FEATUREDjabalpurLatest

Jabalpur Ring Road: मध्य भारत में कनेक्टिविटी का नया दौर; ₹3,540 करोड़ से बन रहा 114 KM लंबा जबलपुर आउटर रिंग रोड, जानें इसकी खासियतें

Jabalpur Ring Road: मध्य भारत में कनेक्टिविटी का नया दौर; ₹3,540 करोड़ से बन रहा 114 KM लंबा जबलपुर आउटर रिंग रोड, जानें इसकी खासियतें

जबलपुर/भोपाल: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के देशव्यापी आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर नेटवर्क के विजन और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में मध्य प्रदेश एक और ऐतिहासिक उपलब्धि की ओर बढ़ रहा है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा महाकौशल क्षेत्र में विकसित की जा रही जबलपुर आउटर रिंग रोड परियोजना क्षेत्र के औद्योगिक और आर्थिक विकास का नया अध्याय लिखने के लिए तैयार है।

लगभग 3,540 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से तैयार हो रही यह 114 किलोमीटर लंबी फोर-लेन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर परियोजना न केवल जबलपुर शहर को ट्रैफिक के भारी दबाव से मुक्त करेगी, बल्कि कनेक्टिविटी का एक नया वैश्विक मानक भी स्थापित करेगी।

🛣️ 5 पैकेजों में बंटा है 114 किलोमीटर का यह मजबूत नेटवर्क

परियोजना के तेज और प्रभावी क्रियान्वयन के लिए इसे 5 अलग-अलग पैकेजों (खंडों) में विभाजित किया गया है, जो जबलपुर के चारों ओर एक अभेद्य और सुदृढ़ परिवहन चक्र तैयार करेंगे:

  • बरेला से मानेगांव
  • मानेगांव से एनएच-45 (NH-45)
  • एनएच-45 से कुशनेर
  • कुशनेर से अमझर
  • अमझर से बरेला

लोक निर्माण मंत्री श्री राकेश सिंह के अनुसार, इस अत्याधुनिक कॉरिडोर के विभिन्न हिस्से इस वर्ष (2026) तथा अगले वर्ष चरणबद्ध रूप से आम जनता और यातायात के लिए खोल दिए जाएंगे। इसके शुरू होने के बाद उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र की ओर आने-जाने वाले भारी वाहनों को जबलपुर शहर के भीतर घुसने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

आधुनिक इंजीनियरिंग का अजूबा: नर्मदा नदी पर बनेगा 750 मीटर लंबा पुल

इस पूरी परियोजना का सबसे आकर्षक और तकनीकी रूप से उन्नत हिस्सा पवित्र नर्मदा नदी पर बन रहा 750 मीटर लंबा ‘एक्सट्राडोज्ड ब्रिज’ (Extradosed Bridge) है। आधुनिक इंजीनियरिंग की मिसाल बनने वाला यह पुल न केवल परिवहन को सुगम बनाएगा, बल्कि महाकौशल क्षेत्र की एक विशिष्ट स्थापत्य पहचान (Landmark) के रूप में भी उभरेगा।

इसके अलावा, इस विशाल बुनियादी ढांचे के अंतर्गत कुल 14 बड़े पुल, 37 छोटे पुल, 4 रेलवे ओवरब्रिज (ROB), 3 फ्लाईओवर और 12 वाहन अंडर-पास (VUP) का व्यापक निर्माण किया जा रहा है।

 किसानों, लॉजिस्टिक्स और पर्यटन क्षेत्र को मिलेंगे ये 3 बड़े फायदे

  • किसानों की चमकेगी किस्मत: बरेला, शाहपुरा, पाटन और सिहोरा जैसे ग्रामीण अंचलों के किसानों की उपज (कृषि उत्पाद) अब बिना किसी ट्रैफिक जाम के सीधे और बेहद कम समय में मंडियों तक पहुंच सकेगी। परिवहन लागत घटने से सीधे तौर पर किसानों की आय में बढ़ोतरी होगी।

  • लॉजिस्टिक्स हब बनेगा जबलपुर: मालवाहक ट्रकों को शहर के बाहर से रास्ता मिलने के कारण ईंधन और समय दोनों की भारी बचत होगी। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि यह कॉरिडोर भविष्य में जबलपुर को मध्य भारत के सबसे बड़े लॉजिस्टिक्स और सप्लाई-चेन हब के रूप में स्थापित कर देगा।

  • पर्यटन को लगेंगे पंख: भेड़ाघाट की विश्वप्रसिद्ध संगमरमरी घाटियां, धुआंधार जल प्रपात, ग्वारीघाट, नर्मदा तट सहित पास ही स्थित कान्हा राष्ट्रीय उद्यान और अमरकंटक जैसे धार्मिक स्थलों तक पहुंचना अब देश-विदेश के पर्यटकों के लिए बेहद तेज, सुरक्षित और सुगम हो जाएगा।

 जबलपुर आउटर रिंग रोड: प्रोजेक्ट का पूरा ब्योरा

मुख्य बिंदु परियोजना के प्रमुख आंकड़े व तथ्य
कुल बजटीय लागत लगभग ₹3,540 करोड़
परियोजना की कुल लंबाई 114 किलोमीटर (फोर-लेन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर)
कुल पैकेजों की संख्या 5 चरण (बरेला से अमझर तक)
नर्मदा ब्रिज की लंबाई 750 मीटर (अत्याधुनिक एक्सट्राडोज्ड तकनीक)
प्रमुख निर्माण 14 बड़े पुल, 3 फ्लाईओवर, 4 रेलवे ओवरब्रिज, 12 अंडर-पास

Back to top button