Thursday, May 21, 2026
Latest:
Latest

HP High Court: शादीशुदा महिला का लिव-इन रिलेशन ‘व्यभिचार’, कोर्ट की दो टूक- अवैध संबंधों को नहीं मिलेगी कानूनी ढाल, याचिका खारिज

शिमला: HP High Court: शादीशुदा महिला का लिव-इन रिलेशन ‘व्यभिचार’, कोर्ट की दो टूक- अवैध संबंधों को नहीं मिलेगी कानूनी ढाल, याचिका खारिज। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने वैवाहिक रिश्तों की पवित्रता और लिव-इन रिलेशनशिप की कानूनी सीमाओं को लेकर एक नजीर पेश करने वाला फैसला सुनाया है।

HP High Court: शादीशुदा महिला का लिव-इन रिलेशन ‘व्यभिचार’, कोर्ट की दो टूक- अवैध संबंधों को नहीं मिलेगी कानूनी ढाल, याचिका खारिज

हाईकोर्ट ने एक शख्स द्वारा दायर की गई बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि एक शादीशुदा महिला का किसी अन्य पुरुष के साथ लिव-इन में रहना ‘व्यभिचार’ (Adulterous) की श्रेणी में आता है, और अदालत ऐसे रिश्ते को कोई कानूनी या न्यायिक मान्यता नहीं दे सकती। यह आदेश मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और न्यायमूर्ति बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए जारी किया।

पति-पत्नी के वैवाहिक विवादों में दखल नहीं दे सकता कोर्ट

हाईकोर्ट की बेंच ने साफ शब्दों में कहा कि यह याचिका वर्तमान स्वरूप में सुनवाई के योग्य (Maintainable) ही नहीं है। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया:

“चूंकि कथित तौर पर बंदी बनाई गई महिला अपने कानूनी पति और बच्चे के साथ रह रही है, इसलिए इस अदालत के लिए यह कतई उचित नहीं है कि वह इस याचिका के माध्यम से किसी पति-पत्नी के बीच के वैवाहिक मुद्दों या विवादों में हस्तक्षेप करे।”

‘लिव-इन एग्रीमेंट’ दिखाकर शख्स ने किया था अवैध कब्जे का दावा

यह पूरा मामला बेहद पेचीदा और चौंकाने वाला था, जिसे याचिकाकर्ता ने एक अलग रंग देने की कोशिश की थी:

  • क्या था याचिकाकर्ता का आरोप: याचिकाकर्ता (शख्स) ने खुद को महिला का ‘करीबी दोस्त’ बताते हुए कोर्ट में दावा किया था कि महिला को उसके पति और सास ने जबरन अवैध तरीके से बंधक बनाकर रखा हुआ है। सबूत के तौर पर उसने महिला द्वारा भेजे गए कुछ कथित मैसेज भी दिखाए, जिनमें महिला ने अपने ससुराल वालों से डरे होने की बात कही थी।

  • कोर्ट रूम में हुआ खुलासा: जब सुनवाई के दौरान बेंच ने याचिकाकर्ता से सीधा सवाल किया कि क्या उसका महिला के साथ कोई शारीरिक संबंध था? तब शख्स ने कुबूल किया कि वे दोनों लिव-इन रिलेशनशिप में रह चुके हैं। इतना ही नहीं, उसने कोर्ट के सामने 17 दिसंबर, 2025 का एक कथित लिव-इन रिलेशनशिप एग्रीमेंट भी पेश कर दिया।

कोर्ट की दो टूक: अवैध संबंधों को नहीं मिलेगा कानूनी ढाल

याचिकाकर्ता की दलीलों और लिव-इन एग्रीमेंट को देखने के बाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अख्तियार किया। कोर्ट ने कहा कि जब महिला पहले से शादीशुदा है और उसने अपने पति से कानूनी तौर पर तलाक नहीं लिया है, तब तक किसी अन्य पुरुष के साथ उसका लिव-इन एग्रीमेंट पूरी तरह अवैध है। अदालत ने साफ किया कि इस तरह के ‘व्यभिचारी रिश्तों’ को आधार बनाकर कानून का इस्तेमाल पति-पत्नी के वैध रिश्ते को तोड़ने या उसमें दखल देने के लिए नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर कोर्ट ने याचिका को सिरे से खारिज कर दिया।

Usha Pamnani

20 वर्षों से डिजिटल एवं प्रिंट मीडिया की पत्रकारिता में देश-विदेश, फ़िल्म, खेल सहित सामाजिक खबरों की एक्सपर्ट, वर्तमान में यशभारत डॉट कॉम में वरिष्ठ जिला प्रतिनिधि