आम जनता की थाली हुई महंगी: खाद्य मुद्रास्फीति 7.74% पर पहुंची; जानें आलू-टमाटर और प्याज का क्या रहा हाल
पश्चिम एशिया (मध्य पूर्व) में जारी तनाव और अन्य वैश्विक संकटों के कारण पूरी दुनिया महंगाई की चपेट में है, जिसका असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी साफ दिखाई दे रहा है। देश में खाद्य वस्तुओं के दाम बढ़ने से सितंबर 2026 में खुदरा महंगाई दर (CPI आधारित मुद्रास्फीति) बढ़कर 5.54 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच गई है। केंद्र सरकार द्वारा सोमवार को जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, अगस्त महीने में खुदरा महंगाई दर 4.83 प्रतिशत थी।
खाद्य महंगाई दर 7.74% के पार
जनवरी में लागू नई सूचकांक श्रृंखला के तहत सितंबर की खुदरा महंगाई दर अब तक के सबसे उच्चतम स्तर पर दर्ज की गई है। खाने-पीने की चीजों (CFPI) की महंगाई दर सितंबर में उछलकर 7.74 प्रतिशत हो गई, जो पिछले महीने (अगस्त) 5.97 प्रतिशत थी। इस तेज बढ़ोतरी के साथ ही महंगाई दर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 4% के लक्ष्य से ऊपर निकल गई है, हालांकि यह 2-6% की स्वीकार्य सीमा के भीतर बनी हुई है। उल्लेखनीय है कि RBI ने बीते हफ्ते ही रेपो रेट में 0.25% का इजाफा कर इसे 5.50% किया था। आम जनता की थाली हुई महंगी: खाद्य मुद्रास्फीति 7.74% पर पहुंची; जानें आलू-टमाटर और प्याज का क्या रहा हाल
प्याज के दामों में 108% का उछाल, आलू-टमाटर में राहत
सितंबर महीने में प्रमुख खाद्य सामग्रियों की कीमतों में मिला-जुला असर देखने को मिला:
प्याज: प्याज की महंगाई दर में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई और यह अगस्त के 48.78% से बढ़कर 108.09% पर पहुंच गई।
लहसुन व नींबू: लहसुन की महंगाई दर 43.60% से बढ़कर 54.62% और नींबू की कीमतें 15.15% से बढ़कर 36.41% हो गईं।
सब्जियों में राहत: आलू की कीमतों में साल-दर-साल 11.50% और टमाटर की कीमतों में 8.62% की गिरावट दर्ज की गई है।
ग्रामीण बनाम शहरी: ग्रामीण भारत में महंगाई की मार ज्यादा पड़ी, जहां खुदरा महंगाई दर बढ़कर 6.08% (अगस्त में 5.24%) हो गई, जबकि शहरी महंगाई दर 4.88% रही।
वर्ष 2026 में महीनेवार खुदरा महंगाई दर का आंकड़ा
| महीना (2026) | खुदरा महंगाई दर (%) |
| जनवरी | 2.75% |
| फरवरी | 3.21% |
| मार्च | 3.40% |
| अप्रैल | 3.48% |
| मई | 3.93% |
| जून | 4.38% |
| जुलाई | 4.45% |
| अगस्त | 4.82% |
| सितंबर | 5.54% |
अन्य क्षेत्रों का हाल: सितंबर में पर्सनल केयर व अन्य सेवाओं में महंगाई 13.75%, रेस्टोरेंट व होटलों में 9.36%, ट्रांसपोर्ट में 5.01% (निजी वाहन खर्च +7.46%), शिक्षा सेवाओं में 3.94% और हाउसिंग सेक्टर में 2.74% दर्ज की गई।













