MP School Department Merger: एमपी में बदलेगा स्कूली शिक्षा का पूरा ढर्रा-अब एक ही विभाग के हाथ में होगी राज्य के सारे स्कूलों की कमान; जानें क्या है सरकार का मास्टर प्लान
MP School Department Merger: एमपी में बदलेगा स्कूली शिक्षा का पूरा ढर्रा-अब एक ही विभाग के हाथ में होगी राज्य के सारे स्कूलों की कमान; जानें क्या है सरकार का मास्टर प्लान
MP School Department Merger: एमपी में बदलेगा स्कूली शिक्षा का पूरा ढर्रा-अब एक ही विभाग के हाथ में होगी राज्य के सारे स्कूलों की कमान; जानें क्या है सरकार का मास्टर प्लान। मध्य प्रदेश में स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता (Quality of Education) को विश्वस्तरीय बनाने और प्रशासनिक विसंगतियों को दूर करने के लिए मोहन यादव सरकार ने एक बेहद क्रांतिकारी और बड़ा फैसला लिया है। प्रदेश की पूरी स्कूली शिक्षा व्यवस्था अब किसी एक विभाग के ही अधीन होगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा के अनुरूप, अब राज्य में ‘स्कूल शिक्षा विभाग’ ही स्कूली शिक्षा का पूरा जिम्मा संभालेगा।
इसके तहत जनजातीय कार्य विभाग (Tribal Affairs Department) द्वारा वर्तमान में संचालित किए जा रहे 24,196 स्कूलों का पूरी तरह से मर्जर (विलेयकरण) स्कूल शिक्षा विभाग में किया जाएगा। स्कूल शिक्षा विभाग ने इस बड़े नीतिगत बदलाव को लेकर कैबिनेट बैठक के लिए औपचारिक प्रस्ताव तैयार कर लिया है।
4 से 5 साल में पूरा होगा ‘महा-मर्जर’ का काम; चरणबद्ध तरीके से बढ़ेगी प्रक्रिया
इतने बड़े पैमाने पर होने वाले इस प्रशासनिक फेरबदल को सुचारू रूप से लागू करने के लिए सरकार ने एक लंबी और सुदृढ़ योजना बनाई है:
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चरणबद्ध प्रक्रिया: सरकार का मानना है कि दोनों विभागों के स्कूलों के विलय का यह काम चरणबद्ध (Phase-wise) तरीके से किया जाएगा, ताकि बच्चों की पढ़ाई और शिक्षकों की व्यवस्था पर कोई नकारात्मक असर न पड़े।
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लगेगा समय: इस पूरी विलेयकरण प्रक्रिया को जमीनी स्तर पर पूरी तरह से मुकम्मल होने में चार से पांच वर्ष का समय लग सकता है।
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अगला कदम: तैयार किए गए कैबिनेट ड्राफ्ट को फिलहाल औपचारिक अभिमत (Feedback) प्राप्त करने के लिए जनजातीय कार्य विभाग को भेजा जा रहा है। वहां से हरी झंडी और सुझाव मिलने के बाद इस प्रक्रिया को तेजी से आगे कैबिनेट की मंजूरी के लिए रखा जाएगा।MP School Department Merger
क्यों लिया गया यह बड़ा फैसला? जानिए इसके पीछे की मुख्य वजहें
अभी तक मध्य प्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग और जनजातीय कार्य विभाग द्वारा अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी नीतियों के हिसाब से स्कूल संचालित किए जाते थे, जिससे कई व्यावहारिक दिक्कतें आती थीं। इस मर्जर से ये बड़े फायदे होंगे: एमपी में बदलेगा स्कूली शिक्षा का पूरा ढर्रा-अब एक ही विभाग के हाथ में होगी राज्य के सारे स्कूलों की कमान; जानें क्या है सरकार का मास्टर प्लान
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एकसमान शिक्षा और पाठ्यक्रम: पूरे प्रदेश के सभी सरकारी स्कूलों में एक ही प्रशासनिक नीति, एकसमान अनुश्रवण (Monitoring) और समान गुणवत्ता वाली शिक्षा सुनिश्चित हो सकेगी।
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बेहतर प्रशासनिक नियंत्रण: दो अलग-अलग विभागों के होने से बजट आवंटन, शिक्षकों के ट्रांसफर-पोस्टिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट में जो प्रशासनिक दोहराव (Duplication) होता था, वह पूरी तरह खत्म हो जाएगा।
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आदिवासी क्षेत्रों को लाभ: जनजातीय अंचलों के बच्चों को स्कूल शिक्षा विभाग की आधुनिक योजनाओं, डिजिटल लर्निंग टूल्स और बेहतर ट्रेनिंग प्राप्त शिक्षकों का सीधा लाभ मिल सकेगा।








