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Jabalpur: कोर्ट ने कहा- विवाह एक पवित्र बंधन जिसे दहेज लोभी नहीं समझ पाते

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जबलपुर। अदालत ने दहेज लोभी आरोपितों की जमानत अर्जी खारिज कर दी। मामला इस प्रकार था कि वैष्णवी कौल की 30 जून, 2020 को आरोपित पति आशीष कौल के साथ हिंदू रीति रिवाज के साथ हुई थी। शादी के कुछ दिनों बाद मृतिका को उसका पति आशीष कौल, सास चंद्रकला कौल, देवर देवीलाल कौल एवं ननद मोटरसाइकिल के पैसों की मांग करने लगे।

साथ ही मृतिका के साथ मारपीट कर उसे मानसिक व शारीरिक रूप से प्रताड़ित करने लगे। मृतिका ने शादी के करीब तीन माह बाद ससुराल में कमरे के अंदर सीलिंग के हुक में साड़ी का फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली थी। जिस पर से थाना अधारताल के अपराध क्रमांक 921/2020 धारा 498 (ए), 304(बी), भादवि 3/4 दहेज प्रतिषेध अधिनियम अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया।

आरोपित आशीष कौल, उसकी मां, आरोपित देवीलाल एवं बहन को गिरफ्तार कर न्यायालय नुरून्ननिशा अंसारी न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी के सामने पेश किया गया। आरोपितों ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से जमानत हेतु आवेदन पेश किया शासन की ओर जिला लोक अभियोजन अधिकारी शेख वसीम के मार्गदर्शन में सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी रानी जैन के द्वारा बताया गया कि अपराध गंभीर प्रकृति का है।

यदि आरोपितों को जमानत का लाभ दिया जाता है तो न्याय के प्रति समाज में विपरीत संदेश पहॅुचेगा। न्यायालय ने अभियोजन के व्यक्त किये गये तर्को से सहमत होते हुए एवं अपराध की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए आरोपितों की जमानत निरस्त कर न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया। बहस के दौरान बचाव में तर्क रखे गए। कोर्ट ने सारे तर्क खारिज कर दिए। इस तरह के मामले बढ़ने को चिंताजनक निरूपित किया। कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी भी की। कहा कि विवाह एक पवित्र बंधन है, जिसे दहेज लोभी नहीं समझ पाते। इसलिए कठोरता आवश्यक है। आरोपित जमानत का लाभ मिलने पर तथ्य से छेड़छाड़ कर सकते हैं।

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