मध्यप्रदेश

MP सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर: प्रमोशन पर लगी अघोषित रोक हटेगी- हाई कोर्ट में जज बदलने के बाद सरकार ने दिए पदोन्नति प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश

MP सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर: प्रमोशन पर लगी अघोषित रोक हटेगी- हाई कोर्ट में जज बदलने के बाद सरकार ने दिए पदोन्नति प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश

MP सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर: प्रमोशन पर लगी अघोषित रोक हटेगी- हाई कोर्ट में जज बदलने के बाद सरकार ने दिए पदोन्नति प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश

भोपाल। मध्य प्रदेश के लाखों सरकारी कर्मचारियों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आ रही है। राज्य सरकार ने एक बड़ा प्रशासनिक फैसला लेते हुए संकेत दिए हैं कि अब प्रदेश में एक दशक (10 साल) से रुके हुए प्रमोशन की राह साफ हो सकती है। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) के अपर सचिव अजय कटेसरिया ने सभी विभागों के सचिवों, विभागाध्यक्षों और जिला कलेक्टरों को एक विधिक अभिमत (Legal Opinion) भेजकर उसके अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

इस नए घटनाक्रम के बाद अब नई सुनवाई पूरी होने तक पदोन्नति को रोकना व्यावहारिक नहीं माना जा रहा है और जल्द ही विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की बैठकें शुरू हो सकती हैं।

हाई कोर्ट के दोनों जज बदले, इसलिए परिस्थितियों में आया बड़ा बदलाव

दरअसल, सरकार ने यह कदम हाई कोर्ट की पीठ में हुए बड़े बदलावों के बाद उठाया है:

  • निर्णय हो गया था सुरक्षित: वरिष्ठ अधिवक्ता सीएस वैद्यनाथन ने कोर्ट को बताया कि ‘मध्य प्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम 2025’ की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर 17 फरवरी 2026 को सुनवाई पूरी कर निर्णय सुरक्षित रख लिया गया था।

  • बदल गई पीठ: इसी बीच सुनवाई करने वाले एक न्यायाधीश को सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) में पदस्थ कर दिया गया और दूसरे का तबादला हो गया।

  • अब नए सिरे से होगी सुनवाई: चूंकि दोनों जज अब अलग-अलग स्थानों पर हैं, इसलिए इस मामले के लिए अब नई पीठ (New Bench) का गठन होगा। ऐसे में फैसला जल्द आने की उम्मीद नहीं है और इसमें लंबा समय लग सकता है।

कोई लिखित रोक नहीं, सशर्त पदोन्नति की तैयारी

अभिमत में स्पष्ट किया गया है कि पूर्व में सिर्फ एक मौखिक और अनौपचारिक आश्वासन दिया गया था कि मामला लंबित रहने के दौरान पदोन्नति नहीं की जाएगी। इसे किसी भी न्यायिक आदेश में दर्ज नहीं किया गया था।

कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला: विधिक अभिमत के अनुसार, ‘मध्य प्रदेश राज्य बनाम विनय कुमार बाबेल’ मामले में हाई कोर्ट पहले ही कह चुका है कि नियमों को चुनौती देने का मामला लंबित होने मात्र से राज्य सरकार को विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) बुलाने या प्रमोशन देने से रोका नहीं जा सकता। हालांकि, यह तमाम पदोन्नतियां सशर्त होंगी और हाई कोर्ट के अंतिम निर्णय के अधीन रहेंगी।MP सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर: प्रमोशन पर लगी अघोषित रोक हटेगी- हाई कोर्ट में जज बदलने के बाद सरकार ने दिए पदोन्नति प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश

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सिर्फ 40% अमले से चल रहा काम, पदोन्नति रोकना जनहित में नहीं

सरकार ने विधिक तौर पर यह माना है कि लंबे समय से प्रमोशन रुकने के कारण प्रशासनिक व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है:

  • उच्च पद खाली: सरकार पहले ही हाई कोर्ट को बता चुकी है कि वह अपनी स्वीकृत क्षमता के केवल 40 प्रतिशत कर्मचारियों के सहारे काम चला रही है।

  • भर्तियों पर असर: एक दशक से पदोन्नति न होने के कारण निचले पदों पर नई भर्तियां भी प्रभावित हुईं, क्योंकि प्रमोशन चैन ब्लॉक हो गई थी।

  • व्यावहारिक कदम: इन परिस्थितियों को देखते हुए नई सुनवाई पूरी होने तक प्रदेश के लाखों कर्मचारियों की पदोन्नति को रोके रखना न तो व्यावहारिक है और न ही व्यापक जनहित में है।

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