रचा गया इतिहास: जल्द शुरू होगी ‘स्लीमनाबाद टनल’, महाकौशल और विंध्य के 1500 गांवों की बदलेगी तस्वीर
रचा गया इतिहास: जल्द शुरू होगी 'स्लीमनाबाद टनल', महाकौशल और विंध्य के 1500 गांवों की बदलेगी तस्वीर
रचा गया इतिहास: जल्द शुरू होगी ‘स्लीमनाबाद टनल’, महाकौशल और विंध्य के 1500 गांवों की बदलेगी तस्वीर
- ● सीएम डॉ. मोहन यादव ने की जल संसाधन और नर्मदा घाटी विकास विभाग की उच्च स्तरीय समीक्षा
- ● आगामी 6 माह में 14 जिलों की 6 लाख हेक्टेयर भूमि तक पहुंचेगा पानी
- ● केन-मंदाकिनी लिंक और सिंहस्थ 2028 के कार्यों को दी गई सर्वोच्च प्राथमिकता
भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंत्रालय में नर्मदा घाटी विकास (NVDA) और जल संसाधन विभाग के कार्यों की एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की। मुख्यमंत्री ने ‘कृषक कल्याण वर्ष’ के संकल्प को दोहराते हुए निर्देश दिए हैं कि सिंचाई सुविधाओं के विस्तार को राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता में रखा जाए।
इस बैठक में कई बड़े फैसलों और प्रोजेक्ट्स की प्रगति की समीक्षा की गई, जिसमें विंध्य और महाकौशल की लाइफलाइन मानी जा रही स्लीमनाबाद टनल (Sleemanabad Tunnel) का उद्घाटन और आगामी 6 महीनों में 14 जिलों में 6 लाख हेक्टेयर नई सिंचाई क्षमता विकसित करने का रोडमैप शामिल है।
स्लीमनाबाद टनल: 17 साल का इंतजार खत्म, विंध्य को मिलेगा नर्मदा का पानी
बैठक में मुख्यमंत्री ने नर्मदा की ‘अमृत धारा’ को सोन नदी बेसिन से जोड़ने वाली देश की सबसे लंबी सिंचाई सुरंग (स्लीमनाबाद टनल) के उद्घाटन की तैयारियों के निर्देश दिए।
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प्रोजेक्ट की खासियत: बरगी व्यपवर्तन परियोजना के तहत बनी यह ट्रांस-वैली केनाल प्रदेश की सबसे बड़ी (227 क्यूमेक) डिस्चार्ज क्षमता वाली नहर है।
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टनल के आंकड़े: यह टनल 11.952 किलोमीटर लंबी है, जिसका व्यास 10.140 मीटर और जल प्रवाह क्षमता 152 क्यूमेक है।
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किन्हें मिलेगा लाभ: इस टनल के चालू होने से जबलपुर, कटनी, सतना, मैहर, रीवा और पन्ना जिलों के लगभग 1,500 गांवों की करीब ढाई लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचाई का वरदान मिलेगा। करीब डेढ़ दशक से लंबित यह चुनौतीपूर्ण कार्य अब पूर्णता की ओर है।
‘कृषक कल्याण वर्ष’: 6 महीनों में 14 जिलों को सौगात
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि इस वर्ष जिन सिंचाई परियोजनाओं के कार्य पूरे हो चुके हैं, उनके लोकार्पण की तैयारी कर ली गई है।
आगामी 6 महीनों के भीतर लगभग 6 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई क्षमता बढ़ाने वाली योजनाओं का उद्घाटन किया जाएगा। लाभान्वित होने वाले प्रमुख जिलों में बड़वानी, सीहोर, शाजापुर, देवास, झाबुआ, धार, खण्डवा, खरगोन, आलीराजपुर, राजगढ़, जबलपुर, कटनी और मण्डला शामिल हैं। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले समय में स्वीकृत और निर्माणाधीन परियोजनाओं को मिलाकर प्रदेश का कुल सिंचित रकबा 108 लाख हेक्टेयर तक पहुंचाया जाए।
. नदी जोड़ो परियोजना: केन-मंदाकिनी और केन-बेतवा लिंक पर बड़ा अपडेट
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केन-मंदाकिनी लिंक परियोजना: इस अंतर-प्रांतीय परियोजना का 8,400 करोड़ रुपये से अधिक का प्रस्ताव भारत सरकार को भेजा जा चुका है। इसके तहत 20 किलोमीटर लंबी टनल बनाई जाएगी, जिससे 93 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में सिंचाई होगी और 15.8 मेगावाट विद्युत उत्पादन होगा।
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केन-बेतवा और पार्वती-कालीसिंध-चम्बल लिंक: बुंदेलखंड के 10 जिलों को लाभ पहुंचाने वाली केन-बेतवा परियोजना में भू-अर्जन और पुनर्वास के तहत 90 प्रतिशत मुआवजा भुगतान किया जा चुका है। वहीं, संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चम्बल परियोजना से 13 जिलों की 6.16 लाख हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी।
सिंहस्थ 2028: शिप्रा तट पर 60% घाट निर्माण कार्य पूरा
आगामी सिंहस्थ के मद्देनजर उज्जैन और आसपास के क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जा रहा है:
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करोड़ों श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए शिप्रा नदी के तट पर 29 किलोमीटर लंबाई में नए घाटों का निर्माण तेजी से चल रहा है, जिसका 60% कार्य पूर्ण हो चुका है।
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इसके अलावा, सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी परियोजना का 82% और कान्ह डायवर्सन क्लोज्ड डक्ट परियोजना का 66% कार्य पूरा हो चुका है।
क्षतिग्रस्त कारम बांध का पुनर्निर्माण अंतिम चरण में
बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि वर्ष 2022 में क्षतिग्रस्त हुए धार जिले के कारम बांध का पुनर्निर्माण कार्य वर्ष 2024 से दोबारा शुरू किया गया था, जो अब लगभग पूरा हो चुका है। इसके साथ ही छिंदवाड़ा सिंचाई कॉम्प्लेक्स (चतुर्थ बांध परियोजना) के कार्यों में भी तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं।







