रायपुर में स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं की बिजली खपत 28% घटी: 400 यूनिट से ज्यादा खपत वाले उपभोक्ताओं में 44% की बड़ी गिरावट, आंकड़ों से दूर हुआ भ्रम
रायपुर में स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं की बिजली खपत 28% घटी: 400 यूनिट से ज्यादा खपत वाले उपभोक्ताओं में 44% की बड़ी गिरावट, आंकड़ों से दूर हुआ भ्रम

रायपुर में स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं की बिजली खपत 28% घटी: 400 यूनिट से ज्यादा खपत वाले उपभोक्ताओं में 44% की बड़ी गिरावट, आंकड़ों से दूर हुआ भ्रम
रायपुर (छत्तीसगढ़): रायपुर शहरी क्षेत्र में स्मार्ट मीटरों को लेकर चल रही चर्चाओं और भ्रम के बीच छत्तीसगढ़ पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी के विश्लेषण में चौंकाने वाले और राहत देने वाले आंकड़े सामने आए हैं। 1 जून से 26 जून 2026 की तुलना में 1 जुलाई से 26 जुलाई 2026 के दौरान रायपुर के 3,11,374 घरेलू स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं की कुल बिजली खपत में 28 प्रतिशत की भारी कमी दर्ज की गई है।
इस विश्लेषण से यह पूरी तरह स्पष्ट हो गया है कि बिजली बिल का आधार स्मार्ट मीटर की तकनीकी कार्यप्रणाली नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं द्वारा की जा रही उनकी वास्तविक खपत (Actual Consumption) और मौसम में बदलाव है।
आंकड़ों में समझें खपत में गिरावट का गणित
पावर कंपनी द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, जून और जुलाई 2026 के बीच बिजली की खपत में उल्लेखनीय अंतर देखा गया है:
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कुल खपत में 28% की गिरावट: 1 जून से 26 जून 2026 के बीच स्मार्ट मीटर वाले घरेलू उपभोक्ताओं की कुल बिजली खपत 10.85 करोड़ यूनिट दर्ज की गई थी, जो 1 जुलाई से 26 जुलाई 2026 के दौरान घटकर 7.77 करोड़ यूनिट रह गई।
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बड़े उपभोक्ताओं की खपत 44% घटी: 400 यूनिट से अधिक बिजली की खपत करने वाले 1,21,135 उपभोक्ताओं के बिलों के गहन विश्लेषण से पता चलता है कि जुलाई महीने में उनकी खपत में लगभग 44 प्रतिशत की भारी कमी आई है।
गर्मी और मौसम का प्रभाव, मीटर की गड़बड़ी नहीं
बिजली विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अप्रैल, मई और जून के भीषण गर्मी वाले महीनों में एसी, कुलर और पंखों का इस्तेमाल अत्यधिक बढ़ जाता है, जिससे बिजली की खपत स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती है।
अध्ययन में यह भी सामने आया कि जिन मकानों में स्मार्ट मीटर नहीं लगे थे, उनके बिलों और खपत में भी पिछले वर्ष के अप्रैल-मई-जून की तुलना में वृद्धि दर्ज की गई थी। जुलाई में मानसून के आगमन और तापमान में गिरावट के साथ ही एसी और कूलर का उपयोग कम हुआ, जिससे स्मार्ट मीटर वाले उपभोक्ताओं के यूनिट्स और बिलों में स्वतः ही 28% से 44% तक की गिरावट आ गई।








