Iran Hormuz Tax: अमेरिका से परमाणु डील के बीच ईरान का नया दांव, होर्मुज में ‘टोल’ नहीं अब वसूलेगा ‘पर्यावरण टैक्स’
Iran Hormuz Tax: अमेरिका से परमाणु डील के बीच ईरान का नया दांव, होर्मुज में ‘टोल’ नहीं अब वसूलेगा ‘पर्यावरण टैक्स’
तेहरान/वाशिंगटन: अमेरिका के साथ होने वाले संभावित अंतरिम परमाणु समझौते (Interim Nuclear Deal) की चर्चाओं के बीच ईरान ने एक नया और बड़ा कूटनीतिक दांव खेल दिया है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने साफ किया है कि वह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले जहाजों से कोई ‘टोल टैक्स’ नहीं वसूलेगा, बल्कि इसकी जगह वह ‘पर्यावरण टैक्स’ और ‘सुरक्षा सेवा शुल्क’ लेगा।
सोमवार को ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसकी जानकारी दी। बाघेई ने कहा कि ‘टोल टैक्स’ पश्चिमी मीडिया द्वारा गढ़ा गया एक शब्द है, जिसके जरिए ईरान को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है।
अमेरिका ने समझौते में लगाई थी टोल पर रोक
अंतर्राष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान और अमेरिका के बीच एक अंतरिम परमाणु समझौते पर सहमति बन चुकी है, जिसकी आधिकारिक घोषणा कभी भी हो सकती है। इस समझौते की मुख्य शर्तों में से एक यह है कि ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलना होगा और वह वहां कोई टोल नहीं वसूल सकता। इसके बदले में अमेरिका ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों में ढील देगा, उसे तेल बेचने की छूट मिलेगी और उसका जब्त पैसा भी वापस लौटाया जाएगा। अमेरिकी पाबंदियों के इसी तोड़ के रूप में ईरान ने अब टैक्स का नाम बदल दिया है।
सुरक्षा और सफाई के नाम पर वसूली की तैयारी
ईरानी प्रवक्ता इस्माइल बाघेई के मुताबिक, समझौते के बाद होर्मुज को पूरी तरह खोल दिया जाएगा, लेकिन जहाजों को जो सुरक्षा सेवाएं दी जाएंगी, उसका पैसा लिया जाएगा। बाघेई ने कहा:
“पर्यावरण की रखवाली करना हम सबकी जिम्मेदारी है। हमारी कोशिश होर्मुज को पूरी तरह क्लीन रखने की है, इसलिए हम जहाजों से पर्यावरण टैक्स लेंगे। इसके लिए ओमान के साथ बातचीत चल रही है और जल्द ही होर्मुज को लेकर एक नया प्रोटोकॉल जारी किया जाएगा।”
क्यों खास है होर्मुज का यह रास्ता?
होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी का एकमात्र प्रवेश द्वार है, जो इसे ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए यह रास्ता कितना जरूरी है, इसे इन बिंदुओं से समझा जा सकता है:
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पूरी दुनिया की 20 प्रतिशत तेल सप्लाई अकेले इसी संकरे रास्ते से होती है।
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सऊदी अरब, यूएई, कतर और इराक जैसे बड़े तेल उत्पादक देश इसी रास्ते से अपना कच्चा तेल और गैस दुनिया भर में बेचते हैं।
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तनाव के बाद ईरान ने लगाया था टोल, भारत को थी छूट
फरवरी 2026 से पहले तक इस मार्ग से गुजरने के लिए जहाजों को कोई टैक्स नहीं देना होता था। लेकिन अमेरिका के साथ बढ़ते तनाव के बाद ईरान ने यहां टोल व्यवस्था लागू कर दी थी, जिसके तहत जहाजों से सुरक्षा के नाम पर करीब 10-10 लाख रुपये वसूले जा रहे थे। हालांकि, भारत, पाकिस्तान और चीन के जहाजों को ईरान ने इस टोल से पूरी तरह मुक्त रखा था। ईरान ने इसके संचालन के लिए बकायदा आईआरजीसी (IRGC) के अधीन एक अलग मंत्रालय भी गठित किया है, जिसके जवान इस रास्ते की पहरेदारी करते हैं।
अब देखना यह होगा कि ईरान के इस नए ‘पर्यावरण टैक्स’ वाले दांव पर अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों की क्या प्रतिक्रिया होती है।








