‘हनुमान अंश’ से लेकर ‘कृष्णावतार’ तक: 50 साल बाद बॉलीवुड में फिर क्यों लौटा भक्ति और धार्मिक फिल्मों का सुनहरा दौर?
‘हनुमान अंश’ से लेकर ‘कृष्णावतार’ तक: 50 साल बाद बॉलीवुड में फिर क्यों लौटा भक्ति और धार्मिक फिल्मों का सुनहरा दौर?
नई दिल्ली / मुंबई (यश भारत डॉट कॉम नेटवर्क): भारतीय सिनेमा में समय-समय पर दर्शकों की पसंद बदलती रही है। कभी एक्शन, कभी एक्शन-ड्रामा तो कभी रोमांटिक फिल्मों का बोलबाला रहा। लेकिन 2026 में भारतीय बॉक्स ऑफिस पर एक ऐसा चमत्कारिक मोड़ आया है जिसने पूरे फिल्म उद्योग का गणित बदल कर रख दिया है। नीम करोली बाबा के जीवन पर बनी फिल्म ‘हनुमान अंश’ की अभूतपूर्व सफलता और उसके बाद ‘कृष्णावतारम्’ जैसी विशाल परियोजनाओं के ऐलान ने साबित कर दिया है कि 50 सालों के लंबे इंतजार के बाद बॉलीवुड में धार्मिक व भक्ति रस से सराबोर फिल्मों का दौर पूरी रंगत के साथ वापस लौट आया है।
51 साल पुराना ‘जय संतोषी मां’ का इतिहास दोहराया
1975 में आई पं. प्रदीप कुमार की फिल्म ‘जय संतोषी मां’ ने उस दौर में ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘शोले’ को कमाई और लोकप्रियता के प्रतिशत के मामले में पीछे छोड़ दिया था। थिएटर्स के बाहर लोग चप्पल उतारकर अंदर जाते थे और स्क्रीन पर आरती उतारी जाती थी।
ठीक 51 साल बाद ‘हनुमान अंश’ ने उसी इतिहास को दोहराया है। महज ₹2 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने बिना किसी बड़े स्टारकास्ट या भारी-भरकम प्रमोशन के सिर्फ दर्शकों के ‘वर्ड ऑफ माउथ’ से ₹150 करोड़ से अधिक का कलेक्शन कर बॉलीवुड के बड़े-बड़े दिग्गजों को चौंका दिया।
आखिर क्यों लौट रहा है यह ट्रेंड? (5 मुख्य कारण)
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‘मास एक्शन’ से दर्शकों का मोहभंग: महंगे वीएफएक्स (VFX) और बेतुकी हिंसा वाली एक्शन फिल्मों से दर्शक ऊब चुके हैं। उन्हें अब वास्तविक, शांतिदायक और भावना प्रधान कहानियों की तलाश है।
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जड़ों और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ाव: युवा पीढ़ी अपनी पौराणिक कथाओं, संतों के जीवन और सांस्कृतिक विरासत को बड़े पर्दे पर प्रामाणिक रूप से देखना चाहती है।
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सच्ची और सादगी भरी कहानियों की ताकत: ‘महावतार नृसिंह’ (एनिमेटेड), गुजराती फिल्म ‘लालो – कृष्णा सदा सहायते’ और ‘हनुमान अंश’ जैसी फिल्मों ने साबित किया कि अगर कहानी में भक्ति का भाव और सच्चाई हो, तो करोड़ों का बजट मायने नहीं रखता।
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सकारात्मकता और आत्मिक शांति की चाह: आज के भागदौड़ और मानसिक तनाव भरे माहौल में दर्शक सिनेमाघरों में सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा की अनुभूति भी चाहते हैं।
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कम बजट में अप्रत्याशित मुनाफा (ROI): ट्रेड विश्लेषकों के लिए यह ट्रेंड एक सोने की खदान बन गया है। कम लागत में 2000% से अधिक का रिटर्न निर्माताओं को इस जॉनर की ओर खींच रहा है।
लाइनअप में हैं कई बड़ी धार्मिक व पौराणिक फिल्में
‘हनुमान अंश’ और ‘कृष्णावतारम्’ की सफलता की लहर को देखते हुए बॉलीवुड और साउथ सिनेमा के बड़े प्रोडक्शन हाउस ने कई भक्ति फिल्मों की आधिकारिक घोषणा कर दी है:








