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अटल से लेकर नड्डा तक भाजपा अध्यक्षों का ऐतिहासिक सफर

नई दिल्ली। नितिन नबीन होंगे अब भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पर इतिहास की बात करें तो अटल से लेकर नड्डा तक भाजपा अध्यक्षों का ऐतिहासिक सफर रहा। भाजपा के गठन के साथ 1980 में अटल बिहारी वाजपेयी पार्टी के पहले अध्यक्ष बने। शुरुआती दौर में पार्टी का प्रदर्शन कमजोर रहा और 1980 के लोकसभा चुनाव में उसे मात्र दो सीटें मिलीं। इसके बाद 1986 में लालकृष्ण आडवाणी को अध्यक्ष बनाया गया, जिन्होंने भाजपा को हिंदुत्व और रामजन्मभूमि आंदोलन की दिशा में मोड़ दिया। 1989 की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में इस संबंध में प्रस्ताव भी पारित हुआ और यहीं से भाजपा का राजनीतिक विस्तार तेज हुआ।

अध्यक्ष पद पर उतार–चढ़ाव

आडवाणी के बाद मुरली मनोहर जोशी, कुशाभाऊ ठाकरे, जना कृष्णमूर्ति, एम. वेंकैया नायडू और बंगारू लक्ष्मण जैसे नेता अध्यक्ष बने। बंगारू लक्ष्मण के भ्रष्टाचार विवाद में फंसने के बाद पहली बार जना कृष्णमूर्ति को कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर बाद में पूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई।
2003 में भाजपा ने अपने संविधान में संशोधन कर लगातार दो कार्यकाल तक अध्यक्ष बने रहने की सीमा तय की। 2004 के चुनाव में हार के बाद वेंकैया नायडू ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ा और बदले नियमों के तहत आडवाणी फिर अध्यक्ष बने।

2009 के चुनाव में हार के बाद राजनाथ सिंह ने इस्तीफा दिया और नितिन गडकरी अध्यक्ष बने। हालांकि आयकर छापों से जुड़े विवाद के चलते गडकरी को दूसरा कार्यकाल पूरा करने से पहले पद छोड़ना पड़ा। इसके बाद फिर राजनाथ सिंह को जिम्मेदारी मिली, जिनके नेतृत्व में 2014 में भाजपा को पूर्ण बहुमत हासिल हुआ।

शाह से नड्डा तक का दौर

2014 में अमित शाह अध्यक्ष बने और संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत किया। 2019 में जेपी नड्डा पहले कार्यकारी और फिर पूर्ण अध्यक्ष बने। 2024 में उनका कार्यकाल समाप्त होने के बावजूद उन्हें एक साल का विस्तार दिया गया। अब नितिन नबीन को कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर पार्टी नई पीढ़ी के नेतृत्व की ओर बढ़ने का संकेत दे चुकी है।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संगठनात्मक चुनाव निर्विरोध संपन्न होने के साथ नितिन नबीन भाजपा के अगले राष्ट्रीय अध्यक्ष होंगे हैं।

भाजपा ने आडवाणी के नेतृत्व में लड़ा था 2009 का आम चुनाव

  • हालांकि, आडवाणी का तीसरा कार्यकाल लंबा नहीं चला और पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना को धर्मनिरपेक्ष बताने के बाद उन्हें भाजपा अध्यक्ष पद छोड़ने के लिए कहा गया। उनके बाद राजनाथ सिंह भाजपा अध्यक्ष बने।
  • 2009 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की हार के बाद राजनाथ सिंह ने अध्यक्ष पद छोड़ दिया। यह पद इसके बाद नितिन गडकरी को गया। संगठन में उनके मजबूत प्रदर्शन को देखते हुए आरएसएस ने भाजपा के संविधान में बदलाव कराया और लगातार अध्यक्ष रहने के नियम को फिर लागू कर दिया।
  • गडकरी को अपने दूसरे कार्यकाल में ही इस्तीफा देना पड़ा। दरअसल, उनसे जुड़े पूर्ति समूह पर आयकर विभाग के छापों की वजह से गडकरी ने आगे अध्यक्ष पद पर न रहने का फैसला किया। इसके बाद भाजपा प्रमुख का पद फिर राजनाथ सिंह को मिला।

  • राजनाथ सिंह के नेतृत्व में ही 2014 में भाजपा को लोकसभा चुनाव में पूर्ण बहुमत हासिल करने में सफलता मिली। लेकिन राजनाथ सिंह केंद्रीय गृह मंत्रालय सौंपा गया, जिसकी वजह से उन्होंने भाजपा अध्यक्ष पद छोड़ दिया।
  • 2014 में अमित शाह भाजपा अध्यक्ष बने और पार्टी संगठन को मजबूती देते हुए लगातार दो बार पार्टी प्रमुख रहे। 2019 में जब अमित शाह का कार्यकाल खत्म हुआ तो भाजपा ने जेपी नड्डा को पहले कार्यकारी अध्यक्ष और फिर पूर्ण अध्यक्ष बनाया। 2024 में उनका कार्यकाल खत्म हो चुका है और मौजूदा समय में नड्डा एक साल के एक्सटेंशन पर रहे।

भाजपा में लंबा चला अध्यक्ष बदलने का दौर

  • इनमें आडवाणी के बाद भाजपा अध्यक्ष बने मुरली मनोहर जोशी, जना कृष्णमूर्ति, एम. वेंकैया नायडू, बंगारू लक्ष्मण, कुशाभाऊ ठाकरे जैसे नेता शामिल रहे, जो कि आरएसएस से गहराई से जुड़े थे और राजनीतिक तौर पर बाद में भाजपा में उभरे। इनमें से सिर्फ मुरली मनोहर जोशी और कुशाभाऊ ठाकरे ने ही अपना कार्यकाल पूरा किया।
  • खास बात यह रही कि बंगारू लक्ष्मण के भ्रष्टाचार से जुड़े एक मामले में उलझने के बाद पार्टी ने पहली बार जना कृष्णमूर्ति को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया। उन्हें कुछ ही दिन में पूर्ण अध्यक्ष नियुक्त कर दिया गया।
  • 2003 में भाजपा ने अपने संविधान में बदलाव किया और अध्यक्ष पद के लिए लगातार दो बार की सीमा तय कर दी। इसमें साफ किया गया कि कोई भी सदस्य एक बार से ज्यादा अध्यक्ष रह सकता है, लेकिन लगातार नहीं।
  • इसके चलते जब 2004 में भाजपा की लोकसभा चुनाव में हार हुई तो वेंकैया नायडू ने इसकी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए भाजपा अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। आखिरकार बदले हुए नियम के तहत आडवाणी फिर से पार्टी के अध्यक्ष बने।

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