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MP AYUSH Admissions 2026: मध्यप्रदेश के सभी 7 शासकीय आयुर्वेद कॉलेजों को मिली NCISM की मान्यता; काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू

MP AYUSH Admissions 2026: मध्यप्रदेश के सभी 7 शासकीय आयुर्वेद कॉलेजों को मिली NCISM की मान्यता; काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू

संवाददाता भोपाल: देश भर के 56 आयुर्वेद मेडिकल कॉलेजों की मान्यता रोके जाने के बीच मध्य प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र से एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। ‘नेशनल कमीशन फॉर इंडियन सिस्टम ऑफ मेडिसिन’ (NCISM), नई दिल्ली ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए मध्य प्रदेश के सभी सात शासकीय आयुर्वेद कॉलेजों को मान्यता प्रदान कर दी है।

मान्यता मिलने के साथ ही ये सभी शासकीय संस्थान आयुष नीट (AYUSH NEET) काउंसलिंग 2026-27 की प्रक्रिया में शामिल हो गए हैं। इन सातों कॉलेजों को मिलाकर 523 स्नातक (BAMS UG) और 117 स्नातकोत्तर (MD/MS PG) सीटें आवंटित की गई हैं।

 प्रदेश के किस शासकीय कॉलेज को मिलीं कितनी सीटें?

NCISM द्वारा जारी सूची के अनुसार सीटें (EWS कोटे सहित) इस प्रकार हैं:

पं. खुशीलाल शर्मा शासकीय आयुर्वेद कॉलेज, भोपाल: यूजी (UG) की 75 और पीजी (PG) की 74 सीटें।

शासकीय अष्टांग आयुर्वेद कॉलेज, इंदौर: यूजी की 75 और पीजी की 15 सीटें। (इंदौर कॉलेज में पहली बार 15 विषयों में पीजी कोर्स शुरू हो रहा है, जिसमें रचना शरीर, क्रिया शरीर और शालाक्यतंत्र में 5-5 सीटें स्वीकृत की गई हैं)۔

  • शासकीय आयुर्वेद कॉलेज, उज्जैन: यूजी की 75 और पीजी की 17 सीटें।
  • शासकीय आयुर्वेद कॉलेज, रीवा: यूजी की 75 और पीजी की 6 सीटें।
  • शासकीय आयुर्वेद कॉलेज, ग्वालियर: यूजी की 75 और पीजी की 5 सीटें।
  • शासकीय आयुर्वेद कॉलेज, जबलपुर: यूजी की 75 सीटें।
  • शासकीय आयुर्वेद कॉलेज, बुरहानपुर: यूजी की 73 सीटें।

प्रदेश में आयुष कॉलेजों की वर्तमान स्थिति

  • मध्यप्रदेश में अब तक सरकारी और निजी मिलाकर कुल 27 आयुर्वेद कॉलेजों को मान्यता मिल चुकी है।
  • देश भर में अब तक 490 आयुर्वेद कॉलेजों को NCISM से हरी झंडी मिल चुकी है।
  • मध्य प्रदेश के एक निजी कॉलेज का फैसला अभी लंबित है, जबकि एक निजी कॉलेज ने मान्यता मिलने के बावजूद अपना नामांकन वापस ले लिया है।

विशेषज्ञों की राय: “मापदंडों पर खरा उतरना बड़ी उपलब्धि”

आयुष मेडिकल एसोसिएशन के प्रवक्ता डॉ. राकेश पाण्डेय ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा:

“जब देशभर के 56 आयुर्वेद कॉलेजों की मान्यता मानकों में कमी के कारण रोकी गई है, उस दौर में मध्य प्रदेश के सभी सातों शासकीय कॉलेजों का NCISM के कड़े मापदंडों पर खरा उतरना राज्य के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।”

— डॉ. राकेश पाण्डेय, प्रवक्ता (आयुष मेडिकल एसोसिएशन)

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