कन्या महाविद्यालय में भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ के अंतर्गत राष्ट्रीय रसायन विज्ञान दिवस पर व्याख्यान आयोजित
कन्या महाविद्यालय में भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ के अंतर्गत राष्ट्रीय रसायन विज्ञान दिवस पर व्याख्यान आयोजि
कटनी -उच्च शिक्षा विभाग, मध्यप्रदेश शासन के निर्देशानुसार शासकीय कन्या महाविद्यालय में प्राचार्य डॉ. चित्रा प्रभात के मार्गदर्शन में भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ के तत्वावधान में राष्ट्रीय रसायन विज्ञान दिवस के अवसर पर महान भारतीय वैज्ञानिक एवं रसायनशास्त्री आचार्य प्रफुल्ल चंद्र राय के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर एक प्रेरणादायी व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छात्राओं को भारतीय वैज्ञानिक परंपरा, आचार्य प्रफुल्ल चंद्र राय के जीवन संघर्ष, वैज्ञानिक उपलब्धियों तथा राष्ट्र निर्माण में उनके अमूल्य योगदान से परिचित कराना था।
कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती के तैलचित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। इसके पश्चात अतिथियों का स्वागत करते हुए भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ की ओर से कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की गई। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में प्राचार्य डॉ. चित्रा प्रभात ने कहा कि भारत की ज्ञान परंपरा विश्व की सबसे समृद्ध परंपराओं में से एक है। हमारे देश के महान वैज्ञानिकों ने सीमित संसाधनों में भी अपने अद्वितीय शोध एवं नवाचारों के माध्यम से विज्ञान को नई दिशा प्रदान की। उन्होंने छात्राओं से आह्वान किया कि वे वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाते हुए भारतीय ज्ञान परंपरा के आदर्शों से प्रेरणा लें और समाज तथा राष्ट्र के विकास में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएँ।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित श्रीमती पूनम गर्ग ने आचार्य प्रफुल्ल चंद्र राय के जीवन पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए बताया कि उन्होंने अनेक कठिन परिस्थितियों और संघर्षों का सामना करते हुए विज्ञान के क्षेत्र में असाधारण सफलता प्राप्त की। उन्होंने अपने अथक परिश्रम, दृढ़ संकल्प और राष्ट्रसेवा की भावना से भारतीय विज्ञान को नई पहचान दिलाई। उन्होंने छात्राओं को संदेश दिया कि कठिन परिश्रम, अनुशासन और आत्मविश्वास के बल पर किसी भी लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है।
द्वितीय मुख्य वक्ता डॉ. श्रद्धा वर्मा ने अपने व्याख्यान में आचार्य प्रफुल्ल चंद्र राय के रसायन विज्ञान के क्षेत्र में किए गए महत्वपूर्ण अनुसंधानों एवं प्रयोगों का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि आचार्य राय केवल एक महान रसायनशास्त्री ही नहीं, बल्कि उत्कृष्ट शिक्षाविद्, समाज सुधारक और स्वदेशी उद्योगों के प्रबल समर्थक भी थे। उन्होंने विज्ञान को समाज की प्रगति और मानव कल्याण का प्रभावी माध्यम माना तथा भारतीय वैज्ञानिक परंपरा को वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
कार्यक्रम का प्रभावी एवं गरिमामय संचालन श्रीमती रश्मि सिंह द्वारा किया गया। अंत में श्रीमती प्रियंका सोनी ने सभी अतिथियों, प्राध्यापकों, कर्मचारियों एवं छात्राओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम की सफलता में सभी के सहयोग की सराहना की। कार्यक्रम के सफल आयोजन में भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ की प्रभारी डॉ. रोशनी पाण्डेय तथा श्रीमती स्मृति दहायत, श्रीमती श्वेता कोरी एवं श्रीमती मीनाक्षी वर्मा का विशेष योगदान रहा।
इस अवसर पर महाविद्यालय परिवार, समस्त प्राध्यापकगण, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में छात्राएँ उपस्थित रहीं। कार्यक्रम ने छात्राओं में भारतीय वैज्ञानिक विरासत के प्रति सम्मान, वैज्ञानिक सोच, अनुसंधान की भावना तथा भारतीय संस्कृति, गुरु-शिष्य परंपरा और नैतिक मूल्यों के संरक्षण के प्रति जागरूकता विकसित करने का महत्वपूर्ण कार्य किया। यह आयोजन भारतीय ज्ञान परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुँचाने तथा विज्ञान और संस्कृति के समन्वय को सुदृढ़ करने की दिशा में एक प्रेरणादायी एवं अत्यंत सार्थक पहल सिद्ध हुआ।








