भारत–दक्षिण कोरिया बिजनेस डायलॉग: AI, सेमीकंडक्टर और डिजिटल पेमेंट में मजबूत होगी साझेदारी
नई दिल्ली: भारत–दक्षिण कोरिया बिजनेस डायलॉग: AI, सेमीकंडक्टर और डिजिटल पेमेंट में मजबूत होगी साझेदारी।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने भारत-कोरिया बिजनेस लीडर्स डायलॉग में हिस्सा लिया और दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दिया।
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भारत–दक्षिण कोरिया बिजनेस डायलॉग: AI, सेमीकंडक्टर और डिजिटल पेमेंट में मजबूत होगी साझेदारी
पीएम मोदी ने कहा कि वैश्विक तनाव के इस दौर में भारत और दक्षिण कोरिया शांति और स्थिरता का संदेश दे रहे हैं। वहीं दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने प्रधानमंत्री मोदी, भारत सरकार और भारतीय जनता के आतिथ्य के लिए आभार जताया।
बैठक के दौरान दोनों देशों ने कई अहम समझौतों पर सहमति जताई। राष्ट्रपति ली ने बताया कि भारत और दक्षिण कोरिया ने इलेक्ट्रॉनिक भुगतान प्रणालियों को जोड़ने के लिए एक MoU पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके तहत दोनों देशों के नागरिक एक-दूसरे के देश में यात्रा के दौरान स्थानीय QR कोड सिस्टम से भुगतान कर सकेंगे, जिससे लेनदेन आसान हो जाएगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और दक्षिण कोरिया अगले दशक की सफलता की कहानियों की नींव रख रहे हैं। दोनों देशों ने AI, सेमीकंडक्टर और IT क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए “इंडिया-कोरिया डिजिटल ब्रिज” शुरू किया है।
इसके अलावा जहाज निर्माण, इस्पात, बंदरगाह और सतत विकास जैसे क्षेत्रों में भी कई MoUs पर हस्ताक्षर हुए हैं। पीएम मोदी ने कहा कि इससे औद्योगिक और आर्थिक सहयोग को नई गति मिलेगी। उन्होंने यह भी बताया कि फिल्म, एनीमेशन और गेमिंग जैसे रचनात्मक उद्योगों में भी सहयोग बढ़ाया जाएगा।
पीएम मोदी ने घोषणा की कि वर्ष 2028 में भारत-दक्षिण कोरिया फ्रेंडशिप फेस्टिवल आयोजित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं, खासकर के-पॉप और भारतीय सिनेमा की बढ़ती लोकप्रियता के चलते।
व्यापार को लेकर भी बड़ा लक्ष्य तय किया गया है। दोनों देशों ने मौजूदा 27 अरब डॉलर के व्यापार को 2030 तक 50 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए इंडिया-कोरिया फाइनेंशियल फोरम, इंडस्ट्रियल कोऑपरेशन कमेटी और इकोनॉमिक सिक्योरिटी डायलॉग जैसी नई पहल शुरू की गई हैं।
यह बैठक भारत और दक्षिण कोरिया के बीच आर्थिक, तकनीकी और सांस्कृतिक सहयोग को एक नई दिशा देने वाली मानी जा रही है।

