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शराब तस्कर गिरोह: दिल्ली के ढक्कन, पुणे का होलोग्राम और MP की शराब; डोंगरगढ़ बना अवैध बाटलिंग का महा-कॉरिडोर, 3 साल से चल रहा था डबल मुनाफे का खेल

शराब तस्कर गिरोह: दिल्ली के ढक्कन, पुणे का होलोग्राम और MP की शराब; डोंगरगढ़ बना अवैध बाटलिंग का महा-कॉरिडोर, 3 साल से चल रहा था डबल मुनाफे का खेल

शराब तस्कर गिरोह: दिल्ली के ढक्कन, पुणे का होलोग्राम और MP की शराब; डोंगरगढ़ बना अवैध बाटलिंग का महा-कॉरिडोर, 3 साल से चल रहा था डबल मुनाफे का खेल

डोंगरगढ़/सरहदी अंचल: मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय एक बड़े अंतरराज्यीय शराब तस्कर गिरोह का बेहद चौंकाने वाला और कड़ा विन्यास सामने आया है। जांच में खुलासा हुआ है कि प्रदेश में दूसरे राज्यों की अवैध बाटलिंग (Illegal Bottling) कर शराब खपाने के पीछे एक बेहद शातिर संगठित अंतरराज्यीय गिरोह काम कर रहा है।

इस गिरोह का नेटवर्क देश के अलग-अलग बड़े राज्यों और महानगरों तक फैला हुआ है। गिरोह के सभी गुर्गों के नेटवर्क एक-दूसरे से कड़ाई से जुड़े हुए हैं और इसी की मदद से शराब के अवैध कारोबार का यह बड़ा काला धंधा धड़ल्ले से संचालित किया जा रहा है।

दिल्ली से स्टीकर, पुणे-नागपुर से होलोग्राम; ऐसे काम कर रहा है सिंडिकेट

इस संगठित अपराध का लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन विन्यास बेहद कड़क और चौंकाने वाला है:

  • शराब की मुख्य सप्लाई: इस अवैध कारोबार के लिए मुख्य शराब मध्य प्रदेश (MP) के विभिन्न जिलों से तस्करी कर लाई जा रही है।
  • महानगरों से आ रहा नकली सामान: ब्रांडेड कंपनियों और आबकारी विभाग की आंखों में धूल झोंकने के लिए शराब की बोतलों के ढक्कन, नकली स्टीकर और सरकारी होलोग्राम की खेप दिल्ली, पुणे और नागपुर जैसे बड़े शहरों से कड़ाई से मंगवाई जा रही है।
  • अवैध बाटलिंग का खेल: दूसरे राज्यों से आए इन नकली होलोग्राम और स्टीकर्स को स्थानीय बोतलों में री-पैक (Re-pack) किया जाता है, जिससे यह नकली शराब पूरी तरह असली नजर आए।

 डोंगरगढ़ बना अवैध शराब का मुख्य ‘काॅरीडोर’

भौगोलिक विन्यास का फायदा उठाकर इस पूरे संगठित अपराध का मुख्य केंद्र जिले का सरहदी इलाका डोंगरगढ़ बना हुआ है:

  • एमपी के इन जिलों से कनेक्शन: मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा, पांढुर्णा और बालाघाट सहित कई अन्य सरहदी जिलों से भारी मात्रा में शराब लाकर डोंगरगढ़ के गुप्त ठिकानों पर कड़ाई से डंप की जाती है। इस शहर को अब मध्य प्रदेश की अवैध शराब खपाने का सबसे बड़ा और कड़ा ‘कॉरिडोर’ माना जाने लगा है।
  • तीन साल से चल रहा डबल मुनाफे का खेल: पहले स्थानीय कोचिए (तस्कर) इसे सीधे मध्य प्रदेश के लेबल के साथ ही सस्ते दामों में बेच दिया करते थे। लेकिन पिछले तीन वर्षों में माफिया ने अपना विन्यास बदला; उन्होंने बाहरी शराब की स्थानीय बोतलों में अवैध बाटलिंग शुरू कर दी, जिससे अब वे ‘डबल मुनाफा’ कूट रहे हैं। दिल्ली के ढक्कन, पुणे का होलोग्राम और MP की शराब; डोंगरगढ़ बना अवैध बाटलिंग का महा-कॉरिडोर, 3 साल से चल रहा था डबल मुनाफे का खेल

कातलवाही एक्शन के बाद जांच तेज; अब तक 3 बड़ी विधिक कार्रवाइयां

इस काले धंधे पर नकेल कसने के लिए प्रशासनिक और विधिक स्तर पर कार्रवाई का दावा किया जा रहा है:

  • अब तक का एक्शन: डोंगरगढ़ क्षेत्र में अब तक इस तरह की अवैध बाटलिंग यूनिट्स पर तीन से अधिक बड़ी कार्रवाइयां की जा चुकी हैं। इसके बावजूद, क्षेत्र में कहीं बड़े तो कहीं बहुत छोटे स्तर पर यह काला धंधा कड़ाई से जारी है।
  • कातलवाही केस से खुलेगा राज: हाल ही में डोंगरगढ़ के कातलवाही इलाके में हुई एक बड़ी छापामार कार्रवाई के बाद आबकारी (Excise) और पुलिस विभाग दोनों ही हरकत में आए हैं। दोनों विभाग अब संयुक्त विन्यास के साथ इस अंतरराज्यीय नेटवर्क के असली आकाओं (शराब किंगपिन) की जांच का कड़ा दावा कर रहे हैं।

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