होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान की कार्रवाई: दो वाणिज्यिक जहाज जब्त, कच्चा तेल $100 के पार

ब्रेकिंग: होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरानी फायरिंग से हड़कंप: तीन जहाजों पर हमला, भारत जा रहे जहाज को भी रोका

होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान की कार्रवाई: दो वाणिज्यिक जहाज जब्त, कच्चा तेल $100 के पार। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में बड़ा सैन्य एक्शन करते हुए वाणिज्यिक जहाजों पर हमला कर उन्हें कब्जे में ले लिया है। इस घटना के बाद वैश्विक बाजार में हड़कंप मच गया और कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गईं।

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होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान की कार्रवाई: दो वाणिज्यिक जहाज जब्त, कच्चा तेल $100 के पार

क्या हुआ समंदर में?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने खाड़ी क्षेत्र में गश्त के दौरान तीन मालवाहक जहाजों को निशाने पर लिया। इनमें पनामा के झंडे वाला ‘MSC Francesca’ और लाइबेरिया के झंडे वाला ग्रीक जहाज ‘Epaminondas’ शामिल हैं। दोनों जहाजों पर फायरिंग की गई और बाद में उन्हें ईरानी बलों ने अपने कब्जे में ले लिया।

तीसरे जहाज ‘Euphoria’ पर भी गोलीबारी की गई, लेकिन वह किसी तरह बचते हुए संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के समुद्री क्षेत्र में पहुंच गया।

हमले में कितना नुकसान?

बताया जा रहा है कि ‘Epaminondas’ जहाज के कंट्रोल रूम को हमले में भारी नुकसान पहुंचा है। हालांकि, मोंटेनेग्रो सरकार ने ‘MSC Francesca’ पर मौजूद अपने चार क्रू मेंबर के सुरक्षित होने की पुष्टि की है।

‘रेड लाइन’ का ऐलान

ईरान की सरकारी एजेंसी तसनीम के मुताबिक, IRGC ने खाड़ी क्षेत्र में किसी भी बाहरी दखल को अपनी “रेड लाइन” बताया है। यह संकेत है कि ईरान अब समुद्री रास्तों पर सख्त रुख अपनाने के मूड में है।

अमेरिका से टकराव का असर

इस पूरे घटनाक्रम को डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान से भी जोड़कर देखा जा रहा है, जिसमें उन्होंने ईरान पर “आर्थिक घेराबंदी” की बात कही थी। विश्लेषकों का मानना है कि यह हमला उसी रणनीति के जवाब में ईरान का आक्रामक कदम हो सकता है।

तेल बाजार में भूचाल

घटना के तुरंत बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखा गया। क्रूड ऑयल 100 डॉलर प्रति बैरल के अहम स्तर को पार कर गया, जिससे वैश्विक महंगाई बढ़ने की आशंका गहरा गई है।

आगे क्या?

विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक इस क्षेत्र में तनाव कम नहीं होता और कोई ठोस कूटनीतिक समाधान नहीं निकलता, तब तक वैश्विक सप्लाई चेन पर खतरा बना रहेगा। इसका सीधा असर आम लोगों पर महंगाई के रूप में पड़ सकता है।

यह घटना साफ संकेत देती है कि अगर होर्मुज जैसे अहम समुद्री रास्ते पर तनाव बढ़ता है, तो पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था इसकी चपेट में आ सकती है।