल 2026 में निर्जला एकादशी का महाव्रत 25 जून (गुरुवार) को पूरे देश में श्रद्धा और उल्लास के साथ रखा जाएगा।

इस पावन तिथि पर जगत के पालनहार भगवान विष्णु की विशेष पूजा-अर्चना, निर्जला उपवास और कलश व जल दान का विशेष विधिक महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस महाव्रत के नियम इतने कड़े हैं कि अनजाने में की गई एक छोटी सी भूल भी आपके पूरे वर्ष की तपस्या और व्रत के पुण्य को कम कर सकती है। इसलिए सुख-समृद्धि की चाह रखने वाले व्रतियों को इस दिन 5 बड़ी गलतियों से हर हाल में बचना चाहिए।

निर्जला एकादशी पर भूलकर भी न करें ये 5 महा-गलतियां

1. भूलकर भी जल (पानी) का सेवन न करें

निर्जला एकादशी का सबसे पहला और कड़ा विधिक नियम ही जल का संपूर्ण त्याग है। इस व्रत में श्रद्धालु पूरे दिन और रात (सूर्योदय से अगले दिन पारण के सूर्योदय तक) बिना जल की एक भी बूंद ग्रहण किए भगवान विष्णु की भक्ति में लीन रहते हैं। हालांकि, सुबह मुख की शुद्धि (दांतों की सफाई) के लिए कुल्ला (आचमन) करने की विधिक अनुमति है, लेकिन ध्यान रहे कि कुल्ले का पानी भी गले के नीचे नहीं उतरना चाहिए, अन्यथा व्रत खंडित हो जाता है।

2. अन्न और विशेष रूप से ‘चावल’ का सेवन वर्जित

एकादशी तिथि पर किसी भी प्रकार के अनाज या अन्न का सेवन पूरी तरह निषेध माना गया है। विशेष रूप से इस दिन चावल (भात) खाने की कड़क मनाही है। हमारे धार्मिक ग्रंथों और पुराणों में स्पष्ट उल्लेख मिलता है कि एकादशी के दिन चावल खाने से संचित पुण्य समाप्त हो जाते हैं और व्यक्ति पाप का भागी बनता है।

3.  तुलसी के पत्ते (तुलसी दल) कतई न तोड़ें

यद्यपि भगवान विष्णु की हर पूजा और भोग बिना तुलसी दल के अधूरे माने जाते हैं, परंतु एकादशी तिथि पर तुलसी के पौधे से पत्तियां तोड़ना बेहद अशुभ और वर्जित है।

शास्त्रीय विन्यास: ऐसी धार्मिक मान्यता है कि एकादशी तिथि पर माता तुलसी भगवान विष्णु के लिए निर्जला उपवास करती हैं और विश्राम में रहती हैं। यदि आपको पूजा के लिए तुलसी के पत्तों की विधिक आवश्यकता है, तो उन्हें एक दिन पूर्व (दशमी तिथि को) ही तोड़कर सुरक्षित रख लेना चाहिए।

4. तामसिक भोजन, लहसुन-प्याज और नशे से रहें कोसों दूर

निर्जला एकादशी केवल भौतिक उपवास का नाम नहीं है, बल्कि यह तन, मन और आत्मा की पूर्ण शुद्धि का महापर्व है। इस दिन घर में लहसुन, प्याज, मांसाहार (Non-Veg), मदिरा (शराब) या किसी भी प्रकार की नशीली व तामसिक चीजों का प्रवेश और सेवन पूरी तरह वर्जित है।

5 क्रोध, असत्य (झूठ) और गृह-क्लेश (वाद-विवाद) से बचें

इस पावन दिन पर अपने व्यवहार और वाणी पर कड़ा संयम रखना अनिवार्य है। किसी का दिल दुखाना, अपशब्द कहना, झूठ बोलना, गुस्सा करना या किसी भी प्रकार के पारिवारिक विवाद में पड़ना आपके व्रत के आध्यात्मिक फलों को नष्ट कर देता है। भगवान श्रीहरि की विधिक कृपा प्राप्त करने के लिए मन में दया, शांति, परोपकार और सकारात्मक विचार रखना जरूरी है।

‘भीमसेनी एकादशी’ का पौराणिक इतिहास और महत्व

धार्मिक इतिहास के अनुसार, महाभारत काल में पांडवों में से अद्वितीय बलशाली भीमसेन ने महर्षि वेदव्यास के कड़े निर्देश और मार्गदर्शन पर इस महान व्रत को धारण किया था। भीमसेन अपनी तीव्र जठराग्नि के कारण साल की अन्य एकादशियों पर भूखे नहीं रह पाते थे, इसलिए उन्होंने वर्ष में केवल एक बार इस कठिन निर्जला एकादशी का व्रत कर सभी एकादशियों का सामूहिक पुण्य प्राप्त किया था। इसी कारण इसे ‘भीमसेनी एकादशी’ या ‘पांडव एकादशी’ भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा और दान करने से जीवन के समस्त आर्थिक और शारीरिक कष्ट दूर होते हैं।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले कड़े धार्मिक सवाल (FAQs)

  • सवाल: क्या अस्वस्थ व्यक्ति या गर्भवती महिलाएं भी इस दिन पानी नहीं पी सकतीं?

  • जवाब: शास्त्रों में व्यवस्था है कि यह व्रत पूरी तरह निर्जला रखा जाता है। परंतु, यदि कोई व्यक्ति अत्यधिक बीमार है, वृद्ध है या स्वास्थ्य संबंधी गंभीर कारणों से जूझ रहा है, तो वह अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार फलाहार या जल ग्रहण कर व्रत का विधिक पालन कर सकता है।

  • सवाल: एकादशी के दिन चावल खाना क्यों महापाप माना जाता है?

  • जवाब: धार्मिक और पौराणिक विन्यास के अनुसार, एकादशी तिथि पर चावल में जल का अंश सबसे अधिक होता है और मन पर इसका सीधा प्रभाव पड़ता है, जिससे सात्विकता भंग होती है। इसलिए इस दिन चावल का सेवन वर्जित है।

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