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Indian Navy Megadeal: भारतीय नौसेना के ₹40,000 करोड़ के ‘नेक्स्ट जेनरेशन कॉर्वेट’ प्रोजेक्ट को जल्द मिलेगी अंतिम मंजूरी; ब्रह्मोस और एयर डिफेंस से लैस होंगे 8 अत्याधुनिक युद्धपोत

Indian Navy Megadeal: भारतीय नौसेना के ₹40,000 करोड़ के 'नेक्स्ट जेनरेशन कॉर्वेट' प्रोजेक्ट को जल्द मिलेगी अंतिम मंजूरी; ब्रह्मोस और एयर डिफेंस से लैस होंगे 8 अत्याधुनिक युद्धपोत

Indian Navy Megadeal: भारतीय नौसेना के ₹40,000 करोड़ के ‘नेक्स्ट जेनरेशन कॉर्वेट’ प्रोजेक्ट को जल्द मिलेगी अंतिम मंजूरी; ब्रह्मोस और एयर डिफेंस से लैस होंगे 8 अत्याधुनिक युद्धपोत

नई दिल्ली: हिंद महासागर (Indian Ocean Region) में चीन और अन्य दुश्मनों की चुनौतियों का कड़ा जवाब देने तथा भारतीय नौसेना की समुद्री ताकत को नई विधिक धार देने के लिए देश का सबसे बड़ा रक्षा आधुनिकीकरण प्लान अंतिम चरण में पहुंच गया है। करीब 40,000 करोड़ रुपये की लागत वाले महत्वाकांक्षी ‘नेक्स्ट जेनरेशन कॉर्वेट’ (NGC) प्रोजेक्ट को जल्द ही अंतिम मंजूरी मिल सकती है. इस महा-परियोजना को अब केवल कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की हरी झंडी का इंतजार है, जिसके इसी साल (2026 में) मिलने की पूरी संभावना है.

इस विन्यास के तहत भारतीय नौसेना कुल 8 अत्याधुनिक नेक्स्ट जेनरेशन कॉर्वेट युद्धपोत अपने बेड़े में शामिल करना चाहती है.

GRSE और गोवा शिपयार्ड मिलकर करेंगे निर्माण; मिला कड़ा ऑर्डर

सूत्रों से मिली लाइव जानकारी के अनुसार, इस रक्षा सौदे के विधिक टेंडर में भारतीय शिपयार्ड्स ने बाजी मारी है:

  • GRSE को बड़ा हिस्सा: सरकारी शिपबिल्डिंग कंपनी गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) इस प्रोजेक्ट में सबसे कम बोली लगाने वाली (L1) कंपनी बनकर उभरी है। उसे 8 में से 5 युद्धपोतों के निर्माण का ऑर्डर मिलना लगभग तय है।
  • गोवा शिपयार्ड की भागीदारी: बाकी बचे 3 युद्धपोतों का निर्माण गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (GSL) में किया जा सकता है।

 ‘डिस्ट्रिब्यूटेड लेथैलिटी’: छोटे आकार में छिपी होगी महा-विनाशक क्षमता

इन नए लड़ाकू युद्धपोतों को नौसेना के आधुनिक “डिस्ट्रिब्यूटेड लेथैलिटी” कॉन्सेप्ट पर तैयार किया जा रहा है।

  • वजन और रफ्तार: लगभग 3,500 टन वजनी ये कॉर्वेट आकार में भले ही अपेक्षाकृत छोटे होंगे, लेकिन इनकी मारक क्षमता विनाशकारी होगी। ये युद्धपोत 32 नॉट्स ($32 \text{ Knots}$) की अधिकतम कड़क गति से समुद्र का सीना चीर सकेंगे।
  • समुद्र में लंबी तैनाती: बिना किसी बाहरी रसद या रीफ्यूलिंग सहायता के ये कॉर्वेट लगातार 30 दिनों तक समुद्र में तैनात रहकर दुश्मनों पर नजर रख सकते हैं।

 मिसाइल विन्यास: ब्रह्मोस और वर्टिकल लॉन्च एयर डिफेंस सिस्टम

इन युद्धपोतों की सबसे बड़ी ताकत इनका आक्रामक और रक्षात्मक हथियार विन्यास होगा:

  1. एक्सटेंडेड रेंज ब्रह्मोस: प्रत्येक कॉर्वेट पर 8 एक्सटेंडेड रेंज ब्रह्मोस (BrahMos) सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलें तैनात होंगी, जो लंबी दूरी तक दुश्मन के जहाजों को नेस्तनाबूद कर सकती हैं।
  2. आसमान में अचूक सुरक्षा: हवाई हमलों को नाकाम करने के लिए इनमें 16 से 32 वर्टिकल लॉन्च शॉर्ट रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइलें (VLS-SR SAM) और AK-630 क्लोज-इन वेपन सिस्टम (CIWS) फिट किया जाएगा।
  3. पनडुब्बियों का काल: समुद्र के नीचे छिपे दुश्मनों का शिकार करने के लिए इनमें एडवांस्ड हल-माउंटेड सोनार, एक्टिव टोव्ड ऐरे सोनार और ट्रिपल-ट्यूब टॉरपीडो लॉन्चर होंगे। इसके अलावा, इनसे ALH ध्रुव या सी किंग जैसे मल्टी-रोल हेलीकॉप्टर भी आसानी से ऑपरेट किए जा सकेंगे।
  4. इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर तकनीक: युद्धपोतों में इज़रायली मूल का ELM-2248 MF-STAR AESA रडार, VARUNA ESM और स्वदेशी SHAKTI जैसे एडवांस इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और टारगेट ट्रैकिंग सिस्टम लगाए जाएंगे.

प्रोजेक्ट की कड़ी टाइमलाइन: कब तक मिलेंगे युद्धपोत?

यदि 2026 में कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) से इस विन्यास को अंतिम विधिक मंजूरी मिल जाती है, तो प्रोजेक्ट इस प्रकार आगे बढ़ेगा:

  1. अनुबंध और डिजाइन (2026-27): इसी साल GRSE और गोवा शिपयार्ड के साथ आधिकारिक अनुबंध पर हस्ताक्षर होंगे और 2027 से स्टील कटिंग के साथ निर्माण शुरू होगा।
  2. पहला लॉन्च (2028-29): प्रोजेक्ट का पहला अत्याधुनिक युद्धपोत साल 2028-29 तक पानी में लॉन्च कर दिया जाएगा।
  3. नौसेना में एंट्री (2031-32): परीक्षणों के बाद पहला कॉर्वेट 2031-32 तक भारतीय नौसेना के बेड़े में विधिक रूप से कमिशन (शामिल) हो जाएगा।
  4. पूर्ण डिलीवरी (2032-2036): बाकी बचे 7 युद्धपोत 2032 से 2036 के बीच चरणबद्ध (Phased Manner) तरीके से नौसेना को सौंपे जाएंगे।Indian Navy Megadeal: भारतीय नौसेना के ₹40,000 करोड़ के ‘नेक्स्ट जेनरेशन कॉर्वेट’ प्रोजेक्ट को जल्द मिलेगी अंतिम मंजूरी; ब्रह्मोस और एयर डिफेंस से लैस होंगे 8 अत्याधुनिक युद्धपोत

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