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‘कॉफी पर कुरुक्षेत्र’: क्या लौट आया पीएम मोदी का पुराना ‘मोजो’? SRCC की स्पीच से यूपी की सियासी परीक्षा तक बड़ा विश्लेषण

‘कॉफी पर कुरुक्षेत्र’: क्या लौट आया पीएम मोदी का पुराना ‘मोजो’? SRCC की स्पीच से यूपी की सियासी परीक्षा तक बड़ा विश्लेषण

नई दिल्ली/भोपाल (यशभारत डॉट कॉम)। श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया संबोधन ने देश की राजनीति में उनके करिश्मे यानी ‘मोजो’ की वापसी की चर्चा छेड़ दी है। वरिष्ठ पत्रकारों और राजनीतिक विश्लेषकों ने ‘कॉफी पर कुरुक्षेत्र’ कार्यक्रम में पीएम मोदी की इस स्पीच की तुलना उनके 2013 के चर्चित भाषण से की है।

विश्लेषकों का मानना है कि 2013 में पीएम मोदी विपक्ष में थे, जबकि आज उनके 12 साल के शासन का रिपोर्ट कार्ड जनता के सामने है। बीजेपी के सामने पिछले कुछ महीनों में युवाओं से जुड़ने और संगठन के स्तर पर चुनौतियां जरूर उभरी हैं, लेकिन पार्टी का कोर वोटर अभी भी उसके साथ बना हुआ है।

युवाओं को दोबारा साधने की रणनीति

चर्चा में शामिल वरिष्ठ पत्रकारों के अनुसार, पिछले कुछ समय में युवाओं के बीच दिखे असंतोष को दूर करने के लिए पीएम मोदी और केंद्र सरकार ने सीधा संवाद शुरू किया है। जंतर-मंतर के बाद सोशल मीडिया वीडियो, वडोदरा का सफल युवा कार्यक्रम और अब SRCC में छात्रों की मिली जबरदस्त प्रतिक्रिया को इसी कनेक्ट का हिस्सा माना जा रहा है।

असला टेस्ट: उत्तर प्रदेश का सियासी रण

विश्लेषकों का मानना है कि पीएम मोदी के इस मोजो और बीजेपी के प्रभाव की असली परीक्षा उत्तर प्रदेश के आगामी चुनावों में होगी।

  • मोदी और योगी का प्रभाव: पीएम मोदी यूपी से सांसद हैं और सीएम योगी आदित्यनाथ का प्रशासनिक ग्राफ अभी भी मजबूत है। बीजेपी से नाराजगी के बावजूद योगी आदित्यनाथ का निजी जनाधार कायम है।

  • संगठन व एंटी-इनकंबेंसी की चुनौती: सत्ता में लंबे समय तक रहने से नेताओं और कार्यकर्ताओं में आई दूरी तथा निचले स्तर पर नौकरशाही के प्रभाव को चुनौती माना जा रहा है। हालांकि, कोर वोटर के सामने मजबूत विकल्प न होना बीजेपी के लिए राहत की बात है।

विपक्ष की बिसात: राहुल का जातिगत कार्ड, अखिलेश की सोशल इंजीनियरिंग

दूसरी ओर, विपक्ष भी अपनी रणनीति में जुटा हुआ है:

  • राहुल गांधी: जाति जनगणना, आरक्षण, ‘जितनी आबादी उतना हक’ और युवाओं के लिए रोजगार-परीक्षाओं के मुद्दों पर फोकस कर रहे हैं।

  • अखिलेश यादव: पश्चिमी यूपी में जाट, मुस्लिम और गैर-जाट समीकरणों को साधने की कोशिश में लगे हैं। SRCC में पीएम मोदी को मिला रिस्पॉन्स युवाओं के बीच उनके लौटते प्रभाव का संकेत जरूर देता है, लेकिन इस करिश्मे का अंतिम फैसला उत्तर प्रदेश के चुनावी नतीजे ही तय करेंगे।

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