कटनी। नेवी में नौकरी दिलाने के नाम पर देश भर के कई बेरोजगारों के साथ हुई लाखों व करोड़ों रूपए की ठगी के मामले को माधवनगर पुलिस पूरी तरह से सुलझा भी नहीं पाई थी और कल सोमवार की दोपहर ऐसा ही एक और मामला उस समय सामने आया। जब जिला न्यायालय कटनी में लिपिक के पद पर नियुक्ति संबंधी आदेश लेकर दमोह व सागर के दो युवक जिला न्यायालय पहुंच गए और यहां लेखापाल पर नियुक्ति देने दबाव बनाने लगे। न्यायालय में किसी प्रकार की भर्ती प्रक्रिया वर्तमान में जारी न होने की वजह से लेखापाल को युवकों के द्धारा लाए गए आदेश में कुछ संदेह हुआ तो उन्होने इस पूरे मामले से जिला एवं सत्र न्यायाधीश को अवगत कराया। जिसके बाद पूरे मामले की जानकारी हाईकोर्ट के महालेखापाल कार्यालय से ली गई। वहां से ऐसे किसी भी नियुक्ति आदेश जारी न किए जाने की जानकारी मिलने के बाद न्यायालय में ही माधवनगर पुलिस को बुलाया गया और फर्जी आदेश लेकर पहुंचे दोनों युवकों को पुलिस के हवाले कर दिया गया। थाने लाकर पुलिस ने युवकों से पूछताछ की तो उन्होने नौकरी के नाम पर ठगी करने वाले एक और गिरोह की जानकारी दी। जिसके बाद इस मामले में शामिल मास्टर माइंड सहित कुछ युवकों की तलाश में पुलिस की अलग-अलग टीमें दमोह व सागर रवाना हो गईं। मास्टर माइंड सहित कुछ अन्य युवकों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस पूरे मामले से पर्दा उठाएगी। उल्लेखनीय है कि अभी कुछ दिनों पूर्व नेवी में नौकरी के नाम पर ठगी करने वाले ऐसे ही एक मामले का माधवनगर पुलिस ने खुलासा किया था और बरगवां स्थित एक निजी कार्यालय के कत्र्ताधत्र्ता सुधीर विश्वकर्मा नामक युवक को गिरफ्तार किया था जबकि अभी सुधीर का भाई सुनील विश्वकर्मा और एक दलाल नरसिंहपुर निवासी माधव पटेल को पुलिस की तलाश है।
जांच में फर्जी निकला आदेश
माधवनगर थाना प्रभारी संजय दुबे ने बताया कि दमोह जिले के नोहटा क्षेत्र निवासी 25 वर्षीय अनिल पिता मनोहर प्रसाद दुबे व सागर जिले के गढ़ाकोटा शहर निवासी आनंद पिता गोविंद प्रसाद दुबे दोनों युवक कल सोमवार को जिला न्यायालय पहुंचे और लेखापाल कार्यालय प्रभारी के पास जाकर न्यायालय में लिपिक के पद पद नियुक्ति संबंधी आदेश दिखाते हुए नियुक्ति देने दबाव बनाने लगा। चूकि न्यायालय में वर्तमान में किसी प्रकार की भर्ती प्रक्रिया नहीं चल रही इसलिए लेखापाल को उनके नियुक्ति पत्र पर संदेह हुआ। जिसके बाद पूरे मामले की जानकारी जिला एवं सत्र न्यायाधीश को दी गई। जिला एंव सत्र न्यायाधीश कार्यालय की ओर से पूरे मामले की जानकारी हाईकोर्ट के महालेखापाल कार्यालय साझा करते हुए नियुक्ति पत्रों की प्रमाणिकता का पता लगाया गया। जिसमें यह साफ हुआ कि युवकों के द्धारा प्रस्तुत किया जा रहा नियुक्ति पत्र पूरी तरह से फर्जी है और फिर सूचना पुलिस को दी गई। सूचना मिलते ही पुलिस न्यायालय पहुंच गई और दोनों युवकों को गिरफ्तार कर थाने ले आई। युवकों के विरूद्ध धारा 420 के तहत मामला दर्ज कर पूछताछ की गई तो उन्होने नौकरी के नाम पर बेरोजगार युवकों से ठगी करने वाले एक बड़े गिरोह का खुलासा किया और मामले में कुछ अन्य युवकों के शामिल होने की जानकारी दी। जिसमेंं एक गिरोह का मास्टर माइंड है। पुलिस मामले से जुड़े युवकों की गिरफ्तारी के लिए दमोह व सागर स्थित उनके संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है।
एक-एक लाख में हुआ सौदा
माधवनगर थाना प्रभारी संजय दुबे ने बताया कि अनिल दुबे व आनंद दुबे भी बेरोजगार युवक हैं और वो नौकरी की तलाश करते हुए ही गिरोह के चक्कर में फंस गए। श्री दुबे के मुताबिक अभी उन्होने किसी भी तरह की रकम गिरोह के सदस्यों को नहीं दी है लेकिन नौकरी का सौदा एक-एक लाख रूपए में हुआ था। यदि फर्जी आदेश से नौकरी मिल जाती तो एक-एक लाख रूपए देने पड़ते।

